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फोर्ड फाउंडेशन ने 65 साल बाद खाली किया दफ्तर, सरकारी नोटिस के बाद हुआ एक्शन

केंद्र सरकार के आदेश पर Ford Foundation ने दिल्ली के लोधी एस्टेट ऑफिस खाली कर दिया है. 65 साल बाद संस्थान ने अपना दफ्तर खाली कर दिया है. सरकार ने लीज खत्म होने के बाद ऑफिस खाली करने का नोटिस भेजा था.

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फोर्ड फाउंडेशन 1960 के दशक से इस ऑफिस में काम कर रहा था. (फोटो: इंडिया टुडे)

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  • केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने 2025 में लीज खत्म होने के बाद फोर्ड फाउंडेशन का दिल्ली के लोधी एस्टेट वाला दफ्तर खाली कराया और अब वहां दो अंतरराष्ट्रीय संगठनों को जगह दी है।
  • फोर्ड फाउंडेशन ने फरवरी 2024 में अपना लोधी एस्टेट ऑफिस खुद ही खाली किया था, जिसके बाद मंत्रालय ने उस जगह को बिना जबरदस्ती खाली कराने के लिए दो अन्य संगठनों को आवंटित किया।
  • फोर्ड फाउंडेशन के स्थान पर अब इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस और ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस को ऑफिस मिला है, जो प्रधानमंत्री द्वारा 2023 में स्थापित ये संगठन हैं।

केंद्र सरकार ने फोर्ड फाउंडेशन (Ford Foundation) का दिल्ली के लोधी एस्टेट वाला दफ्तर खाली करा लिया है. यह संस्था 1960 के दशक से यहां काम कर रही थी. अधिकारियों ने बताया कि फाउंडेशन ने खुद ही यह जगह खाली कर दी थी, इसलिए कोई जबरदस्ती नहीं करनी पड़ी. अब सरकार ने यह जगह भारत की अगुआई करने वाले दो अंतरराष्ट्रीय संगठनों को दे दी है. 

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लीज खत्म होने पर लिया एक्शन

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) के ‘लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस’ ने साल 2025 में लीज खत्म होने के बाद यह कार्रवाई की. पहले फोर्ड फाउंडेशन का ऑफिस 55, लोधी एस्टेट में था. सूत्रों ने बताया कि फाउंडेशन ने इस साल फरवरी में ही दफ्तर खाली कर दिया था. इसके बाद मार्च में उन्होंने अपनी वेबसाइट पर नया पता भी डाल दिया. 

अब फाउंडेशन का नया दफ्तर संसद मार्ग पर स्थित डीएलएफ सेंटर में है. फोर्ड फाउंडेशन ने इस मामले पर उनका रुख जानने के लिए भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया. फोन पर संपर्क करने और दिल्ली ऑफिस जाने पर भी उनके प्रतिनिधि उपलब्ध नहीं हो सके. वहीं, मंत्रालय (MoHUA) ने भी इस पर कोई जवाब नहीं दिया है.

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दूसरे संगठनों को ऑफिस अलॉट हुआ 

अब 'इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस' (IBCA) और 'ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस' (GBA) को उस इमारत के ग्राउंड और पहली मंजिल पर जगह अलॉट कर दी गई है, जहां पहले फोर्ड फाउंडेशन का ऑफिस हुआ करता था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 में IBCA (कई देशों और कई एजेंसियों का गठबंधन) और GBA लॉन्च किया था. 

फोर्ड फाउंडेशन क्या है?

फोर्ड फाउंडेशन एक अमेरिकी प्राइवेट और स्वतंत्र संस्था है. इसका मकसद मानव कल्याण को बढ़ावा देना, गरीबी को कम करना, लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना और सामाजिक न्याय को स्थापित करना है. कानूनी तौर पर यह संगठन फोर्ड मोटर कंपनी से पूरी तरह अलग है. यह दुनिया के सबसे अमीर और प्रभावशाली गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) में से एक है.

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इसकी स्थापना 1936 में फोर्ड मोटर कंपनी के मालिक हेनरी फोर्ड और उनके बेटे एडसेल फोर्ड ने की थी. शुरुआत में यह मिशिगन (अमेरिका) में एक छोटी स्थानीय संस्था के रूप में काम करती था, लेकिन 1950 के बाद इसने ग्लोबल लेवल पर काम करना शुरू किया. फोर्ड फाउंडेशन ने 1952 में नई दिल्ली में अपना ऑफिस खोला. इसका ग्लोबल हेडक्वार्टर न्यूयॉर्क शहर में स्थित है.

आजादी के बाद से ही फोर्ड फाउंडेशन केंद्र और राज्य सरकारों की कई अहम योजनाओं में शामिल रहा है. इनमें पंचवर्षीय योजनाएं, कृषि और शिक्षा कार्यक्रम शामिल हैं. फाउंडेशन ने आजाद भारत के शुरुआती दशकों में प्रमुख रिसर्च, एकेडमिक, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, शहरी प्लानिंग (जैसे दिल्ली का मास्टर प्लान), खाद्य सुरक्षा (हरित क्रांति में मदद) और शैक्षणिक संस्थानों (जैसे IIMs और IITs) को स्थापित करने और मजबूत करने में अहम आर्थिक योगदान दिया है.

अमेरिकी आर्किटेक्ट ने डिजाइन किया था ऑफिस

लोधी एस्टेट में फोर्ड फाउंडेशन के हेडक्वार्टर को अमेरिकी आर्किटेक्ट जोसेफ स्टीन ने डिजाइन किया था. उन्होंने दिल्ली में आजादी के बाद की मशहूर इमारतें जैसे इंडिया हैबिटेट सेंटर और इंडिया इंटरनेशनल सेंटर भी डिजाइन की थीं. फोर्ड फाउंडेशन 1960 के दशक से 55, लोधी एस्टेट कॉम्प्लेक्स में है. इस जगह पर यूनाइटेड नेशंस और उसकी एजेंसियां ​​भी रही हैं और आज भी इसके कुछ हिस्सों का इस्तेमाल कर रही हैं.

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विवादों में रहा है फोर्ड फाउंडेशन

केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने 2015 में फोर्ड फाउंडेशन को वॉचलिस्ट में डाल दिया था. तब गुजरात सरकार ने आरोप लगाया था कि फाउंडेशन एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ के NGO ‘सबरांग ट्रस्ट’ और ‘सिटिजन फॉर जस्टिस एंड पीस’ की ‘भारत-विरोधी’ गतिविधियों के लिए फंडिंग कर रहा था. मंत्रालय ने फाउंडेशन को ‘पहले मंजूरी वाली कैटेगरी’ (prior approval category) में डाल दिया था. इसका मतलब था कि भारतीय संगठनों को दिए जाने वाले उसके सभी फंड को पहले सरकार से मंजूरी लेनी होगी. मार्च 2016 में पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा से पहले फाउंडेशन को उस लिस्ट से हटा दिया गया.

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