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भारत ने E20 से ₹1.90 लाख करोड़ बचाए, समझें 20 फीसदी एथेनॉल से कैसे हुई बड़ी बचत?

Ethanol blended petrol को लेकर सरकार ने नए आंकड़े पेश किए हैं. सरकार का दावा है कि भारत ने तय समय से पांच साल पहले ही पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है. सरकार ने ये भी बताया कि एथेनॉल की खरीद तेजी से बढ़ी है.

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सरकार ने एथेनॉल को पेट्रोल में मिलाने के लक्ष्य पर बड़ा दावा किया है. (फोटो-इंडिया टुडे)

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  • सरकार ने घोषणा की है कि भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य निर्धारित समय से पांच साल पहले ही पूरा कर लिया है।
  • पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के पीछे कारण यह है कि इससे कच्चे तेल के आयात में कमी आ सके और विदेशी मुद्रा की बचत हो सके।
  • इस फैसले से देश ने अब तक 1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचाई है और एथेनॉल उत्पादन में वृद्धि हुई है।

एथेनॉल (Ethanol) को लेकर देश भर में हल्ला मचा है. लोगों का दावा है कि इससे उनकी गाड़ियों के इंजन और ओवरऑल परफ़ॉर्मेंस पर असर पड़ रहा है. अब सरकार ने नए आंकड़े जारी किए हैं. सरकार का दावा है कि भारत ने तय समय से पांच साल पहले ही पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है. इतना ही नहीं, पिछले कुछ सालों में इससे देश ने 1.90 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा भी बचाई है.

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सरकार का दावा है कि इस पूरी कवायद का असर सिर्फ तेल तक सीमित नहीं रहा. 2014-15 से मई 2026 के बीच 310 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा कच्चे तेल की जगह एथेनॉल का इस्तेमाल हुआ. इससे 1.90 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है.

सरकार ने क्या कहा?

केंद्र सरकार ने उन दावों को भी खारिज किया है, जिनमें कहा जा रहा था कि इसे बिना तैयारी लागू कर दिया गया. सरकार का कहना है कि इस पर कई सालों से काम चल रहा था और ये एक जांची-परखी प्रक्रिया का नतीजा है.

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आज भी भारत अपनी जरूरत का करीब 88.5 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. यानी अगर दुनिया में तेल महंगा हो जाए या सप्लाई रुक जाए, तो उसका सीधा असर भारत पर पड़ता है. जैसा कि हाल में ईरान, अमेरिका और इज़रायल के बीच तनाव के दौरान देखने को मिला. सरकार का कहना है कि अगर पेट्रोल में ज्यादा एथेनॉल मिलाया जाएगा, तो विदेशों से कम तेल खरीदना पड़ेगा.

अब मीट्रिक टन को समझिए. जैसे कि 1 किलो में 1,000 ग्राम होते हैं, वैसे ही 1 मीट्रिक टन में 1,000 किलो होते हैं. मान लीजिए एक छोटी कार का वजन लगभग 1 मीट्रिक टन के आसपास है. इसी तरह से अगर कोई कहे 310 लाख मीट्रिक टन, तो यह करीब 310 लाख छोटी कारों के बराबर का वजन होगा.

ये भी पढ़ें: 'E20 पेट्रोल कोई प्रयोग नहीं, ये लागू हो चुकी पॉलिसी', केंद्र सरकार ने अपना इरादा स्पष्ट कर दिया

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एथेनॉल की खरीद भी बढ़ी 

सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2013-14 में पेट्रोल में एथनॉल की हिस्सेदारी 1.5 फीसदी से भी कम थी. लेकिन 2025-26 में ये बढ़कर 20 फीसदी हो गई. एथेनॉल की खरीद भी तेजी से बढ़ी है. 2013-14 में जहां करीब 38 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीदा गया था, वहीं 2025-26 में यह आंकड़ा 1,200 करोड़ लीटर से ज्यादा रहने का अनुमान है.

इसके साथ उत्पादन भी बढ़ा है. 2014 में देश की एथनॉल बनाने की ताकत 421 करोड़ लीटर थी. 2026 तक यह बढ़कर करीब 2,000 करोड़ लीटर हो गई. यानी करीब पांच गुना बढ़ोतरी.

इससे पहले रायटर्स की एक रिपोर्ट में भी कहा गया था कि पिछले 15 साल में भारत में बिकी नई पेट्रोल गाड़ियों में करीब 20 फीसदी ही ऐसी हैं, जो E20 एथनॉल मिले पेट्रोल के हिसाब से बनी हैं. यानी एथनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य तो हासिल हो गया, लेकिन बहस अभी खत्म नहीं हुई है. जब तक पुरानी गाड़ियों और उनके मालिकों की चिंताओं का भरोसेमंद जवाब नहीं मिलता, तब तक इस नीति पर सवाल उठते रहेंगे.

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