बीते हफ्ते BJP के नए-नवेले पदाधिकारियों की दिल्ली में बैठक हुई. बंद कमरे में हुई इस मीटिंग में जश्न नहीं, बल्कि टेंशन जैसा माहौल था. नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन के साथ मिलकर आगे की प्लानिंग की. इस मीटिंग में पीएम मोदी ने नसीहत के अंदाज में सख्ती से पदाधिकारियों को कुछ निर्देश दिए हैं. उन्होंने समझाया कि लोग पिछले कुछ सालों में लगातार मिली चुनावी जीत के बाद संतुष्ट न हों. नितिन नबीन ने भी आगाह किया कि सत्ता वाली सोच ने पार्टी के नेताओं और जनता के बीच दूरी पैदा कर दी है.
GEN-Z ने बढ़ाई बीजेपी की टेंशन! PM Modi और नितिन नबीन ने नई टीम को दिया सख्त संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन के साथ पार्टी के नए पदाधिकारियों से मुलाकात कर बैठक की. उन्होंने नसीहत के अंदाज में सख्ती से समझाया कि फिर से कार्यकर्ताओं को एकजुट करना होगा और चुनावी जीत से आत्मसंतुष्ट न हों.

इंडियन एक्सप्रेस ने इस मीटिंग को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट छापी है. रिपोर्ट के मुताबिक PM नई टीम को लेकर पूरे आत्मविश्वास में थे. बैठक में मौजूद एक नेता ने कहा,
‘प्रधानमंत्री साहब का रुख हमेशा से साफ रहा है. उन्होंने हमें पहले भी बताया था कि 2014 में UPA के खिलाफ नाराजगी की वजह से हम सत्ता में आए थे. लेकिन 2019 में गरीबों और देश की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की वजह से हम दोबारा सत्ता में लौटे. 2023 में उन्होंने हमसे कहा कि BJP को लोकसभा चुनाव अपने संगठन की ताकत के दम पर लड़ना होगा. उनका संदेश था कि पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक बार फिर सबसे आगे आना होगा. हम अपनी जीत को हल्के में नहीं ले सकते.’
BJP से जुड़े सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि संगठन की नई टीम को लेकर अनिश्चितता है. इसे बनने में महीनों लग गए. इस बीच सरकार में फेरबदल की अटकलों ने कई सीनियर नेताओं के बीच अनिश्चितता का माहौल बना दिया है. एक BJP नेता ने बताया कि इससे कई नेता खुद को बचाने की कोशिश में लग गए. और यह कोई एक राज्य की बात नहीं है. नेताओं के बीच यह दुविधा कई राज्यों तक फैल गई. नेता ने कहा,
‘अपनी स्थिति को लेकर अनिश्चितता और चिंता के कारण, पार्टी और सरकार में हर सीनियर नेता खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. उन पर बदलाव का डर मंडरा रहा है. इससे कामकाज पर असर पड़ता है और आम कार्यकर्ता निराश महसूस करते हैं.’
Gen-Z आंदोलन का असरबीते दिनों दिल्ली के जंतर-मंतर पर Gen-Z प्रोटेस्ट हुआ. प्रोटेस्ट तो दिल्ली में था. लेकिन इसका असर पूरे देश में देखने को मिला. संघ से गहरे संबंध रखने वाले BJP के एक सीनियर लीडर बताते हैं कि विरोध-प्रदर्शनों पर कुछ सीनियर मंत्रियों के सार्वजनिक बयानों का उल्टा असर हुआ है. मंत्री कहते हैं कि CJP और उसके नेताओं द्वारा उठाए गए मुद्दे सही हैं. लेकिन उनके पीछे छिपे हुए मकसद थे. अब ऐसी दलील कैसे टिक सकती है?
उन्होंने आगे कहा, ‘अगर मुद्दा सही है, तो इससे क्या फर्क पड़ता है कि उसे कौन उठा रहा है? ऐसी प्रतिक्रियाओं से यह धारणा बनती है कि पार्टी या सरकार के पास बेहतर तर्क नहीं हैं. मंत्रियों की टिप्पणी से विपक्ष और आलोचकों को ही चर्चा में बने रहने का मौका मिलेगा. कई नेता इस बात को लेकर भी टेंशन में हैं कि विश्वविद्यालयों में केंद्रीय मंत्रियों को भेजने का क्या नतीजा निकलेगा?’ एक नेता ने कहा,
विश्वविद्यालयों को आम तौर पर लोकतांत्रिक चर्चा की जगह माना जाता है. ऐसे में अगर कोई मंत्री किसी यूनिवर्सिटी में जा रहा है, तो एकतरफा भाषण के बड़े नुकसान हो सकते हैं. ऐसे में अगर वो बातचीत करते हैं, तो मंत्रियों की प्रतिक्रिया पर तमाशा बन सकता है. इससे विपक्षी पार्टियों समेत CJP जैसे संगठनों को मौका मिल सकता है.
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एक-दो नहीं, हर राज्य की यही कहानीBJP नेताओं ने कहा कि पहले दिल्ली में CJP का विरोध-प्रदर्शन हुआ. फिर रांची में और अब पटना में भी युवा सड़क पर उतर गए हैं. पार्टी को सभी राज्यों से इसी तरह की प्रतिक्रिया मिल रही है. पूरी चर्चा अब शिक्षा और नौकरियों जैसे बुनियादी मुद्दों पर केंद्रित हो गई है. उत्तर प्रदेश में तो अगले साल चुनाव हैं. पार्टी को चिंता है कि Gen-Z से उनका डिसकनेक्ट, चुनाव में नुकसान दे सकता है. साथ ही पार्टी के भीतर गुटबाजी और जातिगत आधार पर मतभेदों को लेकर भी चिंताएं हैं. यूपी में देखें तो 18-29 साल की उम्र वाले Gen-Z मतदाता कुल वोटर्स का का 20% से अधिक हैं. युवा वोटर्स की यह बड़ी संख्या भर्ती और परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दों पर नाराज है. बेरोजगारी भी एक बड़ा मुद्दा है.
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