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AI के दौर में HI की जरूरत, धीरेंद्र शास्त्री ने ‘हिंदुत्व इंटेलिजेंस’ की बात क्यों कही?

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि सोशल मीडिया पर Reels और Short Videos के चक्कर में वास्तविक जीवन, संस्कृति और धर्म की जड़ों को नजरअंदाज न करें. AI हमें आगे ले जा रहा है, लेकिन HI के बिना ये प्रगति अधूरी रहेगी.

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धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि धर्म ही असली ताकत है, जो देश में एकता ला सकता है. (फोटो- X)

बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान अजीबोगरीब बयान दे दिया. उन्होंने कहा कि आज का दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का है, लेकिन देश को इसके साथ-साथ HI यानी हिंदुत्व इंटेलिजेंस की भी बहुत सख्त जरूरत है. उनका मानना है कि टेक्नोलॉजी के इस तेजी से बदलते दौर में हिंदुत्व की बुद्धिमत्ता और मूल्यों को भुलाया नहीं जा सकता.

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दिल्ली के विश्व शांति केंद्र के एक कार्यक्रम में शामिल हुए धीरेंद्र शास्त्री ने मीडिया से बातचीत में कहा,

"ये रील्स का दौर है, लेकिन हमें रियलिटी को नहीं भूलना चाहिए. AI के इस युग में देश को हिंदुत्व इंटेलिजेंस की बेहद आवश्यकता है."

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उन्होंने स्पष्ट किया कि HI का मतलब है Hindutva Intelligence. यानी हिंदुत्व से जुड़ी समझ, बुद्धि और दूरदर्शिता, जो समाज को सही दिशा दे सके.

उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि धर्म ही असली ताकत है, जो देश में एकता ला सकता है. उनका कहना था,

"केवल धर्म ही देश को एकजुट कर सकता है और दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध से बचा सकता है. धर्म ही दुनिया में शांति स्थापित करेगा और लोगों को हिंसा छोड़कर अहिंसा के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देगा."

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उन्होंने कहा कि आज के समय में जब विश्व स्तर पर तनाव बढ़ रहा है, तब सनातन धर्म की शिक्षाएं ही स्थायी शांति का रास्ता दिखा सकती हैं. कार्यक्रम में जैन मुनि आचार्य लोकेश मुनि और मोरारी बापू भी मौजूद थे. धीरेंद्र शास्त्री ने आचार्य लोकेश मुनि की सनातन धर्म को एकजुट करने की पहल की खूब तारीफ की. एक बड़ी घोषणा भी हुई. आचार्य लोकेश मुनि ने ऐलान किया कि अब वो 'आचार्य लोकेश मुनि सनातनी' के नाम से जाने जाएंगे.

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि सोशल मीडिया पर रील्स और शॉर्ट वीडियो के चक्कर में वास्तविक जीवन, संस्कृति और धर्म की जड़ों को नजरअंदाज न करें. AI हमें आगे ले जा रहा है, लेकिन HI के बिना ये प्रगति अधूरी रहेगी. हिंदुत्व इंटेलिजेंस से ही हम अपनी पहचान, मूल्यों और एकता को मजबूत रख सकते हैं.

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