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'पासपोर्ट-आधार नागरिकता का सबूत नहीं...' MEA के बयान पर जावेद अख्तर ने कसा तंज

Javed Akhtar on MEA: विदेश मंत्रालय ने कहा कि पासपोर्ट से नागरिकता साबित नहीं होती, वो केवल एक ट्रैवेल डॉक्यूमेंट है. इस बात पर इंटरनेट पर बवाल मचा हुआ है. जावेद अख्तर समेत कई लोगों ने इसकी कड़ी आलोचना की है.

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जावेद अख्तर ने विदेश मंत्रालय के पासपोर्ट बयान पर कड़े सवाल किए हैं. (फोटो-इंडिया टुडे)

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  • विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया कि पासपोर्ट केवल ट्रैवेल डॉक्यूमेंट है और इससे नागरिकता साबित नहीं होती, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ।
  • विदेश मंत्रालय का यह बयान तब आया जब जावेद अख्तर और आदित्य ठाकरे ने इसके विरोध में सवाल उठाए, क्योंकि भारतीय पासपोर्ट केवल नागरिकों को ही दिया जाता है।
  • इस बयान के बाद नागरिकता तय करने की प्रक्रिया को लेकर नई बहस शुरू हुई, जिससे आगे सरकार और मंत्रालय के स्पष्टीकरण की आवश्यकता बढ़ गई है।

मशहूर लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) के 'पासपोर्ट' वाले बयान की कड़ी आलोचना की. विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि ‘पासपोर्ट केवल एक ट्रैवेल डॉक्यूमेंट है, इससे नागरिकता साबित नहीं होती.’ इसी बात ने इंटरनेट पर बवाल काट दिया है. जावेद साहब ने सख्त लहजे में कहा कि ‘ये बेहद बेतुका बयान है.’ वहीं, शिवसेना (उद्धव) के नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि ‘अगर ऐसा है तो पुलिस जांच किस बात की करती है?’   

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मंत्रालय का ये बयान अपने आप में विरोधाभासी है. क्योंकी भारतीय पासपोर्ट सिर्फ देश के वैध नागरिकों को ही दिया जाता है. तो ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इससे नागरिकता कैसे साबित नहीं होती? जावेद अख्तर ने भी यही सवाल उठाया कि अगर ये तय नहीं है कि कोई भारतीय नागरिक है, तो डॉक्यूमेंट इशू क्यों किया जा रहा? X पर उन्होंने तंज किया,

‘पासपोर्ट केवल एक ट्रैवेल डॉक्यूमेंट है. सच में? तो फिर आप ऐसे लोगों को पासपोर्ट दे रहे हैं जो भारतीय नागरिक है ही नहीं?’

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इंटरनेट पर तीखे सवाल

इस विवाद पर उद्धव ठाकरे के बेटे और विधायक आदित्य ठाकरे ने भी ट्वीट किया है. उन्होंने विदेश मंत्रालय से कुछ कड़े सवाल पूछे. मसलन,

'पुलिस पासपोर्ट देने से पहले क्या वेरीफाई करती है? 

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क्या हमारा देश उन लोगों को भी पासपोर्ट देता है जो भारत के नागरिक नहीं हैं?

क्या ये दूसरे देशों के लोगों के मन में भ्रम पैदा नहीं करता कि उन्हें भी भारत से ये ट्रैवेल डॉक्यूमेंट मिल सकता है? 

फॉरेन पालिसी को आसान और सरल होना चाहिए, इतना बेतुका तर्क नहीं देना चाहिए.'

जब इंटरनेट पर ये पोस्ट वायरल हुए तो आम जनता ने भी सवाल पूछे. लोगों के मन में अब यही सवाल घूम रहा है कि आखिर नागरिकता तय कैसे होती है? 

MEA ने क्या कहा था?

14वें पासपोर्ट सेवा दिवस पर मंत्रालय ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उसमें MEA ने कहा कि पासपोर्ट एक ट्रैवेल डॉक्यूमेंट है जो सरकार इशू करती है ताकि लोग विदेश यात्रा कर सकें. लेकिन केवल एक पासपोर्ट से नागरिकता तय नहीं होती. यहां सवाल ये है कि जब भारत सरकार केवल भारतीयों को ही पासपोर्ट देती है तो फिर ये नागरिकता साबित क्यों नहीं कर सकता? हालिया घटना ने पुराने विवाद को भी ताज़ा कर दिया है. 

बिहार SIR के दौरान इलेक्शन कमीशन ने तर्क दिया था कि आधार कार्ड पहचान के लिए इस्तेमाल होता है, लेकिन इससे नागरिकता साबित नहीं होती. सुप्रीम कोर्ट ने भी इस तर्क का समर्थन करते हुए कहा कि आधार को नागरिकता का आधार नहीं माना जा सकता है. वोटर ID कार्ड भी केवल आवास और पहचान के आधार पर वोट देने के लिए इस्तेमाल होता है. यानी आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर ID और अब पासपोर्ट भी नागरिकता साबित नहीं करता. 

ये भी पढ़ें: पासपोर्ट रैंकिंग में भारत फिसल गया, सबसे मजबूत कौन-सा देश? 

कैसे पता कि आप भारतीय हैं?

सिटीजनशिप लॉ के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति 26 जनवरी, 1950 को या उसके बाद, लेकिन 1 जुलाई, 1987 से पहले भारत में पैदा हुआ है, तो वह जन्म से भारतीय नागरिक है. जुलाई 1987 के बाद पैदा हुए लोगों के लिए, जन्म से नागरिकता तभी लागू होती है जब उनके माता-पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक हो.

फिर 3 दिसंबर, 2004 को या उसके बाद पैदा हुए लोगों के लिए, जन्म से नागरिकता तभी लागू होती है जब उनके दोनों माता-पिता भारतीय नागरिक हों. अगर माता-पिता में से कोई एक भी भारतीय नागरिक हों और दूसरा जन्म के समय अवैध अप्रवासी न हो, तो भी भारत की नागरिकता मिल सकती है.

वीडियो: जावेद अख्तर का AI वीडियो वायरल, लेखक ने जताई नाराजगी

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