धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से शनिवार, 25 जुलाई को इस्तीफा दे दिया. लेकिन इंडिया टुडे टीवी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि प्रधान ने छात्रों के बढ़ते विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पहले भी 2 बार इस्तीफा देने की पेशकश की थी. बावजूद इसके केंद्र सरकार ने उनके इस प्रस्ताव को नहीं स्वीकार किया. मोदी सरकार ने इस्तीफे के बदले सिस्टम से जुड़ी समस्याओं और शिक्षा में सुधारों पर ध्यान देने का फैसला किया था.
CJP के संसद मार्च वाले दिन भी इस्तीफा दे रहे थे धर्मेंद्र प्रधान, मोदी सरकार ने मंजूर क्यों नहीं किया?
Dharmendra Pradhan ने कथित तौर पर दो बार अपने पद से इस्तीफा देने की कोशिश की थी. लेकिन उनके इस्तीफे को मंजूरी नहीं मिली.

इंडिया टुडे से जुड़े पीयूष मिश्रा ने अपनी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि 20 जुलाई को छात्रों के ‘संसद मार्च’ वाले दिन भी सीनियर मंत्रियों की एक हाईलेवल मीटिंग हुई थी. मीटिंग में धर्मेंद्र प्रधान भी शामिल थे और इस दौरान भी उन्होंने अपने पद को छोड़ने की पेशकश की थी.
सरकार ने इस्तीफे से मना कियामीटिंग में प्रधान के इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली और सीनियर लीडर्स ने उनसे शिक्षा से जुड़े मामलों में सुधार करने को कहा. सरकारी सूत्रों ने यह भी बताया कि लीडर्स का ऐसा मानना था कि ‘मंत्री का इस्तीफा सबसे आसान ऑप्शन होता है. यह एक तरह से जिम्मेदारी से भागने और मुंह मोड़ने वाला होता है. इसके इतर नरेंद्र मोदी सरकार समस्याओं से भागने के बजाय उसे सुलझाने में विश्वास रखी है.’
ये बाजी पलटी कब?
सूत्रों के मुताबिक, सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी के बीच बैठकें शुरू हुईं लेकिन CJP के साथ दूसरी बैठक में सरकार का नजरिया इस्तीफे को लेकर बदल गया. दरअसल, CJP ने बैठकों में ये साफ कर दिया था कि अगर उनकी मांगों को नहीं माना गया तो वो 20 जुलाई की तरह ‘चलो संसद’ जैसा एक और बड़े पैमाने का मार्च और प्रदर्शन करेंगे. उन्होंने इसकी ‘चेतावनी’ दे दी थी.
सुरक्षा एजेंसियों ने भी चेतावनी दी20 मार्च के प्रदर्शन के दिन पुलिस की कार्रवाई के दौरान कई छात्रों के घायल होने के बाद से ही सरकार ‘परेशान’ थी. इसके इतर सुरक्षा एजेंसियों ने भी अपनी एक रिपोर्ट सौंपी. कथित तौर पर रिपोर्ट में चेतावनी थी कि राष्ट्र-विरोधी तत्व अशांति का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे थे. दरअसल, दिल्ली पुलिस ने शनिवार 25 जुलाई को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. इसमें बताया गया कि डिजिटल निगरानी में 400 से ज्यादा ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स के बारे में पता चला, जिनमें से करीब 100 इंस्टाग्राम अकाउंट्स पाकिस्तान से चलाए जा रहे थे. ये आकउंट्स छात्रों के विरोध- प्रदर्शन को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे थे.
दिल्ली पुलिस ने यह भी बताया कि इनमें से कई अकाउंट्स पहले ही ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के समय भी एक्टिव थे. कथित तौर पर ये अकाउंट्स ‘भारत-विरोधी बातें’, ‘गलत जानकारी’ और ‘भारतीय सुरक्षा बलों को निशाना बनाने वाले प्रोपेगैंडा’ भी फैला रहे थे. सूत्रों के मुताबिक, CJP और सरकार के बीच जब अंतिम दौर की बातचीत चल रही थी, तब सरकार इस फैसले पर पहुंच गई थी कि देशहित और कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है.
यह भी पढ़ें: चंदा चोरी की जांच के बीच अयोध्या नहीं छोड़ेंगे चंपत राय, 4 महीने की 'साधना' शुरू कर दी
इसलिए जंतर-मंतर और उसके आसपास के इलाकों में तनाव और प्रदर्शन को कम करने के लिए धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया. इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा एक्सेप्ट कर लिया. चंद घंटों के बाद मोदी कैबिनेट के मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया.
वीडियो: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बीजेपी नेताओं ने क्या कहा?












