क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में ही रहना पड़ेगा. यह बात दिल्ली हाईकोर्ट ने सोनम वांगचुक की पत्नी की उस अपील को ठुकराते हुए कही, जिसमें उन्हें किसी प्राइवेट हॉस्पिटल में शिफ्ट करने की मांग की गई थी. कोर्ट ने कहा कि सोनम की तबीयत को देखते हुए उन्हें अस्पताल के लिए ले जाना ‘मनमाना फैसला’ नहीं था. सोनम वांगचुक को शनिवार, 18 जुलाई के दिल्ली पुलिस हाई कोर्ट के ऑर्डर का हवाला देकर सफदरजंग अस्पताल में शिफ्ट कर दिया था. इसके बाद से ही उनकी पत्नी गीतांजलि जे आंगमो उनको (सोनम) किसी प्राइवेट हॉस्पिटल में शिफ्ट करने की मांग कर रही थीं.
सफदरजंग में ही होगा सोनम वांगचुक का इलाज, गीतांजलि की अपील खारिज कर कोर्ट ने क्या कहा?
Delhi High Court ने सोनम वांगचुक की पत्नी के उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने सोनम को प्राइवेट हॉस्पिटल में शिफ्ट करने की मांग की थी.


दरअसल, गीतांजलि जे आंगमो ने हाईकोर्ट में अपील की थी कि सोनम को सफदरजंग से छुट्टी देकर मेदांता हॉस्पिटल में शिफ्ट किया जाए. क्योंकि, नागरिक को अपनी पसंद से इलाज कराने की इजाजत है. इस अपील पर रविवार, 19 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस मिनी पुष्करणा की बेंच ने सुनवाई की. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, गीतांजलि की इस अपील पर कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया.
केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और अस्पताल प्रशासन को नोटिसकोर्ट ने कहा कि वांगचुक न तो हिरासत में हैं और न ही उनके साथ जबरदस्ती इलाज किया जा रहा है. साथ ही केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और अस्पताल प्रशासन को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर इस केस पर जवाब मांगा गया है. कोर्ट ने दोनों पक्षों की बातें सुनीं. सफदरजंग अस्पताल और एम्स के डॉक्टरों ने भी कोर्ट को सोनम वांगचुक की सेहत के बारे में जानकारी दी. कोर्ट ने कहा कि वांगचुक करीब 17 से 18 दिनों से भूख हड़ताल पर थे. इससे पहले 16 जुलाई को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच भी उनकी सेहत को लेकर चिंता जता चुकी थी.
सरकार ने कोर्ट को बताया कि उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी. मेडिकल रिपोर्ट में ब्लड शुगर और पोटेशियम का लेवल कम बताया गया था. पोटेशियम को लेकर डॉक्टरों ने गंभीर चिंता जताई थी. एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने कोर्ट को बताया कि सोनम वांगचुक के लंबे समय तक भूखे रहने और उमस भरे मौसम की वजह से उनके शरीर में पानी की कमी और कीटोसिस (खाना न मिलने पर फैट गलना) की समस्या हो सकती थी. कोर्ट ने कहा,
सरकार ने सोनम वांगचुक की सेहत को देखते हुए उन्हें अस्पताल ले जाने का फैसला किया है. ऐसे में हमें नहीं लगता कि यह फैसला मनमाने तरीके से लिया गया है. हर जिंदगी की कीमत है और उसकी सुरक्षा जरूरी है.
वांगचुक की ओर से कोर्ट में पेश हुए सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि उनके मुवक्किल न तो गिरफ्तार हैं और न ही किसी मामले में हिरासत में हैं. ऐसे में सरकार उन्हें सरकारी अस्पताल में रहने के लिए मजबूर कैसे कर सकती है? सिब्बल ने आगे कहा कि कि वांगचुक को अपनी पसंद के डॉक्टर और अस्पताल चुनने का पूरा अधिकार है. उन्होंने ये भी सुझाव दिया कि अगर सरकार चाहती है तो सरकारी डॉक्टर मेदांता अस्पताल में भी उनकी निगरानी कर सकते हैं.
इस पर हाईकोर्ट ने भी कहा कि वांगचुक हिरासत में नहीं हैं और वो एक आजाद नागरिक हैं. उन्होंने खुद से किसी अस्पताल में भर्ती होने का फैसला नहीं किया. उनकी मेडिकल हालत को देखते हुए सरकार उन्हें अस्पताल ले जा सकती थी. हाईकोर्ट ने इस दलील को भी नहीं माना कि सोनम वांगचुक के अपने शरीर से जुड़े फैसले लेने के अधिकार का उल्लंघन हुआ है. अदालत ने कहा कि सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टर उनकी सहमति से ही इलाज कर रहे हैं. उन्हें जबरन कोई दवा या इलाज नहीं दिया गया इसलिए ये नहीं कहा जा सकता कि उनके साथ जबरदस्ती मेडिकल ट्रीटमेंट किया जा रहा है.
कोर्ट ने परिवार से मिलने को लेकर भी सरकार की बात रिकॉर्ड में ली. अदालत ने कहा कि वांगचुक की पत्नी किसी भी समय उनसे मिल सकती हैं. परिवार के दूसरे लोगों को भी मिलने की इजाजत है. यहां तक कि सामान्य विजिटिंग आवर्स से ज्यादा सुविधा दी गई है. कुछ परिवार के सदस्य उनके साथ अस्पताल में भी रह सकते हैं.
हालांकि, गीतांजलि आंगमो ने अदालत में अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट पर सवाल उठाए. उन्होंने सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर दूसरी मेडिकल राय इसलिए मांगी, क्योंकि उनके पोटैशियम लेवल को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट सामने आई थीं. आंगमो ने कोर्ट से कहा कि मेदांता अस्पताल वांगचुक को भर्ती करने के लिए तैयार है. अगर जरूरत पड़ी तो, वह उन्हें अपनी जिम्मेदारी पर अस्पताल से डिस्चार्ज कराकर वहां ले जाएंगी.
परिवार को मिलने की इजाजतउन्होंने यह आरोप भी लगाया कि अस्पताल में पुलिसकर्मी लगातार वांगचुक के आसपास रहते हैं. जब वह उनसे मिलने जाती हैं तो पुलिस बातचीत भी सुनती है. कपिल सिब्बल ने भी अदालत के सामने यही बात रखी. दूसरी तरफ सरकार की तरफ से ASG ने कहा कि स्थिति सामान्य नहीं हैं. उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में बेहद सावधानी बरतनी पड़ रही है. क्योंकि, अगर वांगचुक की तबीयत में कोई बड़ी दिक्कत आती है, तो उसके गंभीर असर होंगे.
सोनम की तबीयत के बारे में सफदरजंग अस्पताल की मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ने कोर्ट को बताया कि वांगचुक ने शुरुआत से ही डॉक्टरों पर भरोसा नहीं जताया. उन्होंने कई जरूरी इलाज लेने से भी इनकार किया और कहा कि मुझे तुम लोगों पर भरोसा नहीं. सरकार की तरफ से कोर्ट में कहा कि कोर्ट वांगचुक को डॉक्टरों के साथ सहयोग करने को कहे. इस पर कोर्ट ने पहले कहा कि उन्हें डॉक्टरों के जरूरी इलाज में सहयोग करना चाहिए. लेकिन कपिल सिब्बल ने इस पर आपत्ति जताई.
इसके बाद कोर्ट ने साफ किया कि वो किसी तरह का जबरन इलाज कराने का आदेश नहीं दे रही है. अंतिम फैसला मेडिकल टीम करेगी और इलाज मेडिकल प्रोटोकॉल के मुताबिक होगा. सुनवाई के आखिर में हाईकोर्ट ने कहा कि फिलहाल किसी अंतरिम आदेश की जरूरत नहीं है. शरीर के मेडिकल पैरामीटर हर समय एक जैसे नहीं रहते. इसलिए पूरे मेडिकल हालात को एक साथ देखकर फैसला लेना होगा. मामले पर अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी.
वीडियो: सोनम वांगचुक के साथ अस्पताल में क्या-क्या हुआ?











