The Lallantop

IAS बनने की बड़ी कीमत चुकाई, तुकाराम मुंडा नहीं चाहते उनके बच्चे सिविल सर्विस में आएं

महाराष्ट्र के चर्चित IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे ने कहा है कि वह अपने बच्चों को सिविल सर्विस में आने की सलाह नहीं देंगे. ‘ग्लोबल मराठा बिज़नेस एक्सपो’ में स्पीच देते हुए तुकाराम मुंढे ने ये बात कही.

Advertisement
post-main-image
तुकाराम मुंढे ने कहा कि वो नहीं चाहते उनके बच्चे सिविल सर्विस में जाएं. (फोटो- India today)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • तुकाराम मुंढे ने एक कार्यक्रम में कहा कि वे अपने बच्चों को IAS अफसर बनने की सलाह नहीं देंगे और चाहेंगे कि वे लीडर या एंटरप्रेन्योर बनें।
  • तुकाराम मुंढे के 21 वर्षों के सिविल सर्विस अनुभव में बार-बार ट्रांसफर ने उनके परिवार के जीवन को प्रभावित किया, जिससे बच्चों को भी कई बार स्कूल बदलना पड़ा।
  • मुंढे के मुताबिक, पब्लिक लीडर या एंटरप्रेन्योर के रूप में बच्चों को अधिक स्वतंत्रता और समाज सेवा के अवसर मिल सकते हैं, इस पर वे अपने विचार व्यक्त करते हैं।

महाराष्ट्र के चर्चित अधिकारी तुकाराम मुंढे नहीं चाहते कि उनके बच्चे सिविल सर्विस में आएं. अफसर बनें. उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा कि वो अपने बच्चों को ये सलाह बिल्कुल नहीं देंगे कि वो उनकी तरह IAS अफसर बनें. इसके बजाय उनकी इच्छा होगी कि उनके बच्चे लीडर बनें या एंटरप्रेन्योर बनें.

Advertisement

तुकाराम मुंढे का कहना है कि ये लोग ज्यादा आजादी के साथ समाज के एक बड़े वर्ग की सेवा में अपना योगदान दे सकते हैं. ‘ग्लोबल मराठा बिज़नेस एक्सपो’ में स्पीच देते हुए तुकाराम मुंढे ने ये बात कही.

लेकिन 21 साल सिविल सर्विस में बिताने के बाद तुकाराम मुंढे के मन में ये बात क्यों आई?

Advertisement

इसकी वजह है 21 सालों की सिविल सर्विस में उनके अनुभव, जो जाहिर तौर पर इतने सुखद नहीं रहे कि वो इस पेशे की पैरवी करें. 2005 बैच के IAS ऑफिसर मुंढे महाराष्ट्र में म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन से लेकर बड़े सरकारी डिपार्टमेंट तक पहुंचे. लेकिन बार-बार ट्रांसफर होने की वजह से वो कहीं एक जगह जम नहीं पाए. उनके परिवार को बार-बार नए शहरों में स्विच होना पड़ा. बच्चों को बार-बार स्कूल बदलने पड़े. उनका बेटा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसे 5वीं क्लास तक पहुंचने के लिए 6 बार स्कूल बदलना पड़ा.

मुंढे ने बिजनेस टुडे समिट में बार-बार ट्रांसफर से उनके जीवन और परिवार पर पड़ने वाले असर पर बात की.

21 साल के करियर में मुंढे का 25 बार ट्रांसफर हुआ. यानी 21 साल में 25 बार उन्हें अपना घर और अपना शहर बदलना पड़ा. जब हम कोई घर छोड़कर कहीं और बसते हैं तो उसके साथ सिर्फ एक मकान नहीं छूटता. एक बना-बनाया रूटीन होता है, जिसे नई जगह के हिसाब से ढालने की तैयारी करनी पड़ती है. पुराने शहर के दोस्तों, पड़ोसियों और बच्चों के जाने-पहचाने टीचरों का पूरा सिस्टम छोड़कर जाना पड़ता है. 

Advertisement

मुंढे को लगता है कि सिविल सर्विस से बढ़िया विकल्प पब्लिक लीडर या एंटरप्रन्योर बनना हो सकता है. इन प्रोफेशन में बार-बार ट्रांसफर की झंझट नहीं होती. इसमें अथॉरिटी के साथ जॉब सिक्योरिटी भी आती है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि वह अपने बच्चों को पब्लिक सर्विस से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. वो बस चाहते हैं कि उनके बच्चे समाज में योगदान देने के दूसरे तरीकों पर विचार करें. 

तुकाराम मुंढे कौन हैं?

तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के IAS ऑफिसर हैं. वो नियमों को लागू करने के अपने सख्त तरीके और बार-बार ट्रांसफर के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने मई 2026 में महाराष्ट्र के FDA कमिश्नर का पद संभाला, जहां उनके डिपार्टमेंट ने अनसेफ खाने, मिलावट और घटिया प्रोडक्ट्स के खिलाफ कार्रवाई की है.

वीडियो: एक PNR पर कन्फर्म और वेटिंग टिकट, TTE रोक सकता है सफर? जानिए रेलवे का नियम

Advertisement