मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में ‘केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट’ के खिलाफ करीब 15 दिनों से चल रहा विरोध प्रदर्शन रविवार, 19 जुलाई को खत्म हो गया. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को प्रोटेस्ट साइट से हटाकर उनके गांवों तक पहुंचाया. कुछ प्रदर्शनकारियों का दावा है कि आंदोलन के नेता अमित भटनागर को हिरासत में ले लिया गया है. जबकि, पुलिस का कहना है कि बिगड़ती हालत को देखते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
सुबह 5 बजे पहुंची पुलिस, 17 दिन का प्रोटेस्ट खत्म करा दिया, पता है आदिवासी क्यों विरोध कर रहे थे?
Madhya Pradesh के छतरपुर में 'केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट' के खिलाफ 15 दिनों से चल रहा विरोध प्रदर्शन 19 जुलाई को खत्म हो गया. पुलिस ने आंदोलनकारियों को हटाया और नेता अमित भटनागर को कथित तौर पर अस्पताल में भर्ती कराया. केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट क्या है और स्थानीय लोग इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?


इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, आदिवासी महिलाओं के नेतृत्व में यह विरोध प्रदर्शन 3 जुलाई से कुपी गांव के पास बराना नदी के किनारे चल रहा था. प्रोटेस्ट को लीड कर रहे अमित भटनागर बीते 13 दिनों से भूख हड़ताल पर थे. रविवार को आंदोलन का 17वां दिन और अमित के आमरण अनशन का 14वां दिन था. प्रदर्शनकारी ‘केन-बेतवा नदी जोड़ो प्रोजेक्ट’ के साथ-साथ इलाके में दूसरे डेवलपमेंट के कामों का भी विरोध कर रहे हैं.

आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने कई तरह के प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन किए. इनमें ‘जल सत्याग्रह’, ‘चिता सत्याग्रह’ और ‘फांसी सत्याग्रह’ शामिल थे. अमित ने प्रोजेक्ट के काम में कथित गड़बड़ियों पर कार्रवाई की मांग की और पर्यावरण के नियमों और कानूनी नियमों का पालन करने को कहा.

केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट का मकसद मध्य प्रदेश की केन नदी के एक्सट्रा पानी को उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी में पहुंचाना है. यह 'नेशनल पर्सपेक्टिव प्लान' के तहत भारत की पहली नदी-जोड़ो परियोजना है. इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में फैले सूखे से प्रभावित बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाना और पीने का पानी उपलब्ध कराना है.

इस 44,605 करोड़ के मेगा प्रोजेक्ट की वजह से करीब 22 गांव प्रभावित हो रहे हैं और 7,000 से ज्यादा परिवार बेघर हो रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें जमीन और मकानों के बदले जो मुआवजा दिया जा रहा है, वह बहुत कम है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार ने विस्थापित परिवारों के लिए जिस बेहतर पुनर्वास व्यवस्था और आर्थिक पैकेज का वादा किया था, उसे जमीन पर पूरी तरह लागू नहीं किया गया.
प्रभावित आदिवासियों का यह तर्क भी है कि इस बांध और परियोजना से वे न केवल अपने घर खो रहे हैं, बल्कि जल, जंगल, जमीन, चारागाह और अपनी सांस्कृतिक पहचान से भी पूरी तरह कट रहे हैं. अमित ने आरोप लगाया है कि केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के साथ-साथ मझगांव और रुंज सिंचाई प्रोजेक्ट से प्रभावित परिवारों को भी न्याय नहीं मिला है.
न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, विरोध प्रदर्शन की नेता दिव्या अहिरवार ने आरोप लगाया कि रविवार, 19 जुलाई की सुबह करीब 5 बजे पुलिस की एक बड़ी टुकड़ी मौके पर पहुंची और अमित भटनागर और दूसरे प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया. यह सब तब हुआ जब अमित इस प्रोजेक्ट में कथित तौर पर 400 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के बारे में मीडिया को संबोधित करने वाले थे.
दिव्या ने कहा कि इस आंदोलन का मकसद प्रोजेक्ट को सही और कानूनी तरीके से लागू करवाना था. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अगर अमित या दूसरे प्रदर्शनकारियों को कोई नुकसान पहुंचता है, तो इसके लिए प्रशासन जिम्मेदार होगा. उन्होंने जनता से भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की अपील भी की.
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पुलिस-प्रशासन ने क्या बताया?एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) आदित्य पाटले ने किसी भी तरह की गिरफ्तारी या हिरासत में लेने की बात से इनकार किया. PTI से बात करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को बसों से उनके गांवों तक पहुंचाया गया. पन्ना जिले के लोगों को वापस वहीं ले जाया गया, जबकि छतरपुर और आस-पास के इलाकों के लोगों को उनके गांवों में छोड़ दिया गया.
बिजावर एसडीएम विजय द्विवेदी और छतरपुर SSP आदित्य पटले के मुताबिक, अमित भटनागर पिछले 14 दिनों से आमरण अनशन पर थे, जिससे उनकी तबीयत काफी बिगड़ रही थी. पुलिस का कहना है कि अमित भटनागर को गिरफ्तार या हिरासत में नहीं लिया गया है, बल्कि उनके स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें इलाज के लिए स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है.
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