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ग्रीनलैंड पर बन गई बात! ट्रंप को मिली उनकी 'पसंदीदा' डील, क्या अब खत्म होगा विवाद?

Donald Trump Greenland Deal: ट्रंप के नए ऐलान से उम्मीद बंधी है कि ग्रीनलैंड पर मचा बवाल अब शांत हो सकता है. ट्रंप ने कहा है कि ग्रीनलैंड पर डील का फ्रेमवर्क बन गया है और इसे अमेरिका के लिए बहुत अच्छा बताया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर यह डील है क्या.

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ट्रंप ने कहा है कि ग्रीनलैंड पर डील का फ्रेमवर्क बन गया है. (Photo: File/ITG)

आर्कटिक इलाके में फैले बर्फीले आईलैंड ग्रीनलैंड को लेकर जारी विवाद अब थम सकता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप अब तक पूरे ग्रीनलैंड को हथियाने की जिद पर अड़े थे. वहीं डेनमार्क, जिसका ग्रीनलैंड पर कंट्रोल है, ने कहा था कि वह किसी भी कीमत पर इसे अमेरिका को नहीं देगा. डेनमार्क के पीछे पूरा यूरोप भी मजबूती से खड़ा था.

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हालांकि अब लगता है कि अमेरिका और यूरोप ने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर बीच का रास्ता निकाल लिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने गुरुवार 22 जनवरी को घोषणा की कि ग्रीनलैंड पर एक डील का फ्रेमवर्क बना लिया गया है. उन्होंने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा,

NATO के सेक्रेटरी जनरल मार्क रुट्टे के साथ मेरी बहुत अच्छी मीटिंग हुई. जिसके आधार पर हमने ग्रीनलैंड और असल में पूरे आर्कटिक क्षेत्र के संबंध में भविष्य की डील का फ्रेमवर्क बनाया है. अगर यह सॉल्यूशन पूरा हो जाता है, तो यह यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका और सभी NATO देशों के लिए बहुत अच्छा होगा. इस समझ के आधार पर, मैं उन टैरिफ को लागू नहीं करूंगा, जो 1 फरवरी से लागू होने वाले थे. ग्रीनलैंड से संबंधित गोल्डन डोम के बारे में और बातचीत हो रही है. जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ेगी, और जानकारी दी जाएगी. वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, स्पेशल एनवॉय स्टीव विटकॉफ, और ज़रूरत पड़ने पर दूसरे लोग भी बातचीत की ज़िम्मेदारी संभालेंगे. वो सीधे मुझे रिपोर्ट करेंगे.

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(Trump Truth Social Post)
'अमेरिका के लिए अच्छी होगी डील'

यानी ट्रंप ने साफ किया है कि ग्रीनलैंड पर उनकी NATO के अन्य सदस्यों के साथ कोई आम सहमति बन गई है. हालांकि डील क्या है, इसमें क्या-क्या प्रावधान होंगे, इसकी डिटेल अभी नहीं दी गई है. ट्रंप ने दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान मीडिया से बात करते हुए इस बारे में कहा कि प्रस्तावित फ्रेमवर्क थोड़ा कॉम्प्लेक्स (जटिल) है. कहा कि इसे बाद में समझाया जाएगा. साथ ही बताया कि यह समझौता हमेशा के लिए लागू रहेगा.

ट्रंप ने एक इंटरव्यू में यह भी कहा कि हमारे पास एक डील का कॉन्सेप्ट है. मुझे लगता है कि यह यूनाइटेड स्टेट्स के लिए एक बहुत अच्छी डील होगी. हालांकि डेनमार्क या यूरोप के अन्य सदस्यीय देशों ने इस प्रस्तावित डील पर अभी कोई भी सहमति नहीं दी है. लेकिन डेनमार्क ने ग्रीनलैंड पर कब्जे से पीछे हटने और यूरोप पर लगाए गए टैरिफ को खत्म करने के ट्रंप के फैसलों पर खुशी जताई है. डेनमार्क के विदेश मंत्री, लार्स लोके रासमुसेन ने एक बयान जारी करते हुए कहा,

दिन की जितनी अच्छी शुरुआत हुई थी, उससे बेहतर तरीके से खत्म हो रहा है. हम इस बात का स्वागत करते हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड को ज़बरदस्ती लेने से मना कर दिया है और यूरोप के साथ ट्रेड वॉर रोक दिया है. अब, आइए बैठकर पता लगाते हैं कि हम डेनमार्क साम्राज्य की रेड लाइन्स का सम्मान करते हुए आर्कटिक में अमेरिकी सुरक्षा चिंताओं को कैसे दूर कर सकते हैं.

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डील में है क्या?

ऐसे में सवाल है कि आखिर इस डील में होगा क्या-क्या. द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट में राजनयिक सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इस प्रस्तावित डील में क्या-क्या समझौते हो सकते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक समझौते के तहत अमेरिका को ग्रीनलैंड के कुछ हिस्सों को उसका मिलिट्री बेस स्थापित करने के लिए दे सकता है. खास बात यह होगी कि इस हिस्से में पूरी तरह से अमेरिकी कंट्रोल होगा.

द टेलीग्राफ ने बताया कि यह प्रावधान वैसा ही होगा, जैसा ब्रिटेन और साइप्रस के बीच है. इसके तहत साइप्रस में ब्रिटेन के दो मिलिट्री बेस हैं, जिस पर ब्रिटेन का पूरा अधिकार और संप्रुभता है. इसी तरह ग्रीनलैंड में जो अमेरिकी बेस होंगे, उन्हें अमेरिकी क्षेत्र माना जाएगा. टेलीग्राफ के अनुसार इन इलाकों में अमेरिका बिना डेनमार्क की अनुमति के सेना उतार सकेगा. खुफिया जानकारी एकत्रित कर सकेगा और अपने सैनिकों को ट्रेनिंग दे सकेगा.

रेयर अर्थ पर मिला अधिकार

इसके अलावा प्रस्तावित डील में रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर भी समझौता हो सकता है. जिसके तहत अपने कंट्रोल वाले इलाकों में अमेरिका दुर्लभ खनिजों का खनन भी कर सकता है. मालूम हो कि अमेरिका के पहले से ही ग्रीनलैंड में मिलिट्री बेस हैं, जिनमें अमेरिकी एयर फोर्स, आर्मी और नेवी, तीनों सेनाएं ऑपरेट करती हैं. लेकिन नई डील से अमेरिका को इलाकों में ज्यादा कंट्रोल मिल जाएगा. खास यह होगा कि यहां से अमेरिका रेयर अर्थ भी ले सकेगा, जिसे ट्रंप बेहद अहम मान रहे हैं.

गोल्डन डोम पर भी चल रही बात

अमेरिका को तीसरा फायदा यह होगा कि डील के बाद वह अपना गोल्डन डोम भी ग्रीनलैंड पर तैनात कर सकेगा. खुद ट्रंप ने भी अपनी पोस्ट में कहा था कि इस पर चर्चा चल रही है. बता दें कि अमेरिका का "गोल्डन डोम", मिसाइल डिफेंस सिस्टम का एक प्लान है. इसमें सेंसर और इंटरसेप्टर लगे होंगे, जो नॉर्थ अमेरिका और अमेरिका के दूसरे इलाकों तक फैले होंगे. इनसे विदेशी हमलों से बचा जा सकेगा.

यह गोल्डन डोम इजराइल के आयरन डोम जैसा ही काम करेगा. प्रोजेक्ट अभी बहुत शुरुआती स्टेज में है. ट्रंप प्रशासन ने अभी यह नहीं बताया है कि यह कैसे काम करेगा, या इसका डिज़ाइन कैसा होगा. लेकिन ट्रंप ने इतना जरूर कहा है कि प्रस्तावित गोल्डन डोम सिस्टम से कनाडा को भी सुरक्षा मिलेगी.

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CBS न्यूज़ के मुताबिक ग्रीनलैंड पर नए समझौते के तहत अमेरिका को इसका पूरा मालिकाना हक नहीं मिलेगा. बल्कि यह मौजूदा समझौता, जो 1951 में किया गया था, का एक एक्सेंशन होगा, जिससे ग्रीनलैंड की सुरक्षा और बढ़ाई जाएगी. रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया हया है कि रूस और चीन को ग्रीनलैंड में पैर जमाने से रोकने के लिए NATO ग्रीनलैंड पर अपनी भूमिका बढ़ाएगा. हालांकि यह भी साफ किया गया है कि इस तरह के समझौते के लिए अभी भी डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ अमेरिका को सीधे बातचीत करने की ज़रूरत होगी. फिलहाल ट्रंप ने नाटो के अधिकारियों के साथ बातचीत कर यह फ्रेमवर्क तैयार किया है. 

वीडियो: दुनियादारी: डॉनल्ड ट्रंप को ग्रीनलैंड प्लान उल्टा पड़ जाएगा?

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