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पिता की हत्या में बेटे को जेल हुई, 5 साल बाद मौत की वजह टीबी निकली

5 साल बाद कोर्ट ने बेटे को बरी करते हुए कहा कि उसके पिता की मौत उसकी वजह से नहीं हुई थी. कोर्ट ने हत्या के किसी भी एंगल को खारिज कर दिया. कोर्ट में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ये साबित हो गया कि कृष्णा की मौत चोट से नहीं हुई.

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कोर्ट ने 5 साल बाद बेटे को बरी कर दिया है (PHOTO-X)

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  • कोर्ट ने महाराष्ट्र के भांडुप में हुए एक मामले में पांच साल बाद सचिन गोरीवाले को बरी करते हुए माना कि उनके पिता कृष्णा की मौत ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) से हुई थी, हत्या नहीं हुई।
  • सचिन के पिता कृष्णा के शरीर पर चोटें मिलने के कारण पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया था, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण टीबी बताया गया, जिससे केस की पृष्ठभूमि बनी।
  • कोर्ट के फैसले के बाद समझा जाएगा कि कॉर्पोरल चोटें मृत्यु का कारण नहीं थीं, और मामले में न्याय प्रक्रिया का अगला चरण यह होगा कि सचिन की बरी होने के बाद कानूनी पहलुओं को अंतिम रूप दिया जाए।

अंग्रेजी की एक कहावत है, 'Justice Delayed is Justice Denied.' यानी देरी से न्याय मिलना न्याय न मिलने के बराबर है. ऐसा ही एक मामला महाराष्ट्र के भांडुप से सामने आया है. यहां एक व्यक्ति को मर्डर केस के मामले में 5 साल बिताने पड़े. मर्डर भी किसका? उसके खुद के पिता का. लेकिन अब 5 साल बाद कोर्ट ने उसे बरी करते हुए कहा कि उसके पिता की मौत तो ट्यूबरकुलोसिस (TB) से हुई थी. कोर्ट ने केस में हत्या के किसी भी एंगल को खारिज कर दिया.

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क्या है पूरी कहानी?

जिस व्यक्ति को कोर्ट ने बरी किया, उसका नाम सचिन गोरीवाले है. पुलिस ने सचिन को 26 अप्रैल, 2020 को गिरफ़्तार किया गया था. उसके पिता, कृष्णा गोरीवाले 25 अप्रैल को मृत पाए गए थे. प्रॉसीक्यूशन के पक्ष के अनुसार, 25 अप्रैल, 2020 को सुबह करीब 11 बजे सचिन और उनके पिता कृष्णा के बीच घरेलू मामलों को लेकर झगड़ा हुआ था. इस झगड़े के दौरान सचिन ने कथित तौर पर डंडे से उनकी जांघों और पीठ पर हमला किया था.

इसके बाद दोपहर के करीब 3 बजे सचिन की मां, उनके पिता कृष्णा को दोपहर के खाने के लिए बुलाने गईं. लेकिन कृष्णा ने कोई जवाब नहीं दिया. इसके बाद मां ने पड़ोसियों को बुलाया और पुलिस से भी संपर्क किया. कृष्णा को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. The Free Press Journal की रिपोर्ट कहती है कि उनके शरीर पर चोटें पाए जाने के बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया था.

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पोस्टमार्टम से बदला केस

इस मामले में सचिन ने खुद को बेगुनाह बताया. आखिरकार नवंबर 2021 में मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई. सुनवाई के के दौरान पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर का बयान भी लिया गया. डॉक्टर ने कोर्ट को बताया कि कृष्णा को कई चोटें आई थीं, लेकिन वे उनकी मौत का कारण नहीं थीं. डॉक्टर ने यह भी कहा कि उन्हें कोई फ्रैक्चर नहीं हुआ था. डॉक्टर के मुताबिक कृष्णा की मौत इसलिए हुई क्योंकि वह ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) से पीड़ित थे.

इस मामले पर सचिन की बहन के बयान ने भी अहम भूमिका निभाई. सचिन की बहन सुचित्रा ने गवाही दी कि कृष्णा अक्सर छोटी-छोटी बातों पर परिवार से झगड़ा करते थे. सुचित्रा के मुताबिक, कृष्णा ने सचिन और उसकी मां को घर से जाने के लिए कहा था. जब वे नहीं गए तो उन पर डंडे से हमला कर दिया. सुचित्रा ने कहा कि सचिन ने खुद के बचाव में डंडा छीन लिया और उसके पैरों पर चार-पांच बार मार दिया. इसी वजह से उन्हें चोट आई थी. कोर्ट में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ये साबित हो गया कि कृष्णा की मौत चोट से नहीं बल्कि टीबी से हुई थी.

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