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जिस JEE रैंक पर गर्व उसी को CV में शामिल करने की मनाही, IIT छात्रों को ऐसा निर्देश क्यों?

AIPC ने स्टूडेंट्स को निर्देश दिया है कि वे कैंपस प्लेसमेंट के लिए अपने रेज्यूमे या CV में JEE रैंक, GATE रैंक, मार्क्स, स्कोर, परसेंटाइल या किसी भी दूसरे एंट्रेंस एग्जाम की रैंकिंग न दिखाएं.

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आईआईटी प्लेसमेंट कमेटी की एडवाइजरी पर मिली जुली प्रतिक्रिया आ रही है. (इंडिया टुडे)

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  • ऑल आईआईटी प्लेसमेंट कमेटी (AIPC) ने सभी 23 IIT छात्रों को अपने रेज्युमे से JEE रैंक, GATE स्कोर और अन्य एंट्रेंस परीक्षा की जानकारी हटाने के निर्देश जारी किए हैं।
  • AIPC ने यह निर्देश इसलिए दिए क्योंकि वे छात्रों के मूल्यांकन को केवल एंट्रेंस परीक्षा के अंक से बचाकर योग्यता और IIT में प्रदर्शन पर आधारित करना चाहते हैं।
  • इस फैसले के बाद, भर्ती प्रक्रिया में भेदभाव कम होने की संभावना है और रिक्रूटर्स अब छात्रों के दीर्घकालिक प्रदर्शन को प्राथमिकता देंगे।

देश के टॉप इंजीनियरिंग संस्थान यानी IITs में प्लेसमेंट और इंटर्नशिप सीजन शुरू होने वाला है. लेकिन इससे ठीक पहले ऑल आईआईटी प्लेसमेंट कमेटी (AIPC) की एक एडवाइजरी को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी है. इस एडवाइजरी में सभी 23 IIT के स्टूडेंट्स को कैंपस प्लेसमेंट के लिए अपने रेज्युमे से JEE रैंक, GATE स्कोर, परसेंटाइल और एंट्रेंस एग्जाम से जुड़ी दूसरी जानकारियां हटाने के लिए कहा गया है.

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IIT स्टूडेंट्स को प्लेसमेंट से पहले JEE रैंक हटाने की सलाह

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, AIPC की बैठक में ये फैसला सर्वसम्मति से लिया गया. AIPC सभी 23 IIT में इंटर्नशिप और प्लेसमेंट ड्राइव को लेकर कॉर्डिनेशन बनाने वाली संस्था है. ये छात्रों के लिए जरूरी गाइडलाइंस भी जारी करती है.

स्टूडेंट्स को भेजे गए एक ऑफिसियल मैसेज में IITs के करियर डेवलपमेंट सेंटर (CDC) ने निर्देश दिया कि वे कैंपस प्लेसमेंट के लिए अपने रेज्युमे या CV में JEE रैंक, GATE रैंक, मार्क्स, स्कोर, परसेंटाइल या किसी भी दूसरे एंट्रेंस एग्जाम की रैंकिंग न दिखाएं. 

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रिपोर्ट के मुताबिक यह मैसेज AIPC की नई गाइडलाइंस के तहत जारी किया गया है. छात्रों को कहा गया है कि रिक्रूटमेंट एक्टिविटी के लिए अपना रेज्युमे सबमिट करने से पहले इसे जरूरी निर्देश (Important Compliance Requirement) के तौर पर देखें.

AIPC की नई गाइडलाइंस में क्या है?

# नई गाइडलाइन के तहत नौकरी के लिए कैंपस प्लेसमेंट के दौरान स्टूडेंट अपने CV/रेज्युमे से JEE रैंक, GATE स्कोर, परसेंटाइल की जानकारी शामिल नहीं कर पाएंगे.

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# छात्र IIT में पढ़ाई के दौरान हासिल किए अपने क्यूमुलेटिव परफॉर्मेंस इंडेक्स (CPI), एकेडमिक उपलब्धियां, प्रोजेक्ट्स, इंटर्नशिप, रिसर्च वर्क, लीडरशिप रोल और दूसरी उपलब्धियों का जिक्र CV/रेज्युमे में कर सकते हैं.

# अगर कोई रिक्रूटर खास तौर पर एंट्रेस एग्जाम का स्कोर मांगता है तो उनसे स्कोर शेयर किया जा सकता है. लेकिन वे प्लेसमेंट चैनलों के माध्यम से सर्कुलेट होने वाले स्टैंडर्ड रेज्युमे का हिस्सा नहीं होंगे.

भेदभाव खत्म करने के लिए लिया गया फैसला

AIPC के मुताबिक, JEE रैंक और GATE स्कोर को रेज्युमे से हटाने का फैसला इसलिए लिया गया है, ताकि रिक्रूटर्स उन स्टूडेंट्स के साथ भेदभाव नहीं कर सकें, जिन्होंने रिजर्व कैटेगरी की सीटों से एडमिशन लिया है. AIPC के कन्वेनर जॉन जोस के मुताबिक, 

इस फैसला का मकसद ये तय करना है कि छात्रों का मूल्यांकन उनकी योग्यता, स्किल और IIT में उनकी परफॉर्मेंस के आधार पर किया जाए. न कि एंट्रेस एग्जाम के मार्क्स के आधार पर. एंट्रेस एग्जाम एक खास समय की स्थिति को दिखाता है, जबकि डिग्री सालों की लगातार मेहनत को दिखाती है.

सोशल मीडिया पर पक्ष-विपक्ष में बंटे लोग

इस नियम के आते ही सोशल मीडिया पर लोग 2 खेमों में बंट गए हैं. कुछ का कहना है कि यह कदम सभी IIT में यूनिफॉर्मिटी और समानता बनाए रखने के लिए जरूरी है. वहीं कुछ लोग पूछ रहे हैं कि मेरिट और कड़ी मेहनत से हासिल की गई उपलब्धियों को क्यों छिपाया जाए. 

आईआईएम कोझिकोड के पूर्व छात्र और न्यूयॉर्क बेस्ड एंटरप्रेन्योर आशुतोष ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 

यह समता पर आधारित कैंपस और समाज बनाने की दिशा में एक अच्छा कदम है.

आशुतोष ने आगे कहा कि जो भी इस नियम को नहीं मानता है उसे अपराधी की तरह ट्रीट करना चाहिए. कई और यूजर्स ने तर्क दिया कि कंपनियां इस बात पर जज करें कि स्टूडेंट्स ने कॉलेज के 4 सालों में क्या नया बनाया और सीखा, न कि इस बात पर कि आप 17 या 18 साल की उम्र में कितने काबिल थे.

दूसरी तरफ कई लोग इस फैसले का विरोध भी कर रहे हैं. एक्स पर गर्वित सेठी नाम के एक यूजर ने लिखा, 

छात्रों को यूनिफॉर्मिटी के नाम पर अपनी मेहनत छिपाने के लिए मजबूर क्यों किया जा रहा है? अगर किसी ने सालों रात-दिन एक करके टॉप रैंक हासिल की है तो वह उसकी योग्यता का हिस्सा है.

कई यूजर्स ने इसे मेरिट सेंसरशिप करार दिया है. उनका मानना है कि जो कॉलेज देश के सबसे कठिन कॉम्पटिटिव एग्जाम के दम पर स्टूडेंट को लेता है, उससे यूनिफॉर्मिटी की बात करना बेमानी है.  

बहरहाल IIT का ये फैसला उस पारंपरिक भारतीय मूल्यों को चुनौती देता है, जिनमें एंट्रेस एग्जाम के मार्क्स को मेरिट का पैमाना माना जाता है. सवाल ये भी उठता है कि क्या रिक्रूटर्स आरक्षित वर्गों से आने वाले छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं. 

अब IITs चाहते हैं कि एंट्रेस एग्जाम में मिले मार्क्स और रैंक किसी स्टूडेंट की नौकरी के अवसर को प्रभावित नहीं करें. IIT के इस नियम से पता चलेगा कि क्या रिक्रूटर छात्रों को IIT में एंट्री दिलाने वाले मार्क्स से इतर देख सकते हैं या नहीं.

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