दिल्ली के लाल किला के पास 10 नवंबर, 2025 को एक कार में बम धमाका हुआ. घटना में 13 लोगों की जान चली गई. अब इस घटना को आधार बनाकर साइबर ठगों ने एक सरकारी अफसर से लाखों वसूल लिए. आइए जानते हैं कि कैसे यह पूरा अपराध अंजाम दिया गया. दिल्ली के द्वारका सेक्टर-23 का एक घर है. यहां भारतीय रेल के रिटायर्ड कर्मचारी (उम्र 74 साल) और उनकी पत्नी रहती थीं. दोनों किसी रिश्तेदार की शादी में जाने के लिए तैयार हो रहे थे. शाम 4 बजे का वक़्त. एक फोन आता है. दूसरी तरफ से आवाज़ आती है, ‘हम NIA से हैं. लाल किला पर हमला आपने करवाया है.’ मगर ये कहानी का सिर्फ पहला हिस्सा था.
'लाल किला ब्लास्ट आरोपी को भेजे पैसे...' कहकर बनाया डिजिटल अरेस्ट, ठगे 30 लाख
Delhi Red Fort blast: दिल्ली में ठगों ने एक पूर्व सरकारी कर्मचारी को दिल्ली लाल किला ब्लास्ट का आरोपी बताकर उनसे 30 लाख रुपये वसूल लिए. पुलिस ने बताया कि यह डिजिटल अरेस्ट का मामला है. पुलिस मामले की पड़ताल कर रही है.

इंडियन एक्सप्रेस ने कहानी के दूसरे हिस्से पर फोकस किया है. वो कॉल NIA (नेशनल इंवेस्टगेशन एजेंसी) के किसी एजेंट का नहीं था बल्कि एक साइबर ठग का था. रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने बताया कि उस फोन कॉल के बाद दंपति को सात दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया. और उनसे 30 लाख रुपये वसूले गए. ये रकम उनकी बचत का हिस्सा था. अब दिल्ली पुलिस ने जांच शुरू की है और एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है.
‘यू आर अंडर अरेस्ट’पुलिस का कहना है कि ये एक क्लासिक केस है जिसमें ठग हाई प्रोफाइल क्राइम केस का हवाला देकर लोगों को लूटते हैं. पुलिस के मुताबिक, साइबर ठग ने पीड़ित को चुप रहने और किसी को इस केस के बारे में न बताने की धमकी दी थी. उस दिन कपल ने शादी अटेंड की. उसके बाद घर लौटे. फिर अगली सुबह एक आदमी ने उन्हें वीडियो कॉल किया. अपनी पहचान NIA एजेंट की बताई. उसके बाद एक और आदमी ने कॉल ज्वाइन की. उसने अपनी पहचान ATS (एंटी-टेररिज्म स्क्वाड) एजेंट बताई.
दिल्ली कार ब्लास्ट का मुख्य आरोपी उमर नबी है. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, ठगों ने पूर्व सरकारी कर्मचारी से कहा कि उनके अकाउंट से उमर नबी को पैसे ट्रांसफर किए गए थे. 25 नवंबर को एक नोटिस भी भेजा गया था. इस नोटिस में NIA, ATS और सुप्रीम कोर्ट का फर्जी लोगो लगा हुआ था. बताया गया कि कपल से एक एग्रीमेंट साइन करवाया गया, जिसके तहत उन्हें किसी से बात करने की अनुमति नहीं थी. एग्रीमेंट व्हाट्सऐप पर भेजा गया था.
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पुलिस ने कैसे भेदा ‘चक्रव्यूह’?पीड़ित दंपती के बच्चे दूसरे शहर में थे. उन्हें और उनकी पत्नी को 7 दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया. ठगों ने उनसे बैंक अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉज़िट (FD) और असेट की पूरी जानकारी ली. इस दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से उनपर 24 घंटे नज़र रखते रहे. फिर उनसे 15 लाख रुपये की पेमेंट कराई. पीड़ित ने 30 लाख की FD तोड़ी थी. अगले दिन बाकी 15 लाख भी ले लिए. बताया कि ये पैसे बैंक वेरीफाई करने के लिए लिए जा रहे.
इसके बाद 3 दिसंबर को ठगों ने उन्हें गवर्नर के स्टैम्प के साथ एक वेरिफिकेशन लेटर दिया. इसके बाद पुलिस ने केस की जानकारी मिलने के बाद काम शुरू हुआ. इंस्पेक्टर अरविंद और SI नवीन की टीम ने उस बैंक खाते को ट्रेस किया जिसमें पैसे भेजे गए. पता चला कि सुनील सिंगला नाम के शख्स पर अकाउंट रजिस्टर है, जो श्री बालाजी ट्रैक्टर कंपनी का मालिक है. सुनील ने बताया कि एक शख्स ने उसे अपना अकाउंट उधार देने के बदले अच्छे पैसे ऑफर किए थे. पुलिस ने सुनील सिंगला को हरियाणा के फतेहाबाद से गिरफ्तार कर लिया है. और अब तक 12 लाख रुपये वापस बरामद किए गए हैं.
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