बेंगलुरु में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम वाली जगह के पास से विस्फोटक बरामद होने की खबर सामने आई है. ये 'जिलेटिन' की छड़ थी जिसे कार्यक्रम वाली जगह के पास से बरामद किया गया है. पुलिस इस मामले की जांच कर रही है. ये विस्फोटक कगालिपुरा के पास एक आश्रम के नजदीक मिले हैं. ये आश्रम कार्यक्रम वाली जगह से लगभग 3 किलोमीटर दूर है. इसी जगह पर प्रधानमंत्री मोदी को बाद में एक कार्यक्रम में शामिल होना था.
PM मोदी के काफिले के रूट पर 'विस्फोटक' कहां से आया? कितना बड़ा था ये खतरा?
ये विस्फोटक कगालिपुरा के पास एक आश्रम के नजदीक मिले हैं. ये आश्रम कार्यक्रम वाली जगह से लगभग 3 किलोमीटर दूर है. इसी जगह पर प्रधानमंत्री को बाद में एक कार्यक्रम में शामिल होना था.


इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने बताया कि PM मोदी के आने से पहले रूटीन सुरक्षा जांच की जा रही थी. जांच के दौरान पुलिस कुछ संदिग्ध चीजें मिलीं. पुलिस ने कहा,
10 मई की सुबह PM के आने से पहले जांच के दौरान एक फुटपाथ के किनारे दो जिलेटिन की छड़ें मिलीं. यह जगह उस कार्यक्रम वाली जगह से लगभग 3 किलोमीटर दूर थी जहां PM मोदी को पहुंचना था. ये चीजें मिलते ही सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत उस इलाके को घेर लिया और जांच के लिए बम स्क्वाड और फोरेंसिक टीमों को तुरंत मौके पर भेजा गया.
पुलिस ने इस घटना की जांच शुरू कर दी है. फिलहाल इस मामले के सिलसिले में एक संदिग्ध से कड़ी पूछताछ कर रही है. जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि जिलेटिन की छड़ें उस इलाके तक कैसे पहुंचीं और क्या इनके मिलने के पीछे कोई बड़ी साजिश थी. क्योंकि जिलेटिन एक हाई ग्रेड का विस्फोटक होता है. इसका इस्तेमाल खदानों में पत्थर तोड़ने के लिए किया जाता है.
यह घटना तब सामने आई जब प्रधानमंत्री बेंगलुरु के बाहरी इलाके में मौजूद 'आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर' के दौरे पर आए थे. वहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. फाउंडेशन की स्थापना के 45 साल पूरे होने के मौके पर इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था.

प्रधानमंत्री की सुरक्षा का जिम्मा स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) के पास होता है. जहां भी पीएम का कार्यक्रम होता है, एसपीजी वहां पहले ही पहुंच कर सुरक्षा प्रोटोकॉल को पुख्ता करती है. एसपीजी लोकल पुलिस से लेकर इंटेलिजेंस तक सबसे संपर्क में रहती है. इससे पीएम को कई लेयर की सिक्योरिटी दी जाती है. साथ ही एसपीजी पूरे एरिया को सैनिटाइड करती है जिससे खतरे की कोई गुंजाइश न रहे. कार्यक्रम वाली जगह से मात्र 3 किलोमीटर पर जिलेटिन का मिलना अपने-आप में सवाल खड़े करता है. क्योंकि जिलेटिन कोई ऐसी चीज नहीं है जो किसी दुकान पर मिल जाए. जांच अधिकारियों ने अभी तक यह नहीं बताया है कि जिलेटिन की छड़ें इस इलाके में चल रही पत्थर-खनन वाले कामों से जुड़ी थीं, या उन्हें जान-बूझकर प्रधानमंत्री के आने वाले रास्ते या कार्यक्रम स्थल के पास रखा गया था.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जिलेटिन स्टिक सस्ते विस्फोटक पदार्थ होते हैं, जिनका इस्तेमाल खनन और निर्माण कामों में किया जाता है. इन्हें सड़क, रेलवे लाइन, सुरंग और बड़ी इमारतों के निर्माण जैसे कामों में चट्टान तोड़ने या ब्लास्टिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, ये अपने आप नहीं फटते. इन्हें विस्फोट करने के लिए डेटोनेटर की जरूरत होती है. भारत में जिलेटिन स्टिक बनाने का अधिकार सिर्फ लाइसेंस प्राप्त विस्फोटक कंपनियों को होता है. इनके निर्माण और इस्तेमाल की निगरानी पेट्रोलियम और एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (Petroleum and Explosives Safety Organisation- PESO) करती है, जिसे पहले ‘डिपार्टमेंट ऑफ एक्सप्लोसिव्स’ कहा जाता था.
इस संस्था की स्थापना 5 सितंबर 1898 को हुई थी. यह विस्फोटक, पेट्रोलियम और कंप्रेस्ड गैस जैसे खतरनाक पदार्थों की सुरक्षा और नियमों की देखरेख करने वाली भारत सरकार की प्रमुख एजेंसी है. जिलेटिन स्टिक भी इन्हीं नियंत्रित विस्फोटक पदार्थों में शामिल हैं.
वीडियो: कर्नाटक में आठ लोगों की जान लेने वाला ब्लास्टिंग जिलेटिन कैसे बनाया गया?






















