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4 लोगों की फैमिली है, कितने का बीमा कवर जरूरी है? एक्सपर्ट ने सब समझाया

हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय महंगाई दर को भूलने की गलती कतई नहीं करनी चाहिए. 5 साल पहले जो हेल्थ बीमा पॉलिसी फिट बैठती थी, हो सकता है कि आज वह वैसी न लगे

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अस्पताल में भर्ती होने से पहले रूम के किराये की लिमिट के बारे में बीमा कंपनी से पता कर लें (फोटो क्रेडिट: India Today)

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  • हाल ही में मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट में बताया गया कि हेल्थ इंश्योरेंस कवर की जरूरत इस बात पर निर्भर करती है कि परिवार किस शहर में रहता है तथा उनकी मेडिकल हिस्ट्री क्या है।
  • इलाज के खर्च में तेजी से बढ़ोतरी और महंगाई के कारण हेल्थ इंश्योरेंस कवर की रकम समय के साथ जांचना और बढ़ाना जरूरी हो गया है ताकि बीमा पर्याप्त कवरेज दे सके।
  • बीमा खरीदते समय वेटिंग पीरियड, अस्पताल नेटवर्क, को-पेमेंट जैसी शर्तों की जानकारी लेना अनिवार्य है ताकि क्लेम प्रक्रिया में किसी प्रकार की कठिनाई से बचा जा सके।

पिछले कुछ सालों में इलाज का खर्च तेजी से बढ़ा है. दिल्ली, मुबई, बेंगलुरु, चेन्नई जैसे बड़े शहरों में तो और भी ज्यादा. ऐसे में कई लोगों के मन में ये बात चलती रहती है कि आखिर कितना बीमा कराया जाए जिससे परिवार के सदस्यों को जरूरत पड़ने पर इलाज कराया जा सके. महंगाई के दौर में 4 सदस्यों वाली फैमिली के लिए कितना बीमा जरूरी है? क्या 5 लाख का हेल्थ इंश्योरेंस कवर पर्याप्त है? क्या 10 लाख का बीमा कवर पर्याप्त है या 15-20 लाख का कवर लेना ज्यादा सुरक्षित रास्ता है? आइए इन्हीं सवालों के जवाब जानकारों की मदद से जानने की कोशिश करते हैं.

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इन बातों से तय करें हेल्थ बीमा कवर 

मनीकंट्रोल में छपी एक रिपोर्ट बताती है कि आपके परिवार के लिए कितना हेल्थ इंश्योरेंस कवर जरूरी है, वो इस बात पर निर्भर करता है कि आप कहां रहते हैं? अगर आप दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े शहरों में रहते हैं तो आपको ज्यादा बीमा कवर लेना जरूरी है. 

अगर आप छोटे शहरों में रहते हैं लेकिन आप किसी अस्पताल चेन में इलाज कराने की इच्छा रखते हैं तो भी आपको बीमा कवर बढ़ाना होगा. इसके अलावा अगर आपके परिवार की मेडिकल हिस्ट्री में किसी गंभीर बीमारी रही है तो भी आपको अपना हेल्थ इंश्योरेंस कवर आम लोगों के मुकाबले ज्यादा रखना चाहिए.

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हर किसी को अपने परिवार की जरूरतों के बारे में अच्छे से सोचकर हेल्थ बीमा कवर लेना चाहिए. चार सदस्यों वाली फैमिली, जिसमें दो बच्चे हैं, उनके बीमा कवर की जरूरत रिटायर हो चुके परिवार के सदस्यों से अलग होगी. जाहिए है कि अगर बच्चे अभी छोटे हैं तो उन्हें बार-बार अस्पताल में भर्ती होने की उम्मीद कम होगी. लेकिन रिटायरमेंट के बाद आयु से जुड़ी बीमारियां बढ़ने से इलाज का खर्च भी बढ़ेगा तो ज्यादा बीमा चाहिए होगा.

महंगाई दर को ध्यान में रखें 

हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय महंगाई दर को भूलने की गलती कतई नहीं करनी चाहिए. 5 साल पहले जो हेल्थ बीमा पॉलिसी फिट बैठती थी. हो सकता है कि आज वह वैसी न लगे. इलाज की बढ़ती महंगाई ने अस्पताल में इलाज के खर्च को लगातार बढ़ाया है. इसका मतलब है कि जो बीमा कवर आप पहले पर्याप्त समझते थे, वह अब शायद सिर्फ कामचलाऊ ही रह गया है. ऐसे में समय-समय पर अपने हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की समीक्षा करना अक्सर एक समझदारी भरा कदम होता है.

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इन शर्तों के बारे में पहले पता करें 

कई और बातें हैं जिन्हें हेल्थ बीमा का रिन्यूवल कराने या नया बीमा खरीदने से पहले समझनी बेहद जरूरी हैं. इंश्योरेंस एडवाइजर रमेश शर्मा का कहना है कि हेल्थ इंश्योरेंस पालिसी खरीदते समय वेटिंग पीरियड यानी कितने समय बाद अमुक बीमारी का कवर मिलेगा ये जरूर पता करें. कई बीमा कंपनियां एक निश्चित अवधि के बाद खास बीमारी का कवर मुहैया कराती हैं. अस्पताल के कमरे के किराए की सीमा, बीमा कंपनी के नेटवर्क में शामिल अस्पतालों की ठीक जांच कर लें. 

इसके अलावा को-पेमेंट यानी आपको कितना पैसा देना है. इलाज के खर्च का कुछ हिस्सा आपको अपनी जेब से देना होगा और बाकी बीमा कंपनी देगी. मान लीजिए अगर पॉलिसी में 20% को-पेमेंट है और अस्पताल का बिल 2 लाख रुपये आता है तो 40,000 आपको और 1.60 लाख रुपये बीमा कंपनी देगी. इन शर्तों के बारे में पहले से पता कर लेने से क्लेम पाने में किसी तरह की मुसीबत से बचा जा सकता है.

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