राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा मंजूर होने के बाद चंपत राय ने पहली बार चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट करके कहा कि दान चोरी को लेकर उन पर अनर्गल आरोप लगाए जा रहे हैं. जब SIT की फाइनल रिपोर्ट आ जाएगी, उसके बाद उनके बारे में फैलाए जा रहे एक-एक आरोपों पर वह जवाब देंगे.
राम मंदिर चंदा चोरी: चंपत राय ने SBI बैंक की पोल खोल दी
चिट्ठी में चंपत राय ने दान पात्रों में पैसों की गिनती और बैंक में जमा होने की जिम्मेदारी से खुद को अलग किया है. उन्होंने कहा कि बैंक के साथ जो MoU (दिशानिर्देश पत्र) साइन हुआ था, उसमें उनके साइन ही नहीं हैं.


इस पोस्ट के कुछ समय बाद ही चंपत राय की एक जवाबी चिट्ठी वायरल हो गई, जो उन्होंने SIT को भेजी थी. इस चिट्ठी में राय ने दान की गिनती में गड़बड़ी के लिए अनिल मिश्रा और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को जिम्मेदार ठहराया है.
इंडिया टुडे से जुड़े कुमार अभिषेक की रिपोर्ट के अनुसार, लीक चिट्ठी में चंपत राय ने दान पात्रों में पैसों की गिनती और बैंक में जमा होने की जिम्मेदारी से खुद को अलग किया है. उन्होंने कहा कि बैंक के साथ जो MoU (दिशानिर्देश पत्र) साइन हुआ था, उसमें उनके साइन ही नहीं हैं. बैंक के अधिकारियों के साथ मिलकर कैसे नोट गिनने की प्रक्रिया में फेरबदल किया गया, कैसे उसकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया गया, उन्हें इसकी जानकारी भी नहीं है. वह इस पूरे प्रॉसेस का हिस्सा नहीं थे.
इशारों में चंपत राय ने चढ़ावा चोरी और दान पात्र की गड़बड़ियों को अनिल मिश्रा के मत्थे डाल दिया. क्योंकि बैंक के साथ हुए MoU के सिग्नेटरी अनिल मिश्रा ही हैं और चंपत राय को इसकी जानकारी भी नहीं थी. चंपत राय ने दावा किया कि SIT की रिपोर्ट में 6 फरवरी 2025 के जिस दिशानिर्देश पत्र (MoU) का हवाला दिया जा रहा है, उस पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं. उन्हें इस पत्र की जानकारी 13 जून 2026 को हुई. इस MoU पर न्यासी डॉ. अनिल मिश्र और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अयोध्या शाखा के मुख्य प्रबंधक गोविंद मिश्र के हस्ताक्षर हैं.
चंपत राय ने कहा कि अगस्त 2020 से लेकर जून 2026 तक ट्रस्ट को लेकर जितने भी कॉन्ट्रैक्ट हुए, उन सभी पर केवल उनके (चंपत राय) और संबंधित दूसरे पक्ष के प्रमुख अधिकारी के हस्ताक्षर हैं. लेकिन इस MoU पर उनके हस्ताक्षर नहीं कराए गए. राय ने बैंक पर भी आरोप लगाया कि उसने सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया. गणना में लगे कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाले कपड़ों का उपयोग नहीं किया गया. साथ ही अन्य सुरक्षा नियमों की भी अनदेखी की गई.
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चिट्ठी में चंपत राय ने कहा कि बैंक के साथ 9 फरवरी 2024 को एक MoU लिखा गया था. उसके हर पेज पर उनके साइन हैं. इस MoU में सुरक्षा के सभी उपाय किए गए थे. जैसे गणना कक्ष में CCTV कैमरे और दरवाजे पर लोहे की सलाखों वाला दरवाजा लगाया गया. लेकिन इन नियमों को जमीन पर नहीं उतारा गया. राय ने कहा कि कुर्सी पर बैठकर और मेज पर रखकर पैसों की गिनती की सलाह बैंक की थी. यही चोरी में मददगार बनी. ये घटना होने के बाद गणना कक्ष से मेज तत्काल हटाई गई और जमीन पर बैठकर दान की गिनती होने लगी.
राय ने कहा कि देश के सभी बैंकों में चेस्ट रूम के कुछ नियम अवश्य होंगे. स्टेट बैंक के नियम तो कठोर होंगे. अंदर जाते समय और गणना कक्ष से बाहर आते समय विशेष तलाशी, बिना जेब के कपड़े आदि का पालन बैंक ने नहीं कराया. बैंक ने कर्मचारियों को सबसे पहले जो कपड़े दिए, उसमें जेब थी. अब ये बैंक के वरिष्ठ अधिकारी बताएंगे कि चेस्ट रूम के नियमों के पालन में ढिलाई कैसे हो गई.
चंपत राय ने बैंक की ओर से गिनती के लिए 'हाउसकीपिंग स्टाफ' को नियुक्त करने पर भी कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने इसे अनुचित बताया. उन्होंने आशंका जताई कि बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों को इन दिशानिर्देशों या नियमों के उल्लंघन की जानकारी नहीं है या फिर नियमों की जानबूझकर अनदेखी की गई. चंपत राय ने अब बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों से इस मामले में स्पष्टीकरण की मांग की है.
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