हम सभी को बिहार के भरत तिवारी का वो आखिरी वीडियो याद है. इस वीडियो को फेसबुक से हटाया जा चुका है. ये वीडियो भरत तिवारी एनकाउंटर से ठीक पहले का है जब भरत तिवारी ने फेसबुक लाइव के दौरान सरेंडर करते हुए अपना हथियार फेंक दिया था. 3 मिनट 42 सेकंड के उस वीडियो को प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया है. उस वीडियो में भरत ने अपनी मांगें रखी थीं, प्रशासन से मिले आश्वासन के बारे में बताया था. सबसे जरूरी पुलिस के सामने बंदूक फेंकने यानी सरेंडर करने का सबूत था. सवाल ये है कि आखिर ये वीडियो किसने डिलीट किया? क्या फेसबुक ने किसी नियम के तहत उसे डिलीट किया? या फिर किसी ने इस वीडियो को हटवाने की कोशिश की?
भरत तिवारी एनकाउंटर केस में नया मोड़, फेसबुक वीडियो डिलीट, सबूत मिटाने की कोशिश?
Bharat Tiwari की मौत से पहले का वीडियो वायरल हुआ था. इसमें उन्होंने इच्छा जताई थी कि मौत के बाद उनका शरीर दान कर दिया जाए. दूसरा ये कि उनके मोबाइल फोन में कुछ अहम जानकारियां हैं, जिनकी जांच जरूरी है. इस वीडियो को हटा लिया गया है.


दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में इसकी तीन पॉसिबिलिटी बताई हैं. पहली: या तो किसी के पास अकाउंट का पासवर्ड था. दूसरा: जिसके पास भरत तिवारी का फोन था, उसने वो वीडियो डिलीट किया होगा. तीसरी: कोई टेक्निकल एरर हुआ होगा.
फिलहाल भरत तिवारी का फोन पुलिस के पास है. एनकाउंटर के बाद शाहपुर पुलिस ने घटनास्थल से एक पिस्टल, 2 लाइव कारतूस, एक मैग्जीन, 2 खोखे बरामद किया था. इसके अलावा, भरत तिवारी का काला चश्मा, उसका मोबाइल भी जब्त किया गया था. वहीं, उनके परिजन लगातार भरत तिवारी का माेबाइल फोन लौटाने की मांग कर रहे हैं.
17 जून को बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस ने भरत तिवारी का एनकाउंटर कर दिया. पुलिस का दावा है कि भरत तिवारी हथियार लेकर घूम रहे थे और पुलिस पर फायरिंग कर रहे थे. घटना से पहले भरत ने फेसबुक लाइव किया था. इसी लाइव में दिखता है कि भरत अपना पिस्टल पुलिस की तरफ फेंक कर सरेंडर कर देते हैं. यहां लाइव बंद हो जाता है. पुलिस का दावा है कि उन्होंने फायरिंग करने की कोशिश की और जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने पैर में गोली मारी. इसके बाद अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
लेकिन भरत के परिवार ने 'फर्जी एनकाउंटर' का आरोप लगाया. परिजनों का कहना है कि भरत ने सरेंडर कर दिया था, इसके बावजूद पुलिस ने उसे गोली मार दी. इस मामले में तत्कालीन डीएसपी राजेश कुमार शर्मा और थानाध्यक्ष सहित पांच पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ और चार पुलिसकर्मी निलंबित किए गए. डीससपी राजेश कुमार शर्मा को पद से हटाया गया. लेकिन हफ्ते भर बाद उन्हें मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो यानी Prohibition & State Narcotics Control Bureau में बतौर डीएसपी नई पोस्टिंग दे दी गई.
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इस मामले में पटना हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज, जस्टिस वी.के. सिन्हा की अध्यक्षता में जांच आयोग गठित हुआ. जो अब तक परिजनों और चश्मदीदों सहित 7 गवाहों के बयान दर्ज कर चुका है. सीबीआई जांच की याचिका के साथ ये मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा. लेकिन कोर्ट ने सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को पटना हाईकोर्ट जाने को कहा. न्याय की मांग को लेकर परिवार ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन भी किया था. फिलहाल, मामले की जांच जारी है.
वीडियो: भरत तिवारी कथित फर्जी एनकाउंटर में हत्या की FIR वाले DSP को 7 दिन में नई पोस्टिंग कैसे मिल गई?








