धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार, 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया. जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के मंच से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के फाउंडर अभिजीत दिपके ने भी छात्रों की ‘जीत’ का ऐलान कर दिया. इस बीच एक जिस चीज की ओर लोगों का ध्यान गया वो ये था कि आंदोलन की जीत के बाद अपने पहले संबोधन में अभिजीत दिपके ने उस शख्स का नाम नहीं लिया, जिसकी भूख हड़ताल ने इस प्रोटेस्ट को एक बड़े आंदोलन में बदल दिया. दिपके के सोनम वांगचुक को ‘आभार’ न जताने की बात को सोशल मीडिया ने नोट किया है. कई लोगों ने इस पर टिप्पणी भी की है. कुछ लोगों ने सलाह दी है कि अभिजीत को अस्पताल जाकर वांगचुक का आभार जताना चाहिए.
‘सोनम वांगचुक का क्रेडिट भी गटक जाएंगे’ 'विक्ट्री स्पीच' के बाद अभिजीत दिपके क्यों घिर गए?
दिल्ली के जंतर मंतर से छात्रों के जीत का ऐलान करते हुए CJP के फाउंडर Abhijeet Dipke ने Climate Activist और Educationist Sonam Wangchuk को Thank You नहीं कहा.

हालांकि, अपने भाषण में अभिजीत दिपके ने ये जरूर साफ किया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उन्हें ‘हीरो’ बनाने से बचा जाए क्योंकि ‘यही वो चीज है, जिससे देश बर्बाद हुआ है.’
सोनम वांगचुक के प्रोटेस्ट से भड़का आंदोलन
सोनम वांगचुक 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे. करीब 26 दिनों तक चली भूख हड़ताल के बाद सोनम ने 22 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और जितेंद्र सिंह के आग्रह पर अपना अनशन खत्म किया. बावजूद इसके CJP फाउंडर दिपके की ओर से जीत के ऐलान में वांगचुक का नाम न लिया जाना लोगों को खटक रहा है. ‘नासमझ बेचारा’ नाम के ‘एक्स’ अकाउंट पर लिखा गया,
क्या अभिजीत दिपके ने सोनम वांगचुक को एक बार भी धन्यवाद दिया है? सिर्फ इसलिए कि काम हो गया, वह अब उन्हें पहचानते नहीं हैं. जिस आदमी की पीठ पर बैठकर वो हीरो बनने का नाटक कर रहे हैं, क्या उसे भी क्रेडिट दिया जाएगा? या जैसे वह कचौरी खाते हैं, वैसे ही सोनम का क्रेडिट भी गटक जाएंगे?

@SouleFacts नाम के यूजर ने लिखा कि ऐसा लगता है कि ‘अभिजीत दिपके और CJP में बहुत ज्यादा अहंकार आ गया है. सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल की वजह से ही इस आंदोलन को देश भर में पहचान और गति मिली थी. फिर भी, अब वे इसका सारा क्रेडिट खुद लेने की कोशिश कर रहे हैं. और तो और. हैरानी की बात ये है कि उन्होंने सोनम वांगचुक का जिक्र तक नहीं किया. जिस व्यक्ति के त्याग ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई, उन्हें ही पूरी तरह से नज़रअंदाज़ कर दिया गया है.’
राम मोहन नाम के यूजर ने सुझाव दिया कि अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को सोनम वांगचुक से मिलने के लिए मेदांता अस्पताल जाना चाहिए और आभार जताना चाहिए.

बता दें कि शनिवार, 25 जुलाई को दिपके ने दिल्ली के जंतर मंतर से जीत का ऐलान किया. इससे कुछ समय पहले ही धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे की घोषणा की थी. इस दौरान दिपके मंच से प्रदर्शनकारियों को संबोधित कर रहे थे, लेकिन अपने छोटे से ही भाषण में दिपके सोनम वांगचुक का कोई जिक्र नहीं किया.

भाषण के दौरान दिपके ने एक बात पर जोर देते हुए कहा कि लोगों को किसी भी एक शख्स को ‘हीरो’ बनाने से बचना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें (दिपके) भी हीरो नहीं बनाया जाना चाहिए. दिपके ने आगे कहा,
डरने की जरूरत नहींमैं एक बहुत ही जरूरी बात कहना चाहता हूं. मुझे हीरो मत बनाइए क्योंकि आज धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है. यही गलती मत कीजिए. देश इसलिए बर्बाद हुआ है क्योंकि हम किसी एक व्यक्ति को हीरो बनाते रहे हैं.
दिपके ने आगे कहा कि ‘धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस बात का सबूत है कि अगर आप लोग डरते नहीं है, अगर आप सरकार के सामने झुकते नहीं हैं, तो आप किसी का भी इस्तीफा दिलवा सकते हैं. डरने की कोई जरूरत नहीं है. यह लोकतंत्र है.’
अपने इस भाषण में दिपके ने एक बार भी सोनम वांगचुक का जिक्र नहीं किया. यह बात लोगों को इसलिए भी खटक रही है क्योंकि लद्दाख के इस एक्टिविस्ट ने करीब 26 दिनों तक दिल्ली की तपती धूप, गर्मी, आंधी-तूफान और बारिश में भी अपना अनशन जारी रखा. भूख हड़ताल की वजह से सोनम का करीब 11 किलो वजन कम हो गया.

अभी भी सोनम वांगचुक गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में ICU में भर्ती हैं. सोनम का अनशन खत्म करना भी राजनीतिक और लोगों के बहस का एक मुद्दा बन गया था. उन हालातों पर भी सवाल खड़े किए जाने लगे, जिसमें उन्होंने अपने अनशन को खत्म किया था. इसके बाद सोनम की पत्नी गीतांजलि जे आंगमो उनके सपोर्ट में आईं. गीतांजलि ने आलोचकों को उनके त्याग और समर्पण को याद रखने की अपील की.

जंतर मंतर पर ये प्रदर्शन 6 जून को शुरू हुआ, जब दिपके अमेरिका से लौटे थे. उस समय दिपके के साथ सौरभ दास, आशुतोष रांका और विजेता दहिया (CJP के पूर्व प्रवक्ता) जैसे कुछ और लोग उनके सपोर्ट में थे. लेकिन इन सबके अलावा एक और शख्स उनके साथ खड़ा हुआ. सोनम वांगचुक. CJP और छात्रों के इस विरोध प्रदर्शन में सोनम वांगचुक ने बढ़ चढ़कर भाग लिया. प्रदर्शन के शुरुआती दिनों में जंतर मंतर पर भीड़ कम थी. बाद में 28 जून से सोनम भूख हड़ताल पर बैठ गए. 18 जुलाई को हाई कोर्ट का हवाला देकर दिल्ली पुलिस ने ‘सोनम को जबरन सफेद चादरों में उठाकर’ सफदरजंग अस्पताल में शिफ्ट कर दिया था.

इसके बाद आंदोलन अपने चरम पर पहुंचा और देशभर से छात्रों ने जंतर मंतर पर कूच कर दिया. 20 जुलाई को ‘संसद मार्च’ का कॉल था. मार्च में पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स ने छात्रों पर जरूरत से ज्यादा बल का प्रयोग किया, लेकिन आंदोलन थमा नहीं. CJP छात्रों के साथ वापस जंतर मंतर पर डट गई.

सोनम भी लगातार छात्रों की हौसला अफजाई कर रहे थे. उन्होंने अस्पताल में शिफ्ट होने के बाद भी अपना अनशन जारी रखा. उनकी पत्नी गीतांजलि ने भी आंदोलन का मोर्चा संभाला. वो सोनम को प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट कराने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंच गईं. इन सबके बावजूद छात्रों के जीत के ऐलान में अभिजीत दिपके का सोनम वांगुचक का नाम न लेना. सोनम को ‘थैंक्यू’ न कहना, लोगों को खटक रहा है.
वीडियो: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा कब दिया?













