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उन्हें किचन में ही मार डाला... मार्को रुबियो को ताज होटल के सुरक्षा चीफ ने सुनाई आपबीती

अमेरिकी उपराष्ट्रपति मार्को रुबियो इस वक़्त भारतीय दौरे पर हैं. उन्होंने 20 अक्टूबर को मुंबई में 26/11 स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की. इसी दौरान एस जयशंकर ने उन्हें ताज होटल के सुरक्षा चीफ सुनील कुड्यादी से मिलवाया. सुनील ने 26/11 की आपबीती सुनाई.

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एस जयशंकर (बीच), मार्को रुबियो (राइट) और ताज होटल के सुरक्षा प्रमुख सुनील कुड्यादी (लेफ्ट). (courtesy: S. Jaishankar/X)

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  • अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 20 अक्टूबर को मुंबई के 26/11 स्मारक पर श्रद्धांजलि दी और ताज होटल के सुरक्षा प्रमुख सुनील कुड्यादी से 2008 के आतंकी हमले की जानकारी प्राप्त की।
  • यह आयोजन भारत-पाकिस्तान के तनावपूर्ण संबंधों और डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की पाकिस्तान के साथ संबंधों को मजबूत करने की कोशिश की पृष्ठभूमि में हुआ, जिसमें जयशंकर ने पाकिस्तान के आतंकवाद पर ध्यान केंद्रित किया।
  • जयशंकर ने रुबियो को पाकिस्तान के प्रति नाराजगी जताई जबकि रुबियो ने अमेरिका की पाकिस्तान के साथ साझेदारी जारी रखने की आवश्यकता बताई, जिससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक संवाद की संभावना बनी।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार यानी 20 अक्टूबर को मुंबई में 26/11 स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की. वे इस वक़्त भारत के दौरे पर हैं. भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर भी मौके पर मौजूद रहे. उन्होंने इस मौके को भुनाया और पाकिस्तान के आतंक की कहानी सुनाई. उन्होंने ये सुनिश्चित किया कि अमेरिकी विदेश मंत्री को वो कहानी किसी ऐसे व्यक्ति से सुनने को मिले, जिसने खुद 2008 के हमलों को अपनी आंखों से देखा हो. 

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ताज होटल के सुरक्षा प्रमुख सुनील कुड्यादी ने मार्को रुबियो को विस्तार से बताया कि कैसे लश्कर के आतंकवादियों ने लगभग 60 घंटों तक होटल को अपने घेरे में रखा था. ये आतंकी हमला मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुआ था. हमले में 166 लोगों की जान चली गई थी, जिनमें 6 अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे. हमले में मुंबई के ताज होटल को भी निशाना बनाया गया था. 

सुनील कुड्यादी ने क्या बताया?

सुनील कुड्यादी ने मार्को रुबियो को बताया कि आतंकी आधी रात को आए थे. वे किचन के रास्ते छठी मंजिल तक पहुंच गए. उन्होंने आगे बताया कि किचन में ही बहुत लोगों की जान चली गई. उस रात ताज होटल के 31 कर्मचारियों की जान गई थी. जयशंकर ने इसके आगे बताया कि उस वक़्त सुनील ने ही लोगों को हमले के बारे में अलर्ट किया था. 

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दो रातों और तीन दिनों तक, सैकड़ों मेहमान और कर्मचारी अंदर फंसे रहे, जबकि चार हथियारबंद आतंकवादी गलियारों में घूमते हुए लोगों को मार रहे थे. हैरानी की बात ये है कि ताज होटल का कोई भी कर्मचारी वहां से भागा नहीं. वे सभी मेहमानों की मदद करने के लिए होटल में ही रुके रहे. इन्हीं में से एक सुनील भी थे. 

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इसके पीछे जयशंकर की सोच

इसे भारतीय विदेश मंत्री का स्मार्ट मूव कहा जा रहा है. वो इसलिए क्योंकि डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान से संबंध मज़बूत करने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में मार्को रुबियो को आतंकी हमले के सर्वाइवर की आपबीती सुनाना एक गहरा प्रभाव डाल सकता है. अब जयशंकर ने तो मार्को रुबियो से पाकिस्तान के प्रति नाराज़गी का ज़िक्र कर दिया है. 

लेकिन, रुबियो का कहना है कि अमेरिका के लिए पाकिस्तान के साथ रिश्ते बनाए रखना ज़रूरी है. वो एक न्यूक्लियर संपन्न देश है और भूगोल के हिसाब से भी वो अमेरिका की ज़रूरत है. हालांकि इसके बावजूद रुबियो ने कहा कि अगर पाकिस्तान के साथ रिश्ते अच्छे रहे तो वॉशिंगटन इस्लामाबाद को रोक सकता है. यानी जयशंकर का मैसेज तो अमेरिकी प्रशासन को मिल गया है. 

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