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सत्य निकेतन हादसा: पिता से कहा था, 'मुझ पर गर्व करेंगे...' उस बेटे के सपनों की अर्थी लेकर लौटा परिवार

Delhi Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में एक बिल्डिंग गिरने से 7 लोगों की मौत हो गई. मृतकों में से एक छात्र अक्षत का परिवार AIIMS पहुंचा. अक्षत के पिता ने बताया कि उसने मुझसे हादसे वाली रात से पहले ही बात की थी.

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सत्या निकेतन में बिल्डिंग गिरने से 7 लोगों की मौत हो गई. (फोटो-इंडिया टुडे)

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  • दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पीजी बिल्डिंग गिरने से 7 स्टूडेंट्स की मौत हुई और 40-50 स्टूडेंट्स दबे होने की आशंका है, जिसके बाद MCD ने चार मंजिला से ऊंचे गैर-कानूनी निर्माणों को सील करने का आदेश दिया।
  • माँग और सुरक्षा की दृष्टि से इमारतों की नियमित जांच न होने के कारण कई गैर-कानूनी और असुरक्षित संरचनाएं अस्तित्व में हैं, जिससे इस दुर्घटना जैसे हादसे होने का जोखिम बढ़ गया है।
  • इस घटना के बाद दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का निर्णय लिया गया है और इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए नगर निगम ने एक्टिव निरीक्षण और बंदिशें लागू करने की प्रक्रिया शुरू की है।

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक स्टूडेंट पीजी बिल्डिंग गिरने से 7 स्टूडेंट्स की मौत हो गई. आशंका है कि 40-50 स्टूडेंट्स अभी भी दबे हुए हैं. घटना के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) ने सख्त रुख अपनाया. चार मंजिल से ऊंचे सभी गैर-कानूनी निर्माण को सील करने का आदेश दिया. दोषी अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के की बात कही गई.

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मगर इस पूरी घटना में उन 7 बच्चों के परिवार का दुख कोई नहीं समझ सकता, जिन्होंने अपने बच्चों को खोया है. हादसे की जानकारी मिलने के बाद कई परिजन दिल्ली पहुंचे. उनमें से एक परिवार अक्षत सिंह यादव का भी है. इस हादसे में जान गंवाने वालों में अक्षत भी हैं. अक्षत मध्य प्रदेश के कटनी के रहने वाले थे. दिल्ली  यूनिवर्सिटी के PGDAV कॉलेज के सेकंड ईयर के स्टूडेंट थे. NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक के माता-पिता और बहन आज सुबह यानी 7 सितंबर को दिल्ली के AIIMS ट्रॉमा सेंटर पहुंचे. वहां उनके बेटे का शव था.

पढ़ाई में काफी अच्छे थे अक्षत

घटना के बाद से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है. उनके पिता का कहना है कि अक्षत पढ़ाई में काफी अच्छा था. वे कहता था,

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"पापा, एक दिन मैं अफसर बनूंगा और आपको मुझ पर गर्व होगा."

पिता ने बताया कि उसे किताबें पढ़ने का शौक था. जब भी उसके पास कुछ पैसे बचते, वह किताबें खरीदता था. वह प्रतियोगिताओं और क्विज कॉन्टेस्ट में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था. उसकी अपनी पढ़ाई, प्रतियोगिताओं और UPSC की तैयारी से जुड़े कई सपने थे.

अक्षत की मां ने बताया कि उनकी दो दिन पहले बेटे से वीडियो कॉल पर बात हुई थी. उन्हें नहीं पता था कि ये उनकी आखिरी बातचीत होगी. उन्होंने कहा,

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“जिस बच्चे को मैंने नौ महीने अपनी कोख में पाला, जिसे अपनी गोद में बड़ा किया, आज मैं उसका शव देख रही हूं. पहले हम चार लोग थे, अब हम सिर्फ तीन बचे हैं.”

अक्षत के परिवार ने बताया कि वह हाल ही में रक्षाबंधन पर घर आए थे. उनके पिता ने कुछ दिन और रुकने के लिए कहा था. लेकिन उन्होंने कहा कि टिकट बुक हो चुके हैं. दिल्ली लौटना पड़ेगा. उन्हें तलवारों का भी शौक था. उन्होंने हाल ही में 2500 रुपये की एक तलवार मंगवाई थी.

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पिता ने प्रशासन पर उठाए सवाल

अक्षत के पिता ने इस दुखद घटना को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि ऐसी इमारतों की नियमित रूप से जांच होनी चाहिए. ताकि वहां रहने या पढ़ने वाले छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. उन्होंने कहा,

"लोग इन इमारतों में अपने बच्चों को यह सोचकर भेजते हैं कि वे सुरक्षित हैं. हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारा बेटा वहां सुरक्षित नहीं होगा."

उन्होंने नेपाल त्रासदी का भी जिक्र किया. कहा कि जब तक कोई खुद ऐसा नुकसान न सहे, तब तक किसी दूसरे परिवार के दुख को समझना मुश्किल होता है. उन्होंने कहा कि अपने बेटे को खोने के बाद ही मैं किसी अपने को खोने का दर्द सच में समझ पाया हूं. 

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