The Lallantop

'बुर्के में चेहरा नहीं दिखा', कोर्ट ने एसिड अटैक की दोषी महिला की सजा पर रोक लगा दी

गुजरात हाई कोर्ट ने एसिड अटैक में दोषी ठहराई गई एक महिला की 10 साल की सजा पर रोक लगा दी है. महिला पहले ही 8 महीने जेल में बिता चुकी है. कोर्ट ने माना है कि अभियोजन पक्ष के सबूतों में कई कमियां पाई गई हैं.

Advertisement
post-main-image
आरोपी महिला पहले ही 8 महीने जेल में बिता चुकी है. (फोटो-इंडिया टुडे)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • अहमदाबाद सिटी सिविल एंड सेशन कोर्ट ने बस कंडक्टर पर हुए एसिड अटैक मामले में महिला महेजबीनबानू छुवारा को दोषी पाकर 10 साल की सजा और 1 लाख रुपये जुर्माना सुनाया।
  • यह मामला 27 जनवरी 2024 को तब ortaya हुआ जब आरोपी महिला ने अपने साथ रिश्ता खत्म होने के कारण बस कंडक्टर पर एसिड फेंका, लेकिन अभियोजन पक्ष सबूतों में कमजोर रहा।
  • गुजरात हाई कोर्ट ने सबूतों की कमी के आधार पर महिला की सजा पर रोक लगाई और उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया, अपील की सुनवाई अभी लंबित है।

गुजरात में 2024 में एक बस कंडक्टर पर कथित तौर पर एसिड अटैक हुआ. आरोप लगा कि ये हमला महेजबीनबानू छुवारा ने किया था. अहमदाबाद सिटी सिविल एंड सेशन कोर्ट ने महिला को मामले में दोषी ठहराया और उन्हें 10 साल की सजा सुनाई दी. साथ ही 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया.

Advertisement

लेकिन अब गुजरात हाई कोर्ट ने दोषी महिला की 10 साल की सजा पर रोक लगा दी है. साथ ही उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है. हालांकि उन्हें दोषी ठहराए जाने के खिलाफ उनकी अपील अभी हाई कोर्ट में लंबित है. और जब तक कोर्ट उनकी अपील पर अंतिम फैसला नहीं सुनाता, तब तक सजा पर रोक रहेगी. जस्टिस विमल के. व्यास की सिंगल बेंच ने कहा कि अभियोजन पक्ष के सबूतों में कई कमियां थीं, जिसके बाद यह फैसला सुनाया गया.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला 27 जनवरी, 2024 को हुई एक घटना से जुड़ा है. अहमदाबाद म्युनिसिपल ट्रांसपोर्ट सर्विस (AMTS) के बस कंडक्टर राकेश ब्रह्मभट्ट (51) पर रात करीब 8:30 बजे हमला हुआ था. आरोप लगा कि जब पीड़ित अपने केबिन में था, तब छुवारा अपने दोस्त मीत शर्मा के साथ वहां पहुंची और ब्रह्मभट्ट पर एसिड फेंकते हुए कहा, "तुम मेरे साथ रिश्ता क्यों नहीं रखते?"

Advertisement

वारदात को अंजाम देने के बाद कथित तौर पर वह वहां से भाग गई. पीड़ित राकेश के बेटे ओम उस समय पिता को खाना देने के बाद बाहर खड़े थे. उन्होंने पिता की आवाज सुनी और सीधा उन्हें लेकर GCS अस्पताल ले गए. अभियोजन पक्ष ने कहा कि घटना में ब्रह्मभट्ट की दाहिनी आंख, पीठ और प्राइवेट पार्ट्स पर चोटें आईं.

इसी मामले में सिटी सिविल एंड सेशन कोर्ट ने महिला को दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुना दी. लेकिन हाई कोर्ट ने मामले में उनकी सजा पर रोक लगा दी. विमल के. व्यास की बेंच ने मामले में ठोस सबूतों की कमी पर भी ध्यान दिया. अदालत ने कहा,

“पहली नजर में ऐसा लगता है कि शिकायतकर्ता का बयान संदिग्ध है. क्योंकि रिकॉर्ड पर कोई स्वतंत्र गवाह या अन्य दोषी ठहराने वाले सबूत नहीं हैं. जो मौजूदा आवेदक-दोषी को कथित अपराध से जोड़ सकें.”

Advertisement

- हाई कोर्ट के फैसले में कहा गया कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि दोषी महिला ही हमलावर थी. घटना के समय सभी ने बुर्का पहने एक व्यक्ति को केबिन से रेलवे स्टेशन की ओर भागते देखा. मगर उस व्यक्ति का चेहरा दिखाई नहीं दिया. CCTV फुटेज में बुर्का पहने कोई शख्स दिखाई दिया. लेकिन उसका चेहरा वहां भी नहीं नजर आया. जांच के दौरान आरोपी के पहने गए कपड़े और दस्ताने पुलिस ने जब्त नहीं किए. इससे आरोपी के तौर पर छुवारा की पहचान पक्के तौर पर साबित नहीं हुई.

- कोर्ट ने यह भी कहा कि वह प्लास्टिक का डिब्बा भी बरामद नहीं किया गया, जिसमें तेजाब जैसा तरल पदार्थ होने का आरोप था.

- महिला पर आरोप लगा था कि उसने 'दुश्मनी और जलन' की वजह से हमला किया. क्योंकि ब्रह्मभट्ट ने उसके साथ रिश्ता खत्म कर लिया था. छुवारा और पीड़ित के बीच कथित रिश्ते को साबित करने वाला कोई सबूत नहीं था. जैसे कि WhatsApp मैसेज, चैट, फोटो या कॉल डिटेल रिकॉर्ड.

- ब्रह्मभट्ट के बेटे ओम ने कहा था कि वह अपने पिता को तुरंत GCS अस्पताल ले गया था. लेकिन मेडिकल ऑफिसर के सबूतों से पता चला कि पीड़ित को उनके भाई एक रेफरल नोट के साथ लाए थे. अभियोजन पक्ष ने रिकॉर्ड पर GCS अस्पताल का कोई मेडिकल पेपर पेश नहीं किया है.

8 महीने पहले ही जेल में बीता चुकी थी महिला

छुवारा पहले ही आठ महीने जेल में बिता चुकी हैं. उसकी अपील 23 जुलाई को स्वीकार कर ली गई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने माना कि निकट भविष्य में इसकी सुनवाई की ‘बहुत कम संभावना’ है. इसके बाद अदालत ने अपील पर फैसला होने तक सजा को निलंबित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का सहारा लिया. 

ये भी पढ़ें: नेपाल में इस महिला पायलट ने एक हफ्ते में सैकड़ों जानें बचाईं, कौन हैं प्रिया अधिकारी?

कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि ये टिप्पणियां सजा पर रोक लगाने की अर्जी पर फैसला करते समय की जा रही हैं. न कि दोषसिद्धी के खिलाफ लंबित अपील पर. कोर्ट ने आदेश दिया कि छुवारा को 15 हजार रुपये के नए बॉन्ड और उतनी ही रकम के एक जमानतदार के साथ जमानत पर रिहा किया जाए. उससे कहा गया है कि वो हाई कोर्ट की मंजूरी के बिना भारत छोड़कर न जाए.

वीडियो: पिता के निधन से टूटे Lionel Messi, संन्यास को लेकर किया बड़ा ऐलान

Advertisement