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'मेरा फोन किसी के हाथ नहीं लगना चाहिए,' भरत तिवारी ने अपनी 'आखिरी इच्छा' में ये क्यों कहा?

वीडियो में Bharat Bhushan Tiwari कहते सुनाई देते हैं कि उनकी मौत के बाद उनके शरीर को सबसे पहले भारतीय सेना को दान किया जाए. यदि ऐसा संभव न हो तो गरीब एवं असहाय लोगों के हित में उनके शरीर का उपयोग किया जाए. लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उनके मोबाइल फोन को लेकर कही गई बात की हो रही है.

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21 जून 2026 (पब्लिश्ड: 07:34 PM IST)
bharat tiwari bihar last video before encounter mystery of mobile phone
भरत के वीडियो में वो अपनी आखिरी इच्छा के बारे में बता रहे हैं (PHOTO-ITG)
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बिहार के भरत भूषण तिवारी केस में लगातार विवाद बढ़ता जा रहा है. बिहार पुलिस ने उनका हाफ एनकाउंटर किया था. बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. इस पर भोजपुर जिले में काफी बवाल हुआ. अब भरत का एक वीडियो सामने आया है, जो कुछ महीनों पुराना है. इसमें उन्होंने कथित तौर पर अपनी ‘आखिरी इच्छा’ के बारे में बताया है. वीडियो के मुताबिक, भरत ने पहली इच्छा ये बताई कि मौत के बाद उनका शरीर दान कर दिया जाए. दूसरा ये कि उनके मोबाइल फोन में कुछ अहम जानकारियां हैं, जिनकी जांच जरूरी है. इसलिए उनका मोबाइल फोन किसी के हाथ नहीं लगना चाहिए.  

भरत ने ये वीडियो अपनी मौत से काफी पहले बनाया था, लेकिन अब ये वीडियो सामने आया है, जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या उन्हें पहले से अपनी मौत की आशंका थी?

पहले समझते हैं कि भरत ने जो वीडियो बनाए थे, उनमें क्या है? वीडियो में भरत तिवारी कहते सुनाई देते हैं कि उनकी मौत के बाद उनके शरीर को सबसे पहले भारतीय सेना को दान किया जाए. अगर ऐसा संभव न हो तो गरीब और असहाय लोगों के हित में उनके शरीर का उपयोग किया जाए लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उनके मोबाइल फोन को लेकर कही गई बात की हो रही है.  

भरत वीडियो में साफ कहते हैं कि उनके जाने के बाद उनका मोबाइल माता-पिता के अलावा किसी और के हाथ में नहीं जाना चाहिए. उनका दावा था कि फोन में ऐसे प्रमाण और जानकारियां मौजूद हैं, जिन्हें मिटाया या झुठलाया नहीं जा सकता. भरत का कहना था कि उन्होंने हर महत्वपूर्ण जानकारी और साक्ष्य को सुरक्षित रखने के लिए अपने मोबाइल का इस्तेमाल किया है, जिन्हें मिटाया या झुठलाया नहीं जा सकता. वीडियो में भरत तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी सवाल उठाते दिखाई देते हैं और ये कहते हैं कि वो किसी दबाव, लालच या धमकी से पीछे हटने वाले नहीं हैं.  

मोबाईल में क्या छिपा है?

अब सवाल है कि आखिर उस मोबाइल में ऐसा क्या था, जिसे लेकर भरत इतने चिंतित थे? क्या सच में उसमें ऐसे दस्तावेज या जानकारियां थीं जिनकी जांच जरूरी है? या फिर ये सिर्फ उनकी व्यक्तिगत आशंका थी? फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे. परिजन मोबाइल की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं. वहीं सरकार की ओर से मामले की न्यायिक जांच की घोषणा की जा चुकी है.

हालांकि, ये साफ करना जरूरी है कि वायरल वीडियो में किए गए सभी दावे भरत तिवारी के व्यक्तिगत बयान हैं. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मोबाइल में मौजूद कथित साक्ष्यों को लेकर भी अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. इधर आरा में भरत की मौत के बाद कुछ युवाओं ने 20 जून की शाम कैंडल मार्च निकालकर उन्हें श्रद्दांजलि दी और अपनी मांगे सामने रखीं.

केस में अब तक क्या-क्या हुआ?

ये पूरी घटना 17 जून को हुई. भोजपुर जिले के शाहपुर थाना इलाके के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी और पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई. पुलिस का दावा है कि वो हथियार लेकर घूम रहे थे और पुलिस पर फायरिंग कर रहे थे. घटना से पहले भरत ने फेसबुक लाइव किया था. इसी लाइव में दिखता है कि भरत अपना पिस्टल पुलिस की तरफ फेंककर सरेंडर कर देते हैं. यहां लाइव बंद हो जाता है. इसके बाद पुलिस का दावा है कि उसने फायरिंग करने की कोशिश की और जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने पैर में गोली मारी. 

इसके बाद भरत को पहले आरा सदर अस्पताल और बाद में पटना के पीएमसीएच रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. पुलिस ने बताया था कि भरत भूषण मानसिक तौर अस्वस्थ है.

परिवार का आरोप- एनकाउंटर फर्जी है

सरकार और पुलिस भले कुछ भी कहें. लेकिन भरत के परिवार ने पुलिस पर 'फर्जी एनकाउंटर' करने का आरोप लगाया है. परिजन का कहना है कि भरत ने सरेंडर कर दिया था. इसके बावजूद पुलिस ने उसे गोली मार दी. यही आरोप पूरे विवाद का केंद्र बन गया है. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होता है. पुलिस की कार्रवाई पर लोगों ने अपनी-अपनी राय रखनी शुरू कर दी. मामला बढ़ा तो तीन पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया. इसी बीच शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार का एक विवादित बयान सामने आया. उन्होंने कहा,

किस्मत में मरना लिखा था, इसलिए मर गया.

इस बयान के सामने आने के बाद वे भी निलंबित हो गए.

पूर्व आधिकारियों ने उठाए सवाल

भरत के केस पर कई पूर्व अधिकारियों ने भी सवाल उठाए हैं. बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद और गुप्तेश्वर पांडेय समेत कई लोगों ने पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग की है. और अब तो इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है. विपक्षी नेता पप्पू यादव और कई नेताओं ने सरकार और पुलिस पर सवाल उठाए. दबाव बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं.

यह भी पढ़ें: 'नेता झूठा वादा नहीं करेंगे', ये मांग करने वाले भरत भूषण तिवारी का एनकाउंटर क्यों हुआ?

इसी बीच भरत तिवारी के परिवार के खिलाफ भी पुलिस ने FIR दर्ज कर ली. इसमें अवैध हथियार रखने, पुलिस पर फायरिंग करने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप लगे हैं. इन सबके बाद अब भरत का एक पुराना वीडियो वायरल है जिसमें उन्होंने अपनी दो अंतिम इच्छाएं बताईं. लेकिन अभी सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये पुलिस की वैध जवाबी कार्रवाई थी, या सरेंडर के बाद किया गया फर्जी एनकाउंटर? इसका जवाब न्यायिक जांच से ही सामने आएगा. 

वीडियो: बिहार में भरत तिवारी एनकाउंटर का सच क्या है?

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