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'बिलो रिप्लेसमेंट से भी नीचे गिरी भारत की फर्टिलिटी रेट', एलन मस्क की पोस्ट का मतलब क्या है?

Elon Musk ने एक डेटा शेयर किया है जो India के Declining Fertility Rate को दिखाता है. जब फर्टिलिटी लंबे समय तक इस स्तर से नीचे रहती है, तो आबादी के बढ़ने की दर धीरे-धीरे धीमी हो जाती है. ज्यादा नीचे हुई तो ये नेगेटिव भी हो सकती है. लंबे समय तक कम फर्टिलिटी रहने से आबादी में बुजुर्गों की संख्या बढ़ सकती है, काम करने वाले लोगों की संख्या घट सकती है.

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एलन मस्क ने भारत के फर्टिलिटी डेटा पर टिप्पणी की है (PHOTO-X)

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  • अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क ने कहा कि भारत की कुल प्रजनन दर 2024 की रिपोर्ट के अनुसार प्रति महिला 1.9 तक घट गई है, जो रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से नीचे है और यह पहली बार हुआ है।
  • भारत की घटती प्रजनन दर का कारण शिक्षा और सामाजिक ट्रेंड हैं, जिनमें अधिक पढ़े-लिखे लोग पिछले वर्षों से रिप्लेसमेंट स्तर से नीचे प्रजनन कर रहे हैं, जिससे आबादी के स्थिर स्तर पर असर पड़ रहा है।
  • इस कमी से भारत में जनसंख्या वृद्ध होती जाएगी और श्रम शक्ति घटेगी, जिससे भविष्य में पेंशन, हेल्थकेयर और सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों पर दबाव बढ़ने की संभावना है।

अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क ने भारत के बदलते डेमोग्राफिक ट्रेंड्स पर टिप्पणी की है. उन्होंने कहा कि भारत में लोगों के जन्म लेने की दर (बर्थ रेट) इतनी नीचे गिर चुकी है कि आबादी का मौजूदा स्तर बनाए रखना मुश्किल हो गया है. हाल ही में ‘एक्स’ पर भारत की फर्टिलिटी रेट से जुड़ा एक डेटा शेयर किया गया था. इसी पर टिप्पणी करते हुए एलन मस्क ने कहा कि भारत में घटती प्रजनन दर दुनिया के कई देशों में दिख रहे एक ट्रेंड को दिखाती है. यानी भारत ही नहीं बीते कुछ सालों में कई ऐसे देश हैं जहां प्रजनन दर गिरी है. 

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मस्क ने कहा कि देश की सबसे शिक्षित आबादी को देखें तो उनमें जन्म लेने की दर कई सालों पहले ही रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे गिर गई थी. साथ ही इस दौर में एक ट्रेंड भी चल रहा है जो लोगों को प्रजनन न करने के लिए प्रोत्साहित करता है. मस्क ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा,

भारत की जन्म दर Below Replacement यानी रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे गिर गई है. भारत में ही ज्यादा पढ़े-लिखे लोगों को देखें तो उनमें तो जन्म दर कई साल पहले ही रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे चली गई थी.

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एलन मस्क ने डेटा शेयर कर भारत के जन्म दर के गिरने की बात कही है (PHOTO-X)
Below Replacement क्या है?

बिलो रिप्लेसमेंट का मतलब किसी देश की आबादी के मौजूदा स्तर को बनाए रखने से जुड़ा है. जब किसी देश में बच्चे पैदा होने की कुल दर प्रति महिला 2.1 से कम होता है तो उसे बिलो रिप्लेसमेंट कहते हैं. इसमें अगली पीढ़ी में उतने बच्चे पैदा नहीं होते, जितनी मौजूदा पीढ़ी में आबादी होती है. जैसे- किसी महिला के दो बच्चे हैं. अगली पीढ़ी की आबादी में ये दो बच्चे मां और पिता की जगह लेते हैं, लेकिन अगर उनका एक ही बच्चा है तो मां और पिता में से एक की जगह तो भरती है लेकिन एक जगह खाली रह जाती है. यानी रिप्लेसमेंट पूरा नहीं हुआ. यानी मामला बिलो रिप्लेसमेंट का हो गया है. 

भारत की फर्टिलिटी रेट क्या है?

एलन मस्क ने जो डेटा शेयर किया है, वो UN Population Division के सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) का डेटा है. इस रिपोर्ट की मानें तो 2024 की SRS रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की फर्टिलिटी रेट पहली बार रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे आ गई है. रिपोर्ट में दिखाया गया है कि प्रति महिला टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR) 2.1 बच्चों से घटकर 1.9 बच्चों पर आ गई है.

फर्टिलिटी का रिप्लेसमेंट लेवल प्रति महिला 2.1 बच्चे तय किया गया है. ये रेट किसी आबादी के लिए बिना यहां से वहां माइग्रेशन के एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में खुद को बनाए रखने के लिए जरूरी स्तर माना जाता है लेकिन आंकड़े कहते हैं कि अधिकतर भारतीय राज्य अब इस बेंचमार्क से नीचे आ गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, भारत में केवल 6 राज्य ऐसे हैं जहां फर्टिलिटी रेट अभी भी रिप्लेसमेंट लेवल से ऊपर है. ये 6 राज्य बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड हैं.

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रिप्लेसमेंट फर्टिलिटी रेट क्या होता है?

डेमोग्राफी के जानकार प्रति महिला 2.1 बच्चों की 'टोटल फर्टिलिटी रेट' (TFR) को 'रिप्लेसमेंट लेवल' मानते हैं. ये वो दर होती है जो किसी आबादी को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक खुद को बनाए रखने के लिए जरूरी होती है, बशर्ते इस बीच कोई कोई माइग्रेशन न हो.

उनके मुताबिक जब फर्टिलिटी लंबे समय तक इस स्तर से नीचे रहती है, तो आबादी के बढ़ने की दर धीरे-धीरे धीमी हो जाती है. ज्यादा नीचे हुई तो ये नेगेटिव भी हो सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक कम फर्टिलिटी रहने से आबादी में बुजुर्गों की संख्या बढ़ सकती है, काम करने वाले लोगों की संख्या घट सकती है. नतीजा ये होता है कि पेंशन, हेल्थकेयर और सोशल वेलफेयर जैसी चीजों के लिए सिस्टम पर दबाव बढ़ सकता है.

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