'बच्चों, हम नदी पार करके स्कूल में पढ़ने जाया करते थे' से 'बच्चों हम नदी पार कर स्कूल में पढ़ाने जाया करते थे' वाली लाइन मध्यप्रदेश के कुछ टीचरों पर एकदम फिट बैठती है. आने वाली पीढ़ियों को वह अपनी कहानी ऐसे ही सुना सकते हैं. क्योंकि अभी स्कूल जाने के लिए उन्हें टायर और ट्यूब की मदद से नदी पार करना पड़ रहा है. इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसमें कुछ टीचर टायर-ट्यूब की मदद से नदी के एक किनारे से दूसरे किनारे पर जा रहे हैं.
ई-अटेंडेंस का ऐसा डर, MP में टायर-ट्यूब से नदी पार कर स्कूल जा रहे टीचर
Bhind teachers crossing river on tube: भिंड में बारिश के बाद बेसली नदी का जलस्तर बढ़ने से नदरोली गांव का सड़क से संपर्क कट गया. जिससे टीजर्स को ट्यूब के सहारे नदी पार करने के लिए मजबूर होना पड़ा.

वायरल वीडियो में दिख रहा है कि एक टीचर ट्यूब पर लेटा हुआ है. एक लड़का उनकी ट्यूब को पानी में लहरों के साथ बहाते हुए लेकर जा रहा है. फिर उन्हें नदी के किनारे लाकर छोड़ देता है. ऐसा ही अन्य टीचर भी कर रहे हैं.
सैलरी में कटौतीदावा है कि सैलरी कट के डर से टीचरों के ये तरीका अपनाना पड़ रहा है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ये वीडियो भिंड के बबेड़ी इलाके का है. यहां बारिश के बाद बेसली नदी का जलस्तर बढ़ने से नदरोली गांव का सड़क संपर्क कट गया. पहले टीचर पानी थोड़ा कम होने का इंतजार करते थे लेकिन अब अटेंडेंस और सैलरी कटने के डर से उन्हें स्कूल जाना ही पड़ता है. भले ही इसके लिए उन्हें ट्यूब से ही नदी पार क्यों न करना पड़े. दरअसल, नई व्यवस्था के मुताबिक, स्कूल देर से पहुंचने पर ई-अटेंडेंस ऐप उनकी सैलरी काट सकता है. इसी साल (2026) की जनवरी से सरकारी स्कूलों में यह मेंडेटरी कर दिया गया है. टाइम्स से बात करते हुए एक टीचर ने बताया,
टीचर्स ने बताई अपनी परेशानीपहले हम पानी कम होने का इंतजार करते थे. इसमें चार से पांच घंटे लगते थे और हम थोड़ी देर से स्कूल जाते थे. लेकिन अब, ऐप कुछ भी नहीं समझता.
टीचर्स का कहना है कि एजुकेशन डिपार्टमेंट की ई-अटेंडेंस ड्राइव में उनकी सुरक्षा की कोई चिंता नहीं है. समस्याओं के बारे में पूछे जाने पर जिला शिक्षा अधिकारियों ने दावा किया कि स्थिति को पहले ‘फ्लैग नहीं किया गया था.’ उन्होंने अब ई-अटेंडेंस सिस्टम में टेक्निकल और प्रैक्टिकल सुधारों को देखने के लिए एक पैनल बनाया है. टीचर्स का कहना है कि समाधान के तौर पर पुल या मौसमी रास्ते बनाए जाएं. या जब प्राकृतिक रुकावट या लॉग-इन में रुकावट आए तो ई-अटेंडेंस टाइमिंग में छूट मिले.
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बता दें कि गांव तक सिर्फ बैसली नदी पार करके ही पहुंचा जा सकता है. ऐसे में टीचर्स ने ऐसा रास्ता निकाला है. टाइम्स की रिपोर्ट कहती है कि मानसून में नदी में पानी का बहाव बढ़ जाने से 100 में से कई स्टूडेंट स्कूल नहीं जा पाते.
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