दिल्ली में जन्मी एक लड़की ने जाम्बिया में इतिहास रच दिया हैं. 7 साल की उम्र में उन्होंने अपने माता-पिता के साथ भारत छोड़ दिया था. फिर जाम्बिया और इंग्लैंड से वकालत की पढ़ाई पूरी की. आज जाम्बिया सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज हैं. हम बात कर रहे हैं जस्टिस आभा नायर पटेल की. जस्टिस आभा भारतीय सुप्रीम कोर्ट (SC) के एक लेक्चर प्रोग्राम ‘The Justice Delivery: Innovation, Inclusion And Integrity’ में शामिल होने आई थीं.
कौन हैं जस्टिस आभा नायर पटेल? भारत से लेकर जॉम्बिया तक चर्चा, दिल्ली से है खास रिश्ता!
Zambia Supreme Court की पहली महिला जज Justice Abha Nair भारतीय मूल की हैं. खास बात यह है कि भारत के सुप्रीम कोर्ट में भी उनके नाम एक उपलब्धि जुड़ गई है. जानिए दिल्ली से कैसे वह जाम्बिया पहुंची और वहां इतिहास बनाया.

जस्टिस नायर पटेल ने वकालत की पढ़ाई की है और सुप्रीम कोर्ट की जज भी हैं. इसके अलावा, उनका जीवन और शौक काफी रोमांचक हैं. माउंट किलिमंजारो की दुर्गम मानी जाने वाली पहाड़ की चढ़ाई भी की है. जस्टिस आभा के माता-पिता 1973 में भारत से जाम्बिया बेहतर रोजगार अवसरों की तलाश में गए थे.
SC के प्रोग्राम में शामिल होने भारत आईं‘सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन’ (SCAORA) की ओर से खास लेक्चर का आयोजन किया गया था. जस्टिस आभा इसमें हिस्सा लेने के लिए पहुंची थीं. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस आभा नायर पटेल को भारतीय सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इनवाइट किया था. सुप्रीम कोर्ट की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि इस लेक्चर में शामिल होने मेरी ज़िंदगी के सबसे ‘सुनहरे पलों’ में से एक है.
जस्टिस आभा ने इसके अलावा एक और कीर्तिमान भी रचा है. ऐसा पहली बार हुआ है जब भारत के सुप्रीम कोर्ट के न्यायिक स्टेज पर जाम्बिया के किसी जज ने शिरकत की हो. अब बात उनके करियर की करते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने जाम्बिया यूनिवर्सिटी से लॉ में ग्रेजुएशन किया. इसके बाद उन्होंने इंग्लैंड के क्रैम्बिज यूनिवर्सिटी से अपना मास्टर्स पूरा किया. बाद में वो साल 1989 में जाम्बिया बार काउंसिल में शामिल हो गईं.

जस्टिस आभा ने सालों तक वकालत की और साल 2019 में जाम्बिया के एक हाई कोर्ट की जज बनी. इसके बाद साल 2023 में उन्होंने कोर्ट ऑफ अपील में जज के तौर पर अपनी सेवाएं दीं. 27 मई 2026 को जाम्बिया सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज के तौर पर नियुक्त किया गया है.
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने चैनल से बात करते हुए कहा,
‘भारत छोड़े हुए कई दशक बीत चुके हैं. लेकिन देश हमारे दिलों से कभी अलग नहीं हो सकता. दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाले भारतीय अपनी भाषा, खान-पान, संस्कृति और धार्मिक परंपराएं जिंदा रखते हैं’
जस्टिस आभा ने अपने नाम में नायर पटेल लगने के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा कि उन्होंने एक गुजराती परिवार में शादी की है. इसलिए उन्हें गुजराती भाषा भी आती है. ऐसे में कई बार लोग उनके नाम को लेकर कन्फ्यूज हो जाते हैं.

जस्टिस आभा ने CJI सूर्यकांत और प्रोग्राम के बारे में बात करते हुए कहा,
‘जिस तरह से CJI सूर्यकांत ने मुझे सुप्रीम कोर्ट के मंच पर जगह दी, उसे मैं कभी नहीं भूल पाऊंगी. ये मेरे जिंदगी के सुनहरे पल हैं. इस अनुभव ने मेरे दिल को गहराई तक छू लिया.’
जस्टिस आभा ने आगे बताया कि भारतीय संविधान और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को दुनियाभर में पढ़ा जाता है. इन सबका वकालत की पढ़ाई में एक अहम स्थान है. उन्होंने कहा, 'अगर आप भारत के संवैधानिक न्याय के बारे में नहीं पढ़ते हैं, तो आपकी लॉ की पढ़ाई अधूरी है.’
भारतीय न्याय प्रणाली की तारीफजस्टिस आभा ने यह भी बताया कि उन्होंने भारत के संवैधानिक कानूनों के बारे में काफी डिटेल में पढ़ाई की है. उन्होंने भारतीय न्याय प्रणाली की तारीफ करते हुए कहा कि जस्टिस नायर पटेल ने भारत की ज्यूडिशियरी की तारीफ करते हुए कहा कि भारतीय न्यायपालिका ने हर लिहाज से शानदार प्रगति की है.
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