दिल्ली में देशभर से युवा यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) की तैयारी करने आते हैं. किसी के पास महंगी कोचिंग है तो कोई छोटे-से कमरे में रहकर अपने सपनों को आकार देता है. लेकिन बिहार के दरभंगा से आए मोहम्मद मिनाज की कहानी इन सबसे अलग है. करीब डेढ़ साल से दिल्ली में रह रहे मिनाज के पास ना अपना कमरा है, ना किराए का ठिकाना. उनका बिस्तर 24 घंटे खुली रहने वाली एक लाइब्रेरी है और खाने का सहारा गुरुद्वारा.
गुरुद्वारे में खाना, लाइब्रेरी में सोना, मजनू के टीला पर नहाना... इस UPSC Aspirant की कहानी रुला देगी!
UPSC की तैयारी कर रहे मोहम्मद मिनाज गुरुद्वारा तक आना-जाना ऑटोरिक्शा से करते हैं, जिसमें 20 रुपये खर्च करते हैं. आने-जाने में भी उनका समय और पैसा खर्च होता है. इसलिए वे दिन में केवल एक बार खाना खाते हैं.

देश की राजधानी में IAS-IPS बनने का सपने लेकर आने वाले युवाओं की लिविंग कंडीशन जानने के लिए दी लल्लनटॉप की टीम वजीराबाद इलाके में पहुंची. इस दौरान बिहार से डेढ़ साल पहले दिल्ली आए मोहम्मद मिनाज मिले. बातचीत में उन्होंने वो कड़वा सच बताया, जिसका उनके जैसे ना जाने कितने एस्पिरेंट्स हर दिन, हर घंटे और हर सेकेंड सामना करते हैं.
10 KM दूर जाकर खाना खाते हैंमिनाज बताते हैं कि पढ़ाई के बाद वे लाइब्रेरी में ही कुर्सी पर पैर रखकर सो जाते हैं. कपड़े और जरूरी सामान लाइब्रेरी के लॉकर में रखते हैं. नहाने के लिए करीब 10 किलोमीटर दूर मजनू का टीला जाते हैं. वहीं एक गुरुद्वारे में खाना भी मिल जाता है. इसके बाद वापस लाइब्रेरी लौटकर पढ़ाई में जुट जाते हैं.
गुरुद्वारा तक आना-जाना वे ऑटोरिक्शा से करते हैं, जिसमें 20 रुपये खर्च करते हैं. आने-जाने में भी उनका समय और पैसा खर्च होता है. इसलिए वे दिन में केवल एक बार खाना खाते हैं. लाइब्रेरी की फीस और दूसरे जरूरी खर्च मिलाकर उनका महीने का खर्च करीब 3 हजार रुपये है. इसे पूरा करने के लिए वे GroMo App से ऑनलाइन बैंक अकाउंट खोलने जैसे छोटे-मोटे काम करते हैं. इससे महीने में कुछ हजार रुपये जुटा लेते हैं.
स्वामी विवेकानंद हैं आदर्शमिनाज के लिए UPSC सिर्फ नौकरी पाने का जरिया नहीं है. वे कहते हैं कि उनका सपना समाज के उन लोगों तक सरकारी योजनाओं का फायदा पहुंचाना है, जिन्हें इसकी सही जानकारी नहीं मिल पाती. वे स्वामी विवेकानंद को अपना आदर्श मानते हैं. मोहम्मद मिनाज कहते हैं,
“मैं स्वामी विवेकानंद को फॉलो करता हूं. मेरे हीरो स्वामी विवेकानंद हैं. मैं उन्हें ही फॉलो करता हूं. मैं अपनी जिंदगी उन्हीं की तरह गुजारना चाहता हूं. देश ही मेरा सब कुछ है. बस देश के, समाज देश के लोग ही मेरे सब कुछ हैं. क्योंकि मैंने स्वामी विवेकानंद की हर बुक को पढ़ा है. उनका एक विचार है कि एक ही विचार लो, उसी विचार को अपनी जिंदगी बना लो, उसी विचार में डूब जाओ, उसी विचार के सपने देखो, बाकी सारे विचार को त्याग दो. यही सफलता का सूत्र है. तो मैं एक ही विचार को फॉलो करके UPSC में लगा हुआ हूं. बाकी सफलता मिले या ना मिले. वो मेरे हाथ में नहीं है. लेकिन मेरे हाथ में मेहनत है, उससे कामयाबी इंशाअल्लाह मिल जाएगी…”
मोहम्मद मिनाज के माता-पिता की उम्र 70 साल से ज्यादा है. पिता बीमार रहते हैं और परिवार की आर्थिक हालत भी कमजोर है. बड़े भाई काम करके घर संभालते हैं, जबकि बहन भी अपनी पढ़ाई के साथ बच्चों को कोचिंग पढ़ाकर खर्च निकालती है.
यह भी पढ़ें: मोदी-जिनपिंग-पुतिन के बीच दिखा शख्स 'UPSC चैंपियन' निकला, एक-एक बात जानें
उन्होंने बताया कि बहनों की शादी करने की वजह से उनके परिवार पर कर्ज भी है. इन हालात के बावजूद मिनाज ने अपने माता-पिता को अपनी मुश्किलों के बारे में नहीं बताया. उनका कहना है कि वे नहीं चाहते कि उनकी वजह से बूढ़े मां-बाप और परेशान हों. मोहम्मद मिनाज आखिरी बातचीत में स्वामी विवेकानंद का एक विचार याद दिलाते हैं, “उठो जागो, तब तक मत रुको, जब तक तुम्हें लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाए.”
वीडियो: नीट के बाद अब UPSC Prelims 2026 पेपर लीक का आरोप










