केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने मुस्लिम धर्मगुरु शेख अबूबकर अहमद के बयान की कड़ी आलोचना की है. शेख अबूबकर ने कहा था कि महिलाओं को घरों तक ही सीमित रहना चाहिए और सार्वजनिक जगहों पर नहीं आना चाहिए. सीएम सतीशन ने इन टिप्पणियों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने इस्लामी इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि पैगंबर मुहम्मद की पत्नियों ने सार्वजनिक जीवन में अहम भूमिका निभाई थी.
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केरल के मुख्यमंत्री VD Satheesan ने ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर के बयान की आलोचना की है. उन्होंने महिलाओं को घर में सीमित रखने की बात खारिज की. वहीं, सीएम सतीशन के बयान की कुछ मुस्लिम संगठनों ने आलोचना की है.

मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने कहा कि शेख अबूबकर अहमद का बयान, इस्लाम में महिलाओं के इतिहास से मेल नहीं खाता है. उन्होंने कहा,
"पैगंबर की पहली पत्नी खदीजा एक बड़ी व्यापारी थीं. पैगंबर की एक और पत्नी आयशा ने 'बैटल ऑफ द कैमल' (ऊंट की लड़ाई) में हिस्सा लिया था. वे कमांडर-इन-चीफ़ थीं."
उन्होंने आगे कहा,
'इस्लामी इतिहास की गलत व्याख्या'"हम 21वीं सदी में 19वीं सदी जैसी सोच रखने का कड़ा विरोध करते हैं. हमारी प्रोग्रेसिव सोच यह है कि महिलाओं को घरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए और उन्हें जिंदगी के सभी पहलुओं में भाग लेना चाहिए और मेनस्ट्रीम का हिस्सा बनकर रहना चाहिए."
हालांकि खुद इस्लामिक स्कॉलर्स और लीडर्स सीएम सतीशन से इत्तेफाक नहीं रखते. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार, 2 सितंबर की रात ‘शेख अबूबकर अहमद’ के नेतृत्व वाले संगठन के एक डेलीगेशन ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की. उन्होंने उन पर इस्लामी इतिहास की गलत व्याख्या करने का आरोप लगाया, खासकर खदीजा और आयशा के संदर्भ में.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मीटिंग के दौरान सीएम वीडी सतीशन अपनी पहले की बात पर अड़े रहे. डेलीगेशन में शामिल नेताओं ने कहा कि बैठक पहले से तय थी. हालांकि, बैठक में क्या बातचीत हुई इस पर सीएम ऑफिस ने कोई टिप्पणी नहीं की है.
मुस्लिम संगठनों ने की आलोचनासीएम सतीशन की टिप्पणियों की कुछ मुस्लिम संगठनों ने आलोचना की है. केरल के सबसे बड़े मुस्लिम संगठनों में से एक 'समस्त केरल जेम-इय्यतुल उलेमा' के अध्यक्ष जिफरी मुथुकोया थंगल ने कहा कि आस्था से जुड़े मामलों पर बात करने के लिए धार्मिक विद्वानों को कमतर नहीं आंका जाना चाहिए. थंगल ने कहा,
“शरिया हर दौर में मान्य है. यह पवित्र कुरान का फैसला है. आप चाहें तो इसे मान सकते हैं या नहीं भी. अगर यह हमारे दौर के हिसाब से सही नहीं है, तो आपको इसे मानने की जरूरत नहीं है. लेकिन जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की तरफ से ऐसे बयान नहीं आने चाहिए.”
संगठन के दूसरे नेता नसर फैजी कूदाथायी ने भी शेख अबूबकर अहमद के बयान का बचाव किया. उन्होंने कहा कि धर्मगुरु की बातों का गलत मतलब निकाला गया. 'ऑल इंडिया सुन्नी जमिय्यतुल उलमा' से जुड़े संगठन 'सुन्नी स्टूडेंट्स फेडरेशन' (SSF) ने एक लाइन का बयान जारी कर कहा,
“धर्म की व्याख्या करना राज्य का काम नहीं है, मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी शासन चलाना है.”
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मुस्लिम धर्मगुरु ने क्या कहा था?कोच्चि में आयोजित हब्बुल रसूल कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए भारत के ग्रैंड मुफ्ती ने कहा था कि महिलाओं को सार्वजनिक मंचों पर लाने से ‘भारी तबाही’ होगी और इस्लाम में इसे रोकने के लिए ही पर्दा प्रथा का नियम बनाया गया है.
उन्होंने अपनी बात समझाने के लिए सोने की चेन का उदाहरण दिया. उन्होंने बताया कि जब कोई व्यक्ति ज्वेलरी की दुकान से सोने की चेन खरीदता है, तो उसे अलमारी, डिब्बे और पैकिंग के अंदर सुरक्षित रखा जाता है. इसके बाद ही ग्राहक को दिखाया जाता है.
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