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CJP Protest ने दिलाई BHU और जामिया की याद, जब 'पुलिसिया कहर' ने झकझोरा था पूरे देश को!

CJP Protest ने छात्रों के खिलाफ पुलिस की बर्बरता की पुरानी घटनाओं को एक बार फिर ताजा कर दिया. 2017 में BHU की छात्राएं तो 2019 में जामिया और AMU के छात्र पुलिस की कथित ज्यादतियों का शिकार बने थे.

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दिल्ली पुलिस पर जामिया की लाइब्रेरी में घुसकर छात्रों को मारने के आरोप लगे थे. (ITG)

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  • 20 जुलाई 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों छात्र कॉकरोच जनता पार्टी के 'चलो संसद' मार्च में शामिल हुए, जहां पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
  • छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बार-बार टकराव होता रहा है, जिसके कारण सुरक्षा बलों को क्रमिक दमनात्मक कार्रवाई करनी पड़ी।
  • दिल्ली पुलिस पर छात्रों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगने के बाद, इस घटना ने देश भर के विश्वविद्यालयों में छात्रों के प्रदर्शन और पुलिसिया कार्रवाई के बीच तनाव को बढ़ावा दिया है।

संविधान का आर्टिकल 19. भारतीय संविधान का एक मूल अधिकार, जो देश के नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का हक देता है. जब प्रोटेस्ट होता है, तो सरकार के लिए सुरक्षा व्यवस्था संभालना एक अलग चुनौती बन जाती है. कई बार प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच टकराव हो जाता है. फिर लाठीचार्ज और आंसू गैस का सिलसिला शुरू हो जाता है. CJP प्रोटेस्ट में भी यही हुआ. आरोप लगे कि छात्रों पर दिल्ली पुलिस ने बड़ी ज्यादती की. इस प्रोटेस्ट ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स के खिलाफ पुलिस की पिछली कथित बर्बरता भी याद दिला दी.

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20 जुलाई 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी छात्र इकट्ठा हुए. उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'चलो संसद' मार्च में हिस्सा लिया. दिल्ली पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका. प्रोटेस्टर्स नई दिल्ली के अलग-अलग इलाको में प्रदर्शन करने लगे. प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए सुरक्षाबलों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे.

प्रदर्शन से जुड़े कई फोटो-वीडियो सामने आ रहे हैं. दिल्ली पुलिस पर छात्रों के खिलाफ गैर-जरूरी एक्शन लेने के आरोप लग रहे हैं. इल्जाम है कि पुलिस वालों ने ना महिला देखी, ना पुरुष, ना बच्चे देखे, ना बूढ़े, जो सामने दिखा, उस पर लाठियां भांजी. पुलिस पर छात्रों के खिलाफ बर्बरता ढहाने का आरोप है. कथित तौर पर पुलिस ने निरंकुशता के साथ प्रोटेस्ट को दबाने की कोशिश की.

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दिल्ली की इस घटना ने उन पुरानी घटनाओं की भी याद दिला दी, जब छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर प्रोटेस्ट किया और बदले में उन्हें पुलिस की लाठियां मिलीं. देश की बड़ी-बड़ी और टॉप यूनिवर्सिटीज के छात्रों को पुलिस की कथित बर्बरता झेलनी पड़ी.

2016 - हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी

हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी (HCU) के पीएचडी छात्र रोहित वेमुला के सुसाइड ने छात्रों को गुस्से से भर दिया. दावा था कि दलित होने के नाते रोहित वेमुला को सुसाइड के उकसाया गया. छात्रों ने जगह-जगह विरोध-प्रदर्शन किए. रोहित वेमुला सुसाइड केस में छात्रों के निशाने पर यूनिवर्सिटी के तत्कालीन वाइस चांसलर (VC) पी अप्पा राव थे.

मामले ने तूल पकड़ा तो पी अप्पा राव छुट्टी पर चले गए. दो महीने बाद वापस आ गए. छात्र भड़क गए. उनकी आमद के खिलाफ बगावत शुरू कर दी. जबरदस्त प्रोटेस्ट हुआ. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोप है कि पुलिस ने छात्रों का प्रदर्शन दबाने के लिए लाठीचार्ज का सहारा लिया. दो फैकल्टी मेंबर्स और 25 छात्रों को गिरफ्तार किया गया, जिन्हें बाद में जमानत मिल गई.

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2016 - जब दिल्ली पुलिस ने छात्राओं को पीटा

रोहित वेमुला सुसाइड केस की आंच देश की राजधानी दिल्ली में भी पहुंची. 2016 में दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू (JNU) के छात्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया. इस बीच, कुछ ऐसे फुटेज सामने आए, जिसमें दिल्ली पुलिस के जवान महिला स्टूडेंट्स समेत अन्य छात्रों को पीटते दिखे. इसने दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए. दिल्ली पुलिस का कथित तौर पर छात्राओं को पीटने का वीडियो नीचे देखिए.

2017 - BHU छात्राओं पर पुलिस का लाठीचार्ज

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की एक छात्रा ने बाइक सवार तीन व्यक्तियों पर गाली-गलौज और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया. छात्राओं का गुस्सा तब भड़का जब अधिकारियों ने यौन उत्पीड़न की घटना को 'ईव-टीजिंग' बताया. पीड़िता ने शिकायत की कि कुछ ही मीटर की दूरी पर एक सिक्योरिटी गार्ड मौजूद था, लेकिन उसने आरोपियों को पकड़ने के लिए कुछ नहीं किया.

महिला महाविद्यालय की छात्राओं ने यह मामला हॉस्टल की वार्डन के सामने भी रखा. उल्टा वार्डन ने घटना के लिए लड़की को ही दोषी ठहराया. आरोप है कि वार्डन ने लड़की से पूछा कि वह शाम को इतनी देर से क्यों लौटी. छात्राओं ने इसके विरोध में प्रोटेस्ट किया.

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BHU छात्राओं का साइलेंट मार्च. (X)

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, वार्डन के बर्ताव से नाराज छात्राओं ने प्रदर्शन शुरू कर दिया. जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी दौरे पर आए, तो छात्राओं ने मार्च निकाला और विरोध दर्ज कराया. आरोप है कि अगले दिन पुलिस छात्रों पर फोर्स का इस्तेमाल किया. बाद में छात्रों ने पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ 'साइलेंट मार्च' भी निकाला.

2019 - जामिया की लाइब्रेरी में पुलिस की बर्बरता

2019 में सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट (CAA), 2019 और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (NRC) के खिलाफ देश भर की कई यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन हुए. दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी (JMI) के छात्र भी प्रोटेस्ट कर रहे थे.

आरोप है कि दिल्ली पुलिस एंटी-CAA/NRC प्रोटेस्ट को दबाने के लिए जामिया कैंपस में दाखिल हुई, और मासूम छात्रों को लाठी-डंडों से पीटा. CCTV फुटेज सामने आए, जिसमें दिल्ली पुलिस के जवान जामिया की लाइब्रेरी में पढ़ते बच्चों को पीटते नजर आए. लाइब्रेरी में तोड़फोड़ भी की. यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल उठाए थे. पुलिस की बर्बरता ने कई छात्रों को बुरी तरह घायल कर दिया था. किसी के हाथ टूटे, तो किसी के पैर, तो किसी की आंख में चोट आई.

2019 - AMU में पुलिस का क्रैकडाउन

जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों पर पुलिस की ज्यादती की खबर मिलते ही उत्तर प्रदेश की अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में माहौल हिंसक हो गया. जामिया की घटना से नाराज छात्रों ने AMU में प्रदर्शन चालू कर दिया. पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, मॉरिसन कोर्ट हॉस्टल के एक छात्र ने बताया कि उसके भाई को रात करीब 11 बजे हॉस्टल के कमरे से ले जाया गया. उसने कहा,

"पुलिसवालों के एक ग्रुप ने सिक्योरिटी गार्ड की पिटाई करने के बाद जबरदस्ती हॉस्टल में घुसकर कमरा नंबर 46 की खिड़की का शीशा तोड़कर आंसू गैस का गोला फेंका, जिससे कमरा धुएं से भर गया."

उसने आगे कहा,

"मेरे भाई और वहां मौजूद तीन अन्य लोगों को भागना पड़ा, लेकिन पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया, पीटा और अपने साथ ले गई."

यह भी पढ़ें: लाठीचार्ज के वीडियो देखने का टाइम नहीं... छात्रों की पिटाई पर सुनवाई से CJI सूर्यकांत का इनकार

उसने यूनिवर्सिटी अधिकारियों से भाई का पता लगाने की भी अपील की थी. मामले पर हॉस्टल के जनरल वार्डन डॉ. मोहम्मद तलहा ने घटना की पुष्टि की थी और एक न्यूज एजेंसी को बताया था कि यूनिवर्सिटी प्रशासन को हॉस्टल में हुई घटना और पुलिस द्वारा ले जाए गए लोगों के बारे में बता दिया गया है.

वीडियो: जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट के दौरान नसीरुद्दीन शाह का मैसेज

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