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बीबीसी हिंदी के हेड रहे, 40 साल पत्रकारिता की, संजीव श्रीवास्तव ने अब खोली कचौड़ी की दुकान

BBC Editor turns shopkeeper: संजीव श्रीवास्तव बचपन से ही कचौड़ी की दुकान खोलना चाहते थे. लेकिन करियर के सिलसिले में वो ज़्यादातर अपने होमटाउन जयपुर से बाहर रहे. अब उनके पास समय है तो उन्होंने बचपन की हसरत पूरी की. संजीव ने इस बारे में सब बताया है.

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BBC के इंडिया हेड संजीव श्रीवास्तव 40 साल पत्रकारिता में रहे

आप जीवनभर सिर्फ एक ही प्रोफेशन में काम करते रहें, ऐसा बिलकुल भी ज़रूरी नहीं है. उम्र के किसी भी पड़ाव में अपने मन का वो काम कर सकते हैं जो कभी किसी कारणवश न कर पाएं हों. इसकी बानगी पेश करते हैं BBC न्यूज़ कंपनी के पूर्व इंडिया हेड संजीव श्रीवास्तव. 40 साल पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने कुछ अलग करने का सोचा. हाल ही में उन्होंने जयपुर के बापूनगर इलाके में अपना एक कैफे खोला. नाम रखा 'THROWBACK DESI'. 

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अचानक बदलाव को देखकर लोगों के मन में सवाल उठे. सोशल मीडिया पर जब कैफे की तस्वीरें सामने आईं तो लोग कयास लगाने लगे. लंबे-लंबे पोस्ट लिखे. पूछा जाने लगा कि क्या वो किसी आर्थिक दिक्कत का सामना कर रहे हैं? आजतक से जुड़े देवांकुर से बातचीत में संजीव श्रीवास्तव बताते हैं,

मेरा बचपन से मन था कि मैं एक कचौड़ी की दुकान खोलूं. लेकिन तब समय नहीं था. अब मेरे पास समय है तो सोचा क्यों न वो करूं जो कभी करने का सोचा था.

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संजीव बचपन से ही खाने के शौक़ीन रहे हैं. उन्हें कचौड़ियां बेहद पसंद हैं, इसलिए कैफे में खासतौर पर कचौड़ियां मिलती हैं. लोगों के कयास को खारिज करते हुए उन्होंने कहा,

मुझपर भगवन की बड़ी कृपा रही है. मैंने किसी आर्थिक तंगी की वजह से कैफे नहीं खोला है, बस शौक की बात है. जीवन की सब हसरतें पूरी नहीं हो सकतीं, लेकिन जो सकतीं हैं, वो कर लेना चाहिए. मैं पत्रकार अब भी हूं. नई पुस्तक खोलने का मतलब ये नहीं है कि पुरानी पुस्तक बंद कर दी है. 

संजीव बताते हैं कि करियर के सिलसिले में वो ज्यादातर होम टाउन जयपुर से बाहर रहे. लेकिन अब उनके पास मौका है. इसी मौके को भुनाते हुए उन्होंने ये कैफे खोला. उनका कहना है कि वो इस कैफे को बहुत ज्यादा एक्सपैंड नहीं करेंगे.

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कौन हैं संजीव श्रीवास्तव?

साल 2006 से बीबीसी हिंदी के एडिटर रहे. उन्होंने बीबीसी के लिए इंटरनेट और रेडियो दोनों का काम संभाला. मुंबई में बीबीसी का पहला ब्यूरो इन्होंने ही शुरू किया था. जहां हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू तीनों भाषाओं में रिपोर्टिंग करते थे. बीबीसी से पहले उन्होंने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ और ‘इंडियन एक्सप्रेस’ जैसे बड़े अखबारों में बतौर रिपोर्टर काम किया. 

फिर साल 2009 में वे सहारा न्यूज मीडिया ग्रुप के एडिटर और CEO भी बने. 2011 में उन्होंने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ट्रस्ट के साथ मिलकर देशभर के पत्रकारों को ट्रेनिंग भी दी. 40 साल के करियर में उन्होंने भारत के 11 लोकसभा चुनाव और कई राज्यों के चुनावों को कवर किया है. इस बीच कई बड़े नेताओं, बॉलिवुड स्टार्स, बिजनेस टाइकून के इंटरव्यूज़ भी लिए.

वीडियो: बीबीसी न्यूज़ पर सरकार की कार्रवाई रिपोर्ट करने आए विदेशी पत्रकार इसे किसकी नज़र से देख रहे हैं.

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