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बीजेपी पार्षदों ने शपथ में देवी-देवताओं के नाम लिए, HC ने शपथ ही रद्द कर दी

केरल के तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 20 बीजेपी पार्षदों ने दिसंबर 2025 में अलग-अलग देवी देवताओं, राजनीतिक शहीदों और आंदोलनों के नाम पर निष्ठा की शपथ ली थी. अब केरल हाई कोर्ट ने इन पार्षदों की ली गई शपथ को अमान्य करार दिया है. इनको फिर से शपथ लेनी होगी.

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केरल हाई कोर्ट ने बीजेपी पार्षदों के शपथ को अमान्य करार दिया है. (इंडिया टुडे)

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  • केरल हाई कोर्ट ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 20 बीजेपी पार्षदों और एक कांग्रेस पार्षद की देवी-देवताओं और राजनीतिक शहीदों के नाम पर ली गई शपथ को अमान्य करार दिया।
  • बीजेपी और कांग्रेस पार्षदों ने केरल म्यूनिसिपल एक्ट और नियमों के खिलाफ ईश्वर के नाम के बजाय विभिन्न देवी-देवताओं और शहीदों के नाम पर शपथ ली, जिसके बाद याचिका दायर हुई।
  • हाई कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को आदेश दिया है कि सभी अमान्य शपथ लेने वाले पार्षदों को चार हफ्ते के अंदर कानूनी फॉर्मेट में दोबारा शपथ दिलाई जाए।

भारत में त्रिस्तरीय चुनावी व्यवस्था है. लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनाव. इस व्यवस्था के चुने गए प्रतिनिधियों को शपथ लेनी होती है. शपथ 'ईश्वर' के नाम पर होती है या फिर 'सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान' के नाम पर. लेकिन केरल के तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 20 बीजेपी पार्षदों ने दिसंबर 2025 में अलग-अलग देवी-देवताओं, राजनीतिक शहीदों और आंदोलनों के नाम पर निष्ठा की शपथ ली. इसके खिलाफ केरल हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई. हाई कोर्ट ने 24 जून को पार्षदों की शपथ को अमान्य करार दिया है. कांग्रेस के एक पार्षद की भी शपथ रद्द हुई है.

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देवी-देवताओं और राजनीतिक शहीदों के नाम पर ली शपथ

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, तिरुवनंतपुरम नगर निगम चुनाव के बाद 21 दिसंबर, 2025 को शपथ ग्रहण समारोह हुआ था. इस समारोह में बीजेपी के कई पार्षदों ने गुरुदेव, भारतमाता, काविलम्मा, अट्टुकल अम्मा, श्री पद्मनाभ स्वामी, अयप्पा जैसे देवी देवताओं के नाम पर शपथ ली. कुछ ने अपने राजनीतिक संगठन के शहीदों के नाम पर भी शपथ ली. वहीं कांग्रेस के सुनील चुवत्तपुडम ने शपथ में पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत ओमान चांडी का नाम लिया. 

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कोर्ट ने कहा, नियम के मुताबिक शपथ लें

बीजेपी के पार्षदों और कांग्रेस के पार्षद के खिलाफ केरल हाई कोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की गईं. इन पर सुनवाई करते हुए जस्टिस पी. वी. कुन्हिकृष्णन ने कहा, 

जब कानून में शपथ का एक स्पेशल फॉर्मेट तय है तो उसका सख्ती से पालन किया जाना चाहिए. चुने गए प्रतिनिधियों को या तो 'ईश्वर' के नाम पर या फिर केरल म्यूनिसिपल एक्ट, 1994 के तहत तय फॉर्मेट में 'सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान' के नाम पर शपथ लेनी होती है.

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उन्होंने आगे कहा,

शपथ लोकतंत्र में बेहद मायने रखती है. इसका मतलब जनता से वादा है कि चुना हुआ प्रतिनिधि ईमानदारी से काम करेगा, संविधान के हिसाब से चलेगा और लोगों की सेवा करेगा. इसलिए उसे नियम-कानून के हिसाब से ही शपथ लेनी चाहिए.  

‘श्री नारायण गुरु’ के संदेश का जिक्र किया

कोर्ट ने कहा कि शपथ में प्रयोग किए जाने वाले 'ईश्वर' शब्द को किसी भी देवता, राजनीतिक विचारधारा, आंदोलन, संगठन या व्यक्ति से रिप्लेस नहीं किया जा सकता है. कोर्ट ने इस दौरान केरल के प्रसिद्ध संत और समाज सुधारक श्री नारायण गुरु के प्रसिद्ध संदेश का भी जिक्र किया. जस्टिस पी. वी. कुन्हिकृष्णन ने कहा, 

मुझे ये कहना पड़ रहा है कि हम सभी धर्मों के सर्वशक्तिमान को एक नाम 'ईश्वर' से क्यों नहीं बुलाते? ऐसा होगा तो सारी समस्या खत्म हो जाएगी. हम एक सदी पहले की गई श्री नारायण गुरु की घोषणा को भूल रहे हैं, जो कहती है, 'एक जाति, एक मत, एक दैवं मनुष्यनु'.

'एक जाति, एक मत, एक दैवं मनुष्यनु' का अर्थ है मनुष्य के लिए एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर. इसके साथ ही हाई कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को इन सभी पार्षदों को 4 हफ्ते के अंदर दोबारा से सही तरीके से शपथ दिलाने का आदेश दिया है. यानी इनकी कुर्सी बची रहेगी.

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किसने दायर किया था याचिका?

CPI(M) के पार्षद एस. पी. दीपक ने बीजेपी पार्षदों की शपथ के खिलाफ याचिका दायर की थी. वहीं कांग्रेस पार्षद के खिलाफ सी. कन्नन नाम के एक शख्स ने याचिका दायर की थी.

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