सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने मुंबई में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी Nokia के दो कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है. आरोपी कर्मचारियों ने कथित तौर पर नकली PF अकाउंट बनाकर 'एंप्लॉयीज प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन' (EPFO) से 19.33 करोड़ रुपये गलत तरीके से निकाले थे.
NOKIA कंपनी के कर्मचारियों ने फर्जी PF अकाउंट बनाए, फिर EPFO के ₹19 करोड़ लूट लिए
Nokia employees fake accounts scam: मुंबई में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी Nokia के दो कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है. आरोप है कि उन्होंने नकली PF अकाउंट बनाकर 'एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन' (EPFO) से 19.33 करोड़ रुपये गलत तरीके से निकाले थे.

Nokia Solutions & Networks India Pvt Ltd में काम करने वाले आरोपियों की पहचान वैभव वर्मा (पेरोल क्लस्टर लीड) और कामराजू मुत्याला (हेड ऑफ पेरोल मैनेजमेंट) के तौर पर हुई है. इंडिया टुडे से जुड़े दिव्येश सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आरोपियों ने कथित तौर पर 2023-2024 के दौरान फर्जी कर्मचारियों के नाम पर 94 नकली प्रोविडेंट फंड अकाउंट बनाए. फिर उनमें 19.33 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए.
शुरुआत में नोकिया, EPF एक्ट 1952 के तहत एक ‘छूट प्राप्त संस्थान’ (exempted establishment) के तौर पर काम करती थी. यानी अपने कर्मचारियों का PF खुद मैनेज करती थी. जुलाई 2023 में कंपनी ने अपना छूट का दर्जा छोड़ने के लिए आवेदन किया. EPFO की मंजूरी के बाद नोकिया ने सदस्यों की पिछली जमा रकम ट्रांसफर कर दी. और 1 सितंबर 2023 से बिना छूट वाले संस्थान (अन-एग्जम्प्टेड) के तौर पर काम करना शुरू कर दिया. मतलब नोकिया की PF व्यवस्था EPFO के पास आ गई.
आरोपियों ने कथित तौर पर इन्हीं ट्रांसफर प्रक्रियाओं के दौरान धोखाधड़ी को अंजाम दिया. EPFO की जोनल फ्रॉड रिस्क मैनेजमेंट कमेटी को बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां मिली हैं. ऐसे 94 फर्जी लाभार्थी अकाउंट्स की पहचान की गई, जिनमें प्रोविडेंट फंड का पेमेंट किया गया था.
नोकिया ने भी कराई जांचनोकिया ने इन गड़बड़ियों की एक इंटरनल फोरेंसिक ऑडिट भी करवाई. ऑडिट में वैभव वर्मा और कामराजू मुत्याला के खिलाफ कई सबूत मिले. इनमें लैपटॉप से डिलीट की गई सबमिशन फाइलें, नौकरी की झूठी पुष्टि, ऑफिशियल क्रेडेंशियल्स का यूज कर फर्जी अकाउंट्स के लिए KYC मंजूरी और ऐसे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड शामिल थे. इनमें ऐसे लोगों की जानकारी थी जो कंपनी के कर्मचारी ही नहीं थे.
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फर्जीवाड़े को लेकर नोकिया के एक प्रवक्ता ने कहा,
"नोकिया नियमों के पालन को गंभीरता से लेती है. अपने कामकाज में नैतिकता और ईमानदारी के उच्चतम मानकों के लिए प्रतिबद्ध है. हम जांच के सिलसिले में संबंधित अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं. यह मामला अभी चल रहा है, इसलिए हम इस केस की बारीकियों पर और कोई टिप्पणी नहीं कर सकते."
दोनों कर्मचारियों के संदिग्ध पाए जाने के बाद नोकिया ने उन्हें सस्पेंड कर दिया. अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की और EPFO को सूचित किया. जिसके बाद CBI में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई. FIR में अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और प्राइवेट लोगों के नाम भी शामिल हैं. उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) और IT एक्ट के तहत आरोप लगाए गए हैं.
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