गरीब सवर्णों के लिए 10 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था करने वाली सरकारी स्कीम का फायदा क्या ‘फर्जी गरीब’ उठा रहे हैं? बताया जा रहा है कि अमीर और संपन्न परिवार के लोग भी सरकारी परीक्षाओं में सीटें पाने के लिए खुद को गरीब दिखाने की होड़ में लगे हैं. UPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं तक इसकी आंच पहुंच गई है.
UPSC की 'गरीब लिस्ट' का सच, EWS कोटे का गलत फायदा उठा रहे अमीर कैंडिडेट, रिपोर्ट में दावा
क्या आप सोच सकते हैं कि किसी देश में खुद को गरीब दिखाने की होड़ लग जाए. मल्टिनेशनल कंपनी में काम करने वाले के परिजन, एलीट ग्रुप के लोग अपनी गरीबी का सर्टिफिकेट भी बनवा लें. फायदा मिलता हो तो कोई कुछ भी कर सकता है. अगर UPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में 10 फीसदी का रिजर्वेशन मिलता हो.


इंडियन एक्सप्रेस से जुड़े श्यामलाल यादव ने अपनी एक रिपोर्ट में EWS कोटे से UPSC पास करने वाले उम्मीदवारों के डॉक्युमेंट्स जांचे हैं. इसमें हैरान करने वाली जानकारी सामने आई है.
रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में UPSC क्लियर करने वाले लोगों में 104 उम्मीदवार EWS कोटे से थे. इनमें कई ऐसे लोग थे, जो वाकई गरीब परिवार से आते थे. कोई सिक्योरिटी गार्ड का बेटा था. किसी के पिता बस कंडक्टर थे. एक महिला उम्मीदवार के पिता कुली का काम करते थे. कई उम्मीदवार ऐसे भी थे, जिनके पैरेंट्स दिहाड़ी मजदूर थे. ऐसे लोगों की सफलता ही सही मायने में EWS कोटे के मकसद को पूरा करती है.
लेकिन क्या हो जब UPSC की तैयारी के लिए लाखों रुपये की फीस भरने की क्षमता रखने वाले या बिजनेस चलाने वाले परिवारों के लोग भी इसी कोटे से चुने जाएं? UPSC के 2025 के रिजल्ट में ऐसा ही हुआ है!
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सफल उम्मीदवारों के डॉक्युमेंट्स की जांच से पता चला है कि 2025 में EWS कोटे से पास हुए लोगों में से तकरीबन 64.4 फीसदी उम्मीदवारों ने अच्छी-खासी फीस देकर सिविल सर्विस की तैयारी कराने वाली कोचिंग में पढ़ाई की थी. इनमें से 44.4 फीसदी ऐसे हैं, जिनकी स्कूली पढ़ाई-लिखाई प्राइवेट स्कूलों में हुई थी. 26.9 फीसदी उम्मीदवार ऐसे भी थे, जिनके मां-पिता बिजनेस चलाते हैं. गरीब सवर्ण कोटे से पास होने वाले उम्मीदवारों में 9.6 फीसदी के पास कार्पोरेट सेक्टर में नौकरी थी, जहां उन्हें बढ़िया सैलरी मिलती थी.
जांच में और क्या-क्या मिला?साल 2025 की UPSC परीक्षा के नतीजे इसी साल मार्च (2026) में घोषित किए गए थे. 958 उम्मीदवारों ने इस बार UPSC क्लियर किया था. इनमें 104 उम्मीदवारों का चयन EWS कोटे से हुआ था. इंडियन एक्सप्रेस ने इन 104 लोगों की सोशल मीडिया प्रोफाइल, कोचिंग संस्थान के रिकॉर्ड और स्कूल-कॉलेज के डिटेल्स खंगाले हैं. इस जांच में जो-जो बातें पता चलीं, वो ये हैंः
– EWS कोटे से पास होने वालों में यूपी से 25, बिहार से 17, मध्य प्रदेश से 14, हरियाणा से 9, राजस्थान से 8, गुजरात से 5, उत्तराखंड से 4, कर्नाटक से 4 और केरल से 3 कैंडिडेट्स हैं.
– इनमें 67 उम्मीदवारों ने दिल्ली और अन्य शहरों में बड़े कोचिंग संस्थानों जैसै- वाजीराम एंड रवि, वाजीराव एंड रेड्डी और दृष्टि आईएएस से तैयारी की थी. इन संस्थानों की सालाना फीस तकरीबन 2.65 लाख रुपये तक होती है.
– 46 उम्मीदवार ऐसे थे, जिनकी स्कूली शिक्षा दिल्ली-एनसीआर, लखनऊ, रायपुर और जयपुर जैसे राजधानियों के प्राइवेट स्कूलों में हुई. इन स्कूलों की फीस सालाना 45 हजार से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक होती है.
– कम से कम 28 कैंडिडेट्स ऐसे हैं, जिनके मां-बाप अपना बिजनेस चलाते हैं. इनमें खुद की दुकानें, ट्रेडिंग, स्टील फैब्रिकेशन, कपड़े और मिठाई का कारोबार जैसे काम शामिल हैं. इनमें से 5 लोगों के परिवार दिल्ली-एनसीआर या राज्य की राजधानियों या अन्य जिला मुख्यालयों में रहते हैं.
– इनमें कम से कम 10 कैंडिडेट्स ऐसे थे, जो UPSC की तैयारी शुरू करने से पहले अच्छी सैलरी पर नौकरी कर रहे थे. इनमें से कुछ मल्टिनेशनल कंपनियों में काम करते थे. कुछ बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी पर थे.
– 104 में से कई कैंडिडेट्स भारत की बड़ी यूनिवर्सिटीज से पढ़े हैं. इनमें IIT, NIT, दिल्ली यूनिवर्सिटी और जेएनयू जैसे संस्थान शामिल हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, EWS कोटे से सफल उम्मीदवारों में 14 IIT से ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट हैं. कम से कम तीन NIT से पढ़े हैं. 27 ने डीयू और तीन ने जेएनयू से पढ़ाई की है.
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गरीब परिवार के बच्चे भी सफलहालांकि, इस कोटे से कई गरीब परिवार के बच्चों को भी अफसर बनने का मौका मिला है. 104 सफल कैंडिडेट्स में से एक उम्मीदवार ऐसा है, जो सिक्योरिटी गार्ड का बेटा है. उनके पिता पहले सेना में थे, लेकिन अब गार्ड की नौकरी करते हैं. एक महिला है, जिसके पिता कुली का काम करते थे. 7 छात्र ऐसे हैं, जो जवाहर नवोदय स्कूल से पढ़े हैं. यह सरकारी स्कूल खासतौर पर ग्रामीण इलाके के गरीब बच्चों के लिए होता है. इनमें पढ़ने वाले ज्यादातर छात्र हिंदी मीडियम से आते हैं और उनके मां-पिता किसान होते हैं. 29 उम्मीदवारों के माता-पिता किसान हैं. इनमें से 7 उत्तर प्रदेश से और 4-4 बिहार, हरियाणा और मध्य प्रदेश से आते हैं.
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