अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी की की जांच चल रही है. इस बीच राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दान प्रक्रिया के हर स्टेज की वीडियोग्राफी कराने का फैसला किया है. इसके लिए एक नया निगरानी सिस्टम शुरू किया है. मकसद ये है कि चढ़ावे की निगरानी को और सख्त किया जा सके. राम जन्मभूमि ट्रस्ट के महंत दिनेन्द्र दास ने मीडिया को बताया कि नए नियम 25 जुलाई से लागू कर दिए गए हैं. इन नए उपायों में 360-डिग्री कैमरों का इस्तेमाल, दान प्रक्रिया की लगातार वीडियोग्राफी, आठ सदस्यों वाली निगरानी टीम की तैनाती और गिनती वाले कमरे के अंदर एक्सट्रा CCTV से निगरानी शामिल है.
'राम मंदिर से एक पैसा भी गायब नहीं हो सकता', ट्रस्ट ने ऐसी क्या व्यवस्था कर दी है?
विवाद के कारण मंदिर ट्रस्ट में भी बदलाव हुए. मामला सामने आने के बाद चंपत राय समेत कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया. निगरानी के नए उपायों पर बात करते हुए दास ने कहा कि ट्रस्ट जहां भी जरूरी होगा, अपने सिस्टम में सुधार करता रहेगा.

यह कदम मंदिर के दान में कथित हेराफेरी के बाद उठाया गया है. चढ़ावा चोरी के आरोपों के कारण ही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच शुरू हुई थी. इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है और जांच अभी भी जारी है.
हर जगह सीसीटीवी से निगरानीमीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 25 जुलाई से दान संभालने की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी हो रही है. इसमें गिनती वाले कमरे से खाली कलेक्शन बॉक्स निकालकर मंदिर तक ले जाने तक, उन्हें भरने, सील करने और सील करने तक की निगरानी हो रही है. इस मुद्दे पर ट्रस्ट से जुड़े एक सदस्य ने मीडिया को बताया,
दान पेटी खाली करने से पहले, गिनती वाले कमरे से खाली पेटी ले जाने, उसे दान पेटी तक पहुंचाने, उसमें चढ़ावा डालने और सील की हुई पेटी को वापस गिनती वाले कमरे में लाने की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाती है.
ट्रस्ट ने इस प्रक्रिया को रिकॉर्ड करने के लिए दो प्रोफेशनल वीडियोग्राफर नियुक्त किए हैं. 8 सदस्यों की एक निगरानी टीम इस काम की देखरेख करती है. रिपोर्ट के अनुसार, इस टीम में बैंक के दो अधिकारी, ट्रस्ट के दो प्रतिनिधि, दो प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड और अन्य कर्मचारी शामिल हैं. दान पेटियों को गिनती वाले कमरे में वापस लाने के बाद आगे की प्रक्रिया से पहले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारी उन्हें सील करते हैं.
दान संभालने के तरीके में बदलावहिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट ने दान संभालने के तरीके में भी बदलाव किया है. अब मंदिर के लगभग 40 दान-पात्रों को एक साथ खोलने के बजाय अलग-अलग दिनों में खाली किया जाता है. ट्रस्ट के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि इस कदम का मकसद हर दान-पात्र की बारीकी से जांच करना है. साथ ही उसे हटाने से लेकर पैसे की गिनती होने तक का विजुअल रिकॉर्ड रखना है.
अधिकारियों ने बताया कि इन बदलावों का मकसद मंदिर के दान प्रबंधन सिस्टम में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता का भरोसा बढ़ाना है. यह कड़ी निगरानी ऐसे समय में की जा रही है जब SIT, दान की कथित चोरी की जांच कर रहे हैं. साथ ही जांचकर्ता 'सौंदर्य कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स' के वित्तीय लेन-देन की जांच कर रहे हैं. यह फर्म मुख्य आरोपी राम शंकर टिन्नू यादव की पत्नी पूनम देवी के नाम पर रजिस्टर्ड है.
जांच का मकसद यह पता लगाना है कि क्या कथित गबन से इसका कोई संबंध है. जांच अधिकारी और सर्कल ऑफिसर आशुतोष तिवारी ने स्टेट टैक्स डिपार्टमेंट से फर्म का विस्तृत रिकॉर्ड मांगा है. साथ ही विभाग ने संबंधित दस्तावेज जुटाने शुरू कर दिए हैं.
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वहीं विवाद के कारण मंदिर ट्रस्ट में भी बदलाव हुए. मामला सामने आने के बाद चंपत राय समेत कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया. निगरानी के नए उपायों पर बात करते हुए दास ने कहा कि ट्रस्ट जहां भी जरूरी होगा, अपने सिस्टम में सुधार करता रहेगा. अब राम मंदिर से एक पैसा भी गायब नहीं हो सकता.
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