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सोने के बाद चांदी पर सख्ती, सरकार ने बदले इंपोर्ट के रूल्स, बाजार पर क्या असर होगा?

मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स ने इंपोर्ट पॉलिसी में चांदी को लेकर कुछ बदलाव किए हैं. नई इंपोर्ट पॉलिसी के तहत, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाली चांदी की सिल्लियों को Free श्रेणी से हटाकर प्रतिबंधित वाली श्रेणी में डाल दिया गया है.

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सरकार ने चांदी की ईंटों के इंपोर्ट पर रोक लगा दी है (PHOTO-India Today)

आग कहीं लगे. उसकी आंच का असर दूर तक होता है. ऐसा ही कुछ हुआ है वेस्ट एशिया में ईरान-अमेरिका (Iran-US War) की जंग से. भारत का भले इस जंग से कोई लेना-देना न हो, लेकिन इससे उपजी दिक्कतों का असर यहां देखने को मिलने लगा है. तेल-गैस के संकट के बीच अब खबर है कि सरकार ने चांदी की ईंटों (Silver Bar Imports) की कुछ कैटेगरीज के इंपोर्ट पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने एक नोटिफिकेशन के जरिए इसकी जानकारी दी है.

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‘Free’ से 'प्रतिबंधित' श्रेणी में

मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स ने इंपोर्ट पॉलिसी में चांदी को लेकर कुछ बदलाव किए हैं. नई इंपोर्ट पॉलिसी के तहत 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाली चांदी की सिल्लियों को ‘फ्री’ श्रेणी से हटाकर ‘प्रतिबंधित’ वाली श्रेणी में डाल दिया गया है. साथ ही चांदी की दूसरी तरह की सिल्लियों को भी ‘प्रतिबंधित इंपोर्ट’ की कैटेगरी में डाल दिया गया है. सरकार का तर्क है कि इस कदम का मकसद देश में चांदी के इंपोर्ट की निगरानी और रेगुलेशन को मजबूत करना है. DGFT की अधिसूचना में कहा गया है कि चांदी के इंपोर्ट से जुड़े संशोधित नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक इससे पहले सरकार ने कीमती मेटल्स पर इंपोर्ट शुल्क में काफी बढ़ोतरी की थी. साथ ही सरकार ने 'एडवांस ऑथराइजेशन' योजना के तहत सोने के इंपोर्ट पर 100 किलोग्राम की सीमा भी लगा दी थी. यह योजना आभूषण इंपोर्ट करने वालों को उनके कच्चे माल का इंपोर्ट जीरो शुल्क पर करने की अनुमति देती है. सरकार ने सोने के इंपोर्ट के लिए 'एडवांस ऑथराइजेशन' जारी करने और उसकी निगरानी करने की शर्तों को भी सख्त कर दिया है. इससे पहले, इस योजना के तहत सोने के इंपोर्ट पर कोई सीमा नहीं थी.

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व्यापारियों की क्या चिंता है?

‘द लल्लनटॉप’ ने इस मुद्दे पर 'ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन' (AIJGF) के राष्ट्रीय महासचिव और प्रवक्ता नितिन केड़िया से बात की. उन्होंने बताया कि भारत में पहले से ही काफी चांदी है लेकिन इसके बावजूद मार्केट पर इसका निगेटिव असर पड़ सकता है. उन्होंने कहा,

सबसे पहली बात कि ये फैसला सरकार ने शुक्रवार को लिया. अगले दो दिनों तक मार्केट बंद ही रहता है. लिहाजा जब व्यापारी सोमवार को मार्केट में जाएगा तो उसे चांदी महंगी मिलेगी. यानी, पहला झटका तो यहीं लगेगा. यह फैसला चांदी के घरेलू प्रीमियम को बढ़ा सकता है. नतीजा ये होगा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी स्थिर रहने के बावजूद भारत में कीमतें ऊंचे प्रीमियम पर ट्रेड कर सकती हैं. इसलिए सरकार और DGFT को तुरंत स्पष्ट करना चाहिए कि वैध ज्वेलरी और बुलियन व्यापारियों के लिए इंपोर्ट अनुमति की प्रक्रिया क्या होगी. ताकि बाजार में भ्रम और अनावश्यक सट्टेबाजी न बढ़े. साथ ही इससे स्मगलिंग और अवैध रूट्स से इंपोर्ट की संभावना बनेगी जो कीमतें और बढ़ा सकती है.

उन्होंने आगे कहा कि सरकार इस निर्णय से जुड़े operational guidelines, eligible importers, licence प्रक्रिया, port clearance और Policy Condition No. 7 की प्रैक्टिकल व्याख्या तुरंत जारी करे. इससे बाजार में पारदर्शिता बनी रहेगी और छोटे और मध्यम ज्वेलर्स को अनावश्यक नुकसान से बचाया जा सकेगा. रिटेल ज्वेलरी बिक्री पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन raw material import पर नियंत्रण के कारण आने वाले दिनों में घरेलू कीमतों और उपलब्धता पर असर दिख सकता है.

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सभी मेटल्स पर बढ़ाई गई इंपोर्ट फीस

सोने और चांदी पर इंपोर्ट शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है. साथ ही प्लैटिनम पर इसे 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 15.4 प्रतिशत कर दिया गया है. सोने/चांदी के डोरे (dore), सिक्कों, फाइंडिंग्स (findings) आदि जैसी अन्य चीजों में भी इसके बदलाव हुए हैं. ये कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोने की खरीद पर अंकुश लगाने और विदेशी मुद्रा खर्च को कम करने के लिए कुछ दिन पहले ही लोगों से अपील की है.

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