गुजरात हाईकोर्ट में एक समलैंगिक (Gay) शख्स ने याचिका दायर कर राज्य सरकार से मुआवजे की मांग की है. आरोप है कि पुलिस ने मीडिया के सामने उनकी सेक्शुएलिटी और HIV कंडीशन का खुलासा किया. भारत में कानून है कि किसी भी HIV संक्रमित व्यक्ति के कंडीशन को बिना उसकी इजाजत के पब्लिक नहीं किया जा सकता. पीड़ित का कहना है कि पुलिस की लापरवाही ने उसकी पूरी जिंदगी बर्बाद कर दी है. उसे सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है.
गिरफ्तारी के बाद HIV स्टेटस लीक, सरकार से हर्जाना मांगने कोर्ट पहुंचा शख्स
Gujarat High Court में एक समलैंगिक शख्स ने मुआवजा मांगा है. उसका आरोप है कि पुलिस ने मीडिया के सामने उसकी सेक्शुएलिटी और HIV स्टेटस का खुलासा कर उनकी जिंदगी बर्बाद कर दी. क्या है पूरा मामला?


इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता ने राज्य से ‘अच्छा मुआवजा’ मांगा है. इसमें प्राइवेसी के मौलिक अधिकार और कानूनी सुरक्षा के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है. राज्य सरकार, एजुकेशन डिपार्टमेंट और देवभूमि द्वारका जिले के एसपी इस मामले में आरोपी हैं.
क्या है पूरा मामला?पिछले साल नवंबर (2025) की बात है.याचिकाकर्ता और उनके सीरियाई समलैंगिक पार्टनर को पुलिस ने गिरफ्तार किया था. दोनों HIV पॉजिटिव हैं. सीरियाई नागरिक पर भारत में तय समय से ज्यादा रहने के आरोप में 'फॉरेनर्स एक्ट' के तहत मामला दर्ज किया गया. भारत सरकार उन्हें वापस उनके उनके देश भेजने (निर्वासन) की तैयारी कर रही थी, लेकिन इस साल मई में गुजरात हाईकोर्ट ने उन्हें शर्त के साथ जमानत दे दी.
रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता का आरोप है कि पुलिस ने नियमों को ताक पर रखकर मीडिया को यह बता दिया कि दोनों समलैंगिक हैं और उन्हें HIV है. आरोप है कि जब यह बात मीडिया में आई तो समाज ने उनसे दूरी बना ली. भारतीय शख्स ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने जून 2022 में एक स्कूल शुरू किया था. लेकिन मीडिया में उनके बारे में खबर आने के बाद से शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कथित तौर पर उन पर दबाव बनाना शुरू किया कि वो स्कूल से अलग हो जाएं.
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याचिका में कहा गया कि पुलिस कस्टडी में रहने के दौरान उनके HIV स्टेटस के सार्वजनिक होने के बाद उन्हें ‘बहुत ज्यादा तनाव, बदनामी और मीडिया ट्रायल’ का सामना करना पड़ा था. पीड़ितों ने तर्क दिया कि उनके HIV स्टेटस का खुलासा करना संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत 'सूचना संबंधी निजता' का उल्लंघन है.
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया कि संवेदनशील मेडिकल जानकारी के मामले में निजता की उम्मीद ज्यादा होती है और बिना इजाजत जानकारी का खुलासा करने से उनकी गरिमा और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है. उम्मीद है कि हाई कोर्ट आने वाले हफ्तों में इस मामले की सुनवाई करेगा.
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