झारखंड हाईकोर्ट ने एक 35 साल की शादी खत्म करने के लिए दी गई तलाक की अर्जी को खारिज कर दिया. हाईकोर्ट ने तर्क दिया कि हर शादी में क्रूरता की परिभाषा अलग हो सकती है. पत्नी का ‘बाथरूम का गेट लॉक करना’, ‘पानी की सप्लाई रोक देना’ और ‘घर में गाय न पालने देना’ क्रूरता नहीं है. कोर्ट ने कहा कि हर शादी में 'क्रूरता' की परिभाषा अलग हो सकती है. इसलिए इसे ‘डेजर्शन’ (घर छोड़कर जाना) नहीं माना जाएगा.
'पत्नी गाय पालने नहीं देती', तलाक के लिए कोर्ट पहुंचा शख्स, जज ने पता है क्या कहा?
Jharkhand High Court ने एक तलाक की अर्जी खारिज कर दी. हाई कोर्ट ने कहा कि घर में गाय नहीं पालने देने पर तलाक की मंजूरी नहीं दी जा सकती.

मामले की सुनवाई जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की दोहरी बेंच कर रही थी. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, केस की सुनवाई के समय बेंच ने कहा कि एक शादी में जो बात ‘क्रूरता’ मानी जा सकती है, वो जरूरी नहीं है कि दूसरी शादी में भी ‘क्रूरता’ मानी जाए. हर केस के फैक्ट्स और एविडेंस (सबूत) के आधार पर विचार किया जाना चाहिए. कपल की शादी को 35 साल हो गए हैं. दोनों करीब 31 साल तक साथ रहे. कथित तौर पर साल 2020 में 58 साल के याचिकाकर्ता की पत्नी ने उन्हें अपने घर से निकाल दिया. 6 अगस्त को केस की सुनवाई के दौरान झारखंड हाईकोर्ट ने कहा,
याचिकाकर्ता ने अपने हलफनामे में कहा कि उनकी पत्नी ने कई बार टॉयलेट का गेट बंद कर दिया. कभी-कभी बाथरूम के पानी का कनेक्शन काटकर उन्हें परेशान किया. उन्हें घर में गाय नहीं पालने दिया. बावजूद इसके ये सभी कथित हरकतें ऐसी नहीं है, जिनकी वजह से 35 साल के वैवाहिक संबंध को खत्म कर दिया जाए.
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उनकी शादी साल 1989 में हुई थी. दंपती करीब 31 सालों तक घर में एक साथ ‘बहुत अच्छे माहौल’ में रहे. उनके तीन बच्चे भी हैं. बावजूद इसके जून 2020 में पत्नी का अचानक व्यवहार बदल गया. उसने उन्हें घर से बाहर निकाल दिया. तब से वो किराए के मकान में रह रहे हैं. याचिकाकर्ता कहा कि उनकी पत्नी ने मेंटेनेंस और तलाक के लिए केस किया था. तलाक के लिए पत्नी ने ‘क्रूरता’ और ‘छोड़कर चले जाने’ का हवाला दिया था. हालांकि, फैमिली कोर्ट ने भी साल 2024 में इस अर्जी को खारिज कर दिया.
फैमिली कोर्ट का फैसलायाचिकाकर्ता की ओर से दलीलें दे रहे वकील ने कोर्ट को बताया कि फैमिली कोर्ट का फैसला ‘सबूतों और परिस्थितियों के खिलाफ’ था. वकील ने यह भी बताया कि फैमिली कोर्ट उन सबूतों पर ध्यान देने में फेल हो गई, जिससे पता चलता है कि पत्नी ने पति के साथ कई तरह की क्रूरता की थी. इसकी वजह से दोनों में इतनी दरार पड़ गई कि शादी को सुधारा नहीं जा सकता था.
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के उस दावे को भी संज्ञान में लिया, जिसमें उनकी पत्नी ने घर में गाय पालने की इजाजत नहीं दी और इसकी वजह से उन्हें लगा कि पत्नी के साथ रहना ‘खतरनाक और नुकसानदेह’ होगा. कोर्ट ने केस में फैसला सुनाते हुए कहा कि शादी में ‘क्रूरता’ की कोई भी तय परिभाषा नहीं है. कोर्ट ने यह भी माना कि कोई काम ‘क्रूरता’ है या नहीं, ये हर केस की परिस्थिति पर निर्भर करते हैं.
कोर्ट ने आगे कहा कि अगर कोई पार्टनर गुस्से में या नाराज होकर घर छोड़ देता है और उसका इरादा रिलेशनशिप को हमेशा के लिए खत्म करने का नहीं होता है, तो इसे ‘डेजर्शन’ नहीं माना जाएगा. शादीशुदा जीवन में जब पति या पत्नी जानबूझकर और बिना उचित कारण के दूसरे साथी को छोड़कर चले जाते हैं और लंबे समय तक वापस आने या संबंध बनाए रखने का इरादा नहीं रखते तो इसे डेजर्शन कहा जाता है.
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