गोवा में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग एक्ट (TPC) की धारा 39A के खिलाफ विरोध बढ़ता जा रहा है. सोमवार, 23 फरवरी को बड़ी संख्या में लोग गोवा के टाउन प्लानिंग मंत्री विश्वजीत राणे के घर के बाहर जमा हो गए. मंत्री के घर के बाहर सैकड़ों प्रदर्शनकारियों, विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया.
एक महीने का नोटिस और जमीन का जोन बदल जाएगा... गोवा में धारा 39A को लेकर लोग सड़कों पर क्यों?
Goa 39A Protests: सोमवार, 23 फरवरी को हजारों लोग पणजी के आजाद मैदान में जमा हो गए. इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने टाउन प्लानिंग मंत्री विश्वजीत राणे बंगले तक मार्च करने का फैसला किया. पर्यावरणविद, एक्टिविस्ट और विपक्षी पार्टियों के विधायकों ने भी आंदलन में हिस्सा लिया.


शुक्रवार, 20 फरवरी से शुरू हुआ यह आंदोलन शनिवार को और तेज हो गया, जब सेंट आंद्रे के MLA वीरेश बोरकर ने धारा 39A के खिलाफ आमरण अनशन का ऐलान कर दिया. लोगों का भी इसको भरपूर समर्थन मिला. रविवार, 22 फरवरी को अनशन वाली जगह, आजाद मैदान में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए. कई पर्यावरणविद, एक्टिविस्ट और विपक्षी पार्टियों के MLA भी बोरकर के समर्थन में आ गए.
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार सोमवार, 23 फरवरी को भी प्रदर्शन जारी रहा, जहां दिन में हजारों प्रदर्शनकारी आजाद मैदान में जमा हो गए. इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने टाउन प्लानिंग मंत्री विश्वजीत राणे के बंगले तक मार्च करने का फैसला किया. फिर मार्च के बाद लोगों ने घर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया.
पूरा विवाद TPC की धारा 39A को लेकर है. इस एक्ट के तहत सरकार को किसी जमीन का जोन बदलने का अधिकार मिलता है. सरकार चाहे तो नेचुरल कवर यानी प्रकृति से भरपूर जमीनों को भी सेटलमेंट यानी रिहायशी इलाके में बदल सकती है. इसके तहत जंगल, पहाड़ और बाग-बगीचों वाले इलाकों में भी सेटलमेंट की इजाजत दी जा सकती है.
नियम के तहत सरकार को जमीन का जोन बदलने के लिए 30 दिन का पब्लिक नोटिस देना होगा. अगर इस दौरान कोई आपत्ति आती है तो उसकी भी समीक्षा TPC बोर्ड करेगा. इंडिया टुडे से जुड़े रितेश देसाई के इनपुट के अनुसार यह एक्ट फरवरी 2024 में लाया गया था. एक्ट को तभी कानूनी चुनौती भी दी गई थी और इसके खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में PIL भी दायर की गई थी. मामला अभी भी कोर्ट में चल रहा है.
स्थानीय लोगों के भविष्य की चिंतालोगों का आरोप है कि गोवा में 39/A लागू होने की वजह से, कई हरी-भरी जमीनों को सेटलमेंट जोन में बदल दिया गया. इससे बिल्डर लॉबी को फायदा हुआ है. इसकी वजह से, गोवा में बड़े पैमाने पर कई हाउसिंग प्रोजेक्ट बन रहे हैं. इससे स्थानीय लोगों का भविष्य खतरे में पड़ रहा है.
साथ ही इससे गोवा के पानी, जंगल और जमीन को नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगाया जा रहा है. इन इलाके में बड़ी संख्या में कंस्ट्रक्शन और हाउसिंग प्रोजेक्ट बन रहे हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि इन प्रोजेक्ट्स की वजह से राज्य में माइग्रेंट्स यानी प्रवासियों की संख्या भी बढ़ रही है. उनका मानना है कि इससे लोकल लोगों पर असर पड़ रहा है.
अभी क्यों भड़का विवाद?लेकिन हाल ही में विवाद भड़का पालेम-सिरिदाओ में 76,000 sqm की जमीन को सेटलमेंट जोन में बदलने की इजाजत देने से. आरोप है कि यह इलाके प्राकृतिक रूप से संवेदनशील हैं, लेकिन प्राइवेट कंपनियों के हित में इसे सेटलमेंट जोन में बदल दिया गया. इसी को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब पूरी धारा 39A को खत्म करने की मांग में बदल गया है.
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इधर, पूरे विवाद पर गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत का कहना है कि प्रदर्शनकारी नागरिकों को लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करना चाहिए. किसी भी विधायक द्वारा युवा मंत्री के घर पर इस तरह से विरोध प्रदर्शन करना गलत है. हम इस पर चर्चा के लिए तैयार हैं. सीएम ने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए विधानसभा जैसा मंच उपलब्ध है. यदि आंदोलन इसी तरह जारी रहा तो पुलिस अपने तरीके से कार्रवाई करेगी, जिसके लिए विपक्षी दल और आंदोलनकारी दोनों ही पूरी तरह जिम्मेदार होंगे.
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