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चिदंबरम ने पूछा BRICS से भारत को क्या मिला? शशि थरूर ने वीडियो बनाकर फायदे गिना दिए

P chidambaram Shashi Tharoor on BRICS: भारत में हो रही BRICS समिट को लेकर कांग्रेस के दो सीनियर नेताओं के अलग-अलग बयान सामने आए हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने पूछा कि BRICS से भारत को क्या फायदा हुआ, इस पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने फायदे बताए.

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शशि थरूर (बाएं) ने BRICS पर पी. चिदंबरम (दायें) के सवाल का जवाब दिया है. (फाइल फोटो)

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  • भारत में 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वां BRICS समिट आयोजित किया जाएगा, जिसमें देशों के विदेश मंत्री और अन्य प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।
  • समिट की पृष्टभूमि में ईरान वॉर और रूस-यूक्रेन संघर्ष से संबंधित असहमति है, जिसके कारण मई 2026 की पूर्व बैठक में एक संयुक्त बयान जारी नहीं किया जा सका।
  • समिट के बाद भारत को चुनौती बनी रहेगी कि वह इन देशों के बीच व्यापार असंतुलन और राजनीतिक मतभेदों को समाप्त कर वैश्विक मंच पर प्रभावी भूमिका निभाए।

BRICS समिट 2026 भारत में आयोजित हो रही है. तारीख 12-13 सितंबर तय है. जगह है नई दिल्ली का भारत मंडपम. लेकिन इस समिट पर कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने सवाल उठाया है. कहा है कि BRICS जैसे संगठन का हिस्सा बनकर भारत को क्या मिला? अब शशि थरूर ने विस्तार से इसका जवाब दिया है. शशि थरूर ने बताया कि BRICS को होस्ट करना भारत की कूटनीतिक स्तर पर देशों को एकजुट करने की शक्ति को दिखाता है. 

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शशि थरूर ने BRICS पर क्या कहा?

पी. चिदंबरम ने कहा था कि भारत, BRICS, SCO, G20 और QUAD जैसे वैश्विक संगठनों से जुड़ा है. लेकिन क्या असल में भारत को इससे फायदा होता है? शशि थरूर ने इसका जवाब देते हुए कहा,

‘सबसे पहली बात तो हम ग्लोबल साउथ के लिए एक अहम मंच दे रहे हैं. आप जानते हैं कि ग्लोबल साउथ में 100 से ज़्यादा देश हैं. लेकिन केवल 11 अहम देश ही BRICS के सदस्य हैं. ये देश मिलकर अलग-अलग तरह की सोच और उन देशों की विविधता का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिनकी अध्यक्षता हम इस खास मौके पर कर रहे हैं. ये संगठन दुनिया की ज़्यादातर आबादी और ग्लोबल GDP के 41 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है.’

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उनका कहना है कि ये कोई छोटी बात नहीं है. ऐसे सम्मेलन को होस्ट करना अपने आप में सम्मान की बात है. पी. चिदंबरम के बयान की आलोचना भाजपा ने भी की. भाजपा ने उन्हें ‘नाराज़ फूफा’ ग्रुप में डाल दिया और कहा कि वे भारत की तरक्की नहीं देख सकते.  

BRICS देशों में मुख्य रूप से भारत, रूस, चीन, ब्राज़ील और साउथ अफ्रीका शामिल हैं. बाद में इसे बढ़ाकर इसमें ईरान, UAE, सऊदी अरब, मिस्र और इथियोपिया को शामिल किया गया. 

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BRICS की चुनौतियां क्या हैं?

शशि थरूर ने 18 वें BRICS सम्मलेन की कुछ चुनौतियों पर भी बात की है. सबसे बड़ी चुनौती सभी देशों के आलाकमान को एक पेज पर ले आना. मई 2026 में BRICS के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई थी. इसमें सबसे बड़ा ड्रॉबैक रहा कि ईरान वॉर और रूस-यूक्रेन मुद्दे पर सब एक पेज पर नहीं आ पाए. भारत इस सम्मलेन को होस्ट कर रहा था, लेकिन एक जॉइंट स्टेटमेंट रिलीज़ नहीं हो सका. शशि थरूर का कहना है कि अगर फिर ऐसी असहमति बनी, तो इसे सेटबैक की तरह देखा जा सकता है. 

शशि थरूर ने कहा कि भारत के लिए ये एक बड़ा चैलेंज है कि ईरान वॉर और रूस-यूक्रेन कॉन्फ्लिक्ट पर सभी देशों को एक विचार पर कैसे लाया जाए. कांग्रेस सांसद ने दूसरी चुनौती पर भी बात की है. उन्होंने बताया कि भारत-BRICS देशों के बीच व्यापार तो बढ़ रहा है, लेकिन कई मामलों में भारत नुकसान में रहा है. इन देशों से भारत का आयात बढ़ा है और निर्यात घटा है. 

वीडियो: शशि थरूर और अधीर रंजन चौधरी पर कहां हमला हुआ?

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