समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने अपने चाचा राम गोपाल यादव के साथ जिस दूसरे शख्स को राज्यसभा भेजा है, वो कोई और नहीं बल्कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के ग्रुप प्रेसिडेंट धनराज परिमल नाथवानी है. सपा में वाइल्ड कार्ड एंट्री के जरिए राज्यसभा तक पहुंचने की इस कवायद पर बहुत से सियासी सवाल उठ रहे हैं.
पिता BJP के सपोर्ट से और बेटा सपा से जा रहा राज्यसभा, नथवानी फैमिली में ऐसा क्या खास?
अखिलेश यादव ने धनराज नाथवानी और राम गोपाल यादव को राज्यसभा में भेजा है. मगर हैरानी इस बात पर है कि धनराज के पिता परिमल नाथवानी भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों की मदद से पहले से राज्यसभा में मौजूद हैं. उधर, इस बात से कांग्रेस असहज हो जाएगी.

धनराज नाथवानी का परिचय सिर्फ रिलायंस समूह तक ही नहीं है. बल्कि उनका सबसे बड़ा परिचय उनके नाम के साथ जुड़े उपनाम में छिपा है, जिसकी वजह से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान सपा और कांग्रेस का गठबंधन भी खटाई में पड़ सकता है. तो आखिर ये धनराज नाथवानी हैं कौन, कैसे अखिलेश ने इन्हें वाइल्ड कार्ड एंट्री करवाई और क्यों इस नाम से सबसे ज्यादा असहज कांग्रेस पार्टी होगी, सब बताएंगे विस्तार से.
धनराज नाथवानी कौन हैं?धनराज नाथवानी का एक परिचय तो यही है कि वो रिलायंस समूह से जुड़े हुए हैं. रिलायंस जियो के रोल-आउट और कई मेगा प्रोजेक्ट्स में भी उनकी भूमिका रही है. रिलायंस की कई और कंपनियों जैसे रिलायंस न्यू एनर्जी के बोर्ड में बतौर डायरेक्टर भी शामिल हैं. उनका दूसरा परिचय ये है कि वो गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं. पहले उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं. अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम को बनवाने में और उसे संभालने में उनकी बड़ी भूमिका रही है. गुजरात स्टेट फुटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष के तौर पर भी काम कर चुके हैं.
लेकिन इसके अलावा उनका एक और परिचय भी है, जिसने यूपी की सियासत में अखिलेश यादव पर सवालिया निशान लगा दिया है. वजह ये है कि उनके पिता का नाम परिमल नाथवानी है, जो खुद भी राज्यसभा के सांसद हैं. वो भी रिलायंस इंडस्ट्रीज में लंबे समय से जुड़े हैं. अब भी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड में ग्रुप प्रेसिडेंट हैं.
लेकिन इससे भी बड़ी बात ये है कि जो धनराज नाथवानी सपा के कोटे से राज्यसभा पहुंच रहे हैं, उन्हीं के पिता परिमल नाथवानी भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों की मदद से पहले से राज्यसभा में मौजूद हैं. और इसी वजह से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर अखिलेश यादव के सामने ऐसी क्या मज़बूरी थी कि उन्होंने भाजपा की मदद से राज्यसभा में पहुंचे नेता के बेटे को ही अपनी पार्टी का राज्यसभा सांसद बनवाया है.
कांग्रेस को क्या परेशानी है?दूसरी तरफ, कांग्रेस परिमल नाथवानी और झारखंड से उनके राज्यसभा में पहुंचने वाले तरीके से असहज है. असल में हुआ ये है कि परिमल नाथवानी हैं तो पुराने राज्यसभा के सांसद. 2008 में पहली बार झारखंड से राज्यसभा पहुंचे थे. और तब भी निर्दलीय ही पहुंचे थे. फिर 2014 में भी झारखंड से ही सांसद बने. लेकिन 2020 में जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर के समर्थन से वो आंध्र प्रदेश से राज्यसभा पहुंचे थे.
2026 में जब परिमल नाथवानी का कार्यकाल पूरा हुआ तो फिर से लगातार चौथी बार राज्यसभा पहुंचने के लिए वो झारखंड आ गए. तब उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर ही नामांकन दाखिल किया, लेकिन बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने परिमल नाथवानी का समर्थन किया और वो चौथी बार भी राज्यसभा पहुंच गए. ये कोई बहुत पुरानी बात नहीं है. इसी जून महीने की बात है. तब राज्यसभा के लिए दो सीटें खाली हुई थीं. झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने वैद्यनाथ राम को उम्मीदवार बनाया था. कांग्रेस से प्रणव झा थे. और परिमल नाथवानी निर्दलीय थे. तब जेएमएम के वैद्यनाथ राम भी जीत गए, निर्दलीय नाथवानी भी जीत गए और इकलौती हार मिली कांग्रेस को.
कांग्रेस ने तब झारखंड मुक्ति मोर्चा को खूब भला-बुरा कहा था. क्रॉस वोटिंग के आरोप लगाए थे. गठबंधन के टूटने तक की बात कही जाने लगी थी. लेकिन नतीजों के बाद कुछ नहीं हो सकता था, तो कुछ नहीं हुआ. अब एक बार फिर से परिमल नाथवानी के बेटे भी राज्यसभा पहुंच रहे हैं. और वो भी सपा से तो कांग्रेस को स्वाभाविक तौर पर असहजता तो होगी ही.
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तीसरे कैंडिडेट पर भिड़ेगी भाजपाअसहजता तो बीजेपी के लिए भी होगी. क्योंकि वो धनराज नाथवानी की मुखालफत नहीं कर पाएगी. हालांकि धनराज सपा के दूसरे उम्मीदवार हैं तो बीजेपी को मुखालफत की जरूरत भी नहीं पड़ेगी. बीजेपी को मुखालफत उस तीसरे कैंडिडेट की करनी है, जिससे बीजेपी की सीधी लड़ाई होने वाली है. क्योंकि सीटें हैं सिर्फ 10. बीजेपी की सात पर जीत तय है. सपा की दो पर जीत तय है और एक सीट पर बीजेपी-सपा के बीच सीधा मुकाबला होना है, जिसमें दोनों को विधायकों को साधना है.
और पूरा खेल इस बात पर टिका है कि सपा का तीसरा उम्मीदवार कौन होगा. फिर से धनराज नाथवानी जैसा कोई सरप्राइजिंग कैंडिडेट या फिर कोई जाना-पहचाना नाम.
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