डिफेंस सेक्टर में अक्सर एक चीज देखने को मिलती है. जैसे ही किसी जंग में किसी हथियार ने दुश्मन को पीटा, तमाम देश उस हथियार में दिलचस्पी दिखाने लगते हैं. ऐसा ही कुछ भारत की ब्रह्मोस सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल के साथ भी है. फिलीपींस ने भी भारत से ये मिसाइल खरीदी है. विएतनाम और इंडोनेशिया के साथ डील फाइनल स्टेज में है. अब खबर है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी इस लिस्ट में शामिल हो सकता है.
ब्रह्मोस पर UAE की नजर, ईरान की वजह से भारत के साथ बड़ी डिफेंस डील की तैयारी?
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने कूटनीतिक समीकरण भी बदल दिए हैं. ऐसी रिपोर्ट्स आई हैं कि UAE ने ब्रह्मोस मिसाइल और आकाशतीर एयर डिफेंस कंट्रोल सिस्टम में दिलचस्पी दिखाई है. अगर यह डील हुई तो इसका असर ईरान के साथ भारत के संबंधों पर पड़ सकता है.


इस मामले पर समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट छापी है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि UAE ने भारत के ब्रह्मोस मिसाइल और आकाशतीर एयर डिफेंस कंट्रोल सिस्टम खरीदने की इच्छा जताई है. एक इंडियन सूत्र ने रॉयटर्स को बताया,
UAE ने हमारे ब्रह्मोस और आकाशतीर सिस्टम में दिलचस्पी दिखाई है. अभी दोनों देशों के बीच की बातचीत शुरुआती स्टेज में ही है. लेकिन इसमें काफी तेजी से प्रोग्रेस देखने को मिल रही है. हालांकि UAE और भारत, दोनों देशों के विदेश मंत्रालय ने इस मामले पर कोई जवाब नहीं दिया है.
ब्रह्मोस प्रोजेक्ट में भारत एकमात्र हिस्सेदार नहीं है. ये भारत-रूस का एक जॉइंट वेंचर है. अगर इस मिसाइल को इंडिया किसी देश को बेचता है तो उसे रूस से क्लियरेंस भी चाहिए. एक जॉइंट वेंचर के रूप में ये जरूरी है. UAE के मामले में रूस की मंजूरी दिक्कत नहीं है. क्योंकि रूस और UAE के भी आपस में अच्छे संबंध हैं. तो रूस वाली बाधा तो क्लियर है.
अब बात आती है पूरे वेस्ट एशिया में भारत के बैलेंस की. भारत ने हर देश से डिप्लोमैटिक संबंध बना कर रखे हैं. भारत के ईरान से भी रिश्ते हैं जो कि एक शिया बहुल देश है. साथ ही उसके UAE से भी रिश्ते हैं जो कि सुन्नी बहुल है. इसलिए ये कहना गलत नहीं होगा कि इंडिया इस पूरे क्षेत्र में खुद को संतुलित रखने की कोशिश करता है.
अब आते हैं हथियारों पर. UAE भारत के रिश्ते मजबूत हो रहे हैं. इस कड़ी में डिफेंस डील भी संभव है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक UAE ने ब्रह्मोस और आकाशतीर खरीदने की इच्छा जताई है. डिप्लोमेसी में सिर्फ इस बात पर ध्यान नहीं दिया जाता कि कितने हथियारों की डील हुई. हेडलाइन्स इस पर भी बनती हैं कि 'किस तरह' के हथियारों की डील हुई. ये हथियार 'ऑफेंसिव' यानी हमला करने वाले हथियार थे. या ये 'डिफेंसिव' यानी बचाव में काम आने वाले हथियार थे.
- एक सवाल यहां उठता है कि UAE जैसे देश कि क्या पड़ी है जो वो क्रूज मिसाइल लेगा? तो इसकी एक हालिया वजह है ईरान के हमले. अमेरिकी बमबारी के बाद ईरान ने इजरायल समेत वेस्ट एशिया के देशों पर भी मिसाइल्स और ड्रोन्स से हमला शुरू किया.
- ये हमले इतने घातक थे कि UAE को इसमें भारी नुकसान उठाना पड़ा. उसके अलावा बाकी देशों को भी सुरक्षा की चिंता सताने लगी. इस दौरान UAE के एयर डिफेंस सिस्टम कुछ खास असर नहीं डाल सके.
- इसलिए ईरान के कॉन्टेक्स्ट में देखें, तो ये एक संभावित वजह हो सकती है जिसके लिए UAE आकाशतीर मांग रहा है. आकाशतीर एक एयर डिफेंस सिस्टम है जिसकी ट्रैकिंग क्षमता कमाल की है.
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ब्रह्मोस की डील कहीं ज्यादा बड़ी होगी क्योंकि विश्लेषकों के अनुसार, ब्रह्मोस जैसी लंबी दूरी की सुपरसॉनिक मिसाइल UAE की समुद्री और तटीय स्ट्राइक क्षमता को बढ़ा सकती है. हालांकि किसी संभावित टारगेट के बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी. ब्रह्मोस के एक्सपोर्ट होने वाले वर्जन की रेंज 290 किलोमीटर है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को देखें तो इसमें एक जगह ऐसी है जहां UAE और ईरान की दूरी मात्र 60 किलोमीटर के आसपास रह जाती है. ऐसे में ब्रह्मोस आसानी से ईरान के तटीय इलाकों में बने बेस, बंदरगाह, एयरफील्ड आदि पर हमला कर सकता है. अगर ऐसा हुआ तो भारत-ईरान के संबंधों में तनाव आ सकता है. खैर, जब तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं आती, तब तक तो सिर्फ अटकलें ही लगाई जा सकती हैं.
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