The Lallantop

केरल में गवर्नर ने किसे वीसी बनाया? लेफ्ट को कांग्रेस वाली सरकार पर 'शक' होने लगा

केरल के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने BJP से जुड़ी डॉ. सजिता रानी को Kerala Agricultural University का कुलपति (इन-चार्ज) नियुक्त किया है. राज्य सरकार और छात्र संगठनों का कहना है कि नियुक्ति में तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया.

Advertisement
post-main-image
डॉ. सजिता रानी (बाएं) को राज्यपाल (दाएं) ने यूनिवर्सिटी का कुलपति (इन-चार्ज) नियुक्त किया है. (फोटो: X)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • केरल एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के नए कुलपति (इन-चार्ज) पद पर डॉ. सजिता रानी की नियुक्ति राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने की है, जो बी. अशोक के निधन के बाद खाली हुआ था।
  • यह नियुक्ति राज्य सरकार की सिफारिश को नजरअंदाज करते हुए की गई है, जबकि सरकार ने एकेडमिक एक्सीलेंस के आधार पर उम्मीदवार का नाम भेजा था, लेकिन गवर्नर ने सीनियरिटी को प्राथमिकता दी।
  • इस नियुक्ति को लेकर सरकार और छात्र संगठनों ने विरोध जताया है, जिससे राज्य में गवर्नर और सरकार के बीच टकराव और बढ़ गया है और मुद्दे पर आगे चर्चा होने की संभावना है।

केरल एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी में नए वाइस-चांसलर (VC) की नियुक्ति को लेकर विवाद शुरू हो गया है. राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने डॉ. सजिता रानी को यूनिवर्सिटी का कुलपति (इन-चार्ज) नियुक्त किया है. आरोप है कि यह फैसला राज्य सरकार की सिफारिश को नजरअंदाज करके लिया गया. डॉ. सजिता रानी 'अध्यापक परिषद' से जुड़ी हैं, जो भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े शिक्षकों का संगठन है. 

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
कृषि मंत्री ने क्या बताया?

यह नियुक्ति बी. अशोक के निधन के बाद खाली हुए कुलपति के पद पर की गई है. राज्य सरकार और छात्र संगठनों का कहना है कि नियुक्ति में तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया. केरल के कृषि मंत्री टी. सिद्दीकी ने कहा कि सरकार ने जिस नाम की सिफारिश की थी, उसे एकेडमिक एक्सीलेंस (शैक्षणिक उपलब्धियों) के आधार पर चुना गया था. उन्होंने कहा, 

जिस व्यक्ति का नाम सरकार ने भेजा था, उसकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छी पहचान है. प्रो-चांसलर के तौर पर हमने योग्यता के आधार पर वही नाम लोक भवन को भेजा था. लेकिन हमें जो समझ आया है, उसके मुताबिक लोक भवन ने सीनियरिटी को आधार बनाया. सरकार के सुझाव को नहीं चुना गया. इस बारे में बाद में और जानकारी देंगे.

Advertisement

वहीं, केरल के उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन ने कहा कि गवर्नर ने यह फैसला एकतरफा लिया है. उनके मुताबिक, सरकार से सलाह किए बिना इस तरह की नियुक्ति करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है.

ये भी पढ़ें: 'रेलवे ने छात्रों से गवाया RSS का गीत,' केरल CM पिनाराई विजयन भड़के तो स्कूल ने दी सफाई

छात्र संगठन ने जताया विरोध

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के छात्र संगठन SFI ने भी इस फैसले का विरोध किया है. SFI के स्टेट सेक्रेटरी पीएम संजीव ने कहा, 

Advertisement

सरकार की सिफारिश को खारिज कर यह नियुक्ति करना गवर्नर की तरफ से सत्ता का दुरुपयोग है. यह लोकतांत्रिक और संघीय व्यवस्था की भावना के खिलाफ है. कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की सरकार को भी इस मुद्दे पर अपना रुख साफ करना चाहिए. हाल ही में मुख्यमंत्री वी. डी. सतीसन और गवर्नर राजेंद्र अर्लेकर की मुलाकात के बाद इस नियुक्ति पर शक पैदा हो रहा है.

इस नियुक्ति के बाद राज्य में गवर्नर और सरकार के बीच एक बार फिर टकराव बढ़ गया है. सरकार का कहना है कि उसकी सिफारिश को नजरअंदाज किया गया, जबकि राजभवन ने सीनियरिटी के आधार पर फैसला लेने की बात कही है.

वीडियो: 'रेलवे ने छात्रों से RSS का गीत गवाया...', केरल CM पिनाराई विजयन भड़के, स्कूल क्या बोला?

Advertisement