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पालकी से उतरकर 10 कदम पैदल क्यों नहीं चले? पता है इस सवाल पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने क्या कहा

अविमुक्तेश्वरानंद ने पालकी पर बैठकर स्नान करने से रोके जाने को शंकराचार्य का अपमान माना और प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठ गए. इस घटना को लेकर कई दिनों से जमकर बवाल मचा है.

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अविमुक्तेश्वरानंद ने पालकी विवाद पर अपनी बात कही है. (The Lallantop)

प्रयागराज में माघ मेला चल रहा है. 21 जनवरी 2025 को अखिल भारतीय संत समिति के स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने खुद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर एक सख्त टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि जब पूरे माघ मेले में सारे संत पैदल गंगा स्नान के लिए जा रहे थे तो आपको ही पालकी से जाने की क्या ‘चुल्ल’ थी? उनका ये बयान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के पालकी विवाद से जुड़ा है. माघ मेले में अपने शिष्यों के साथ पालकी पर बैठकर संगम स्नान के लिए जा रहे अविमुक्तेश्वरानंद को प्रशासन ने बीच रास्ते में ही रोक दिया और पैदल जाने के लिए कहा. 

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे शंकराचार्य का अपमान माना और प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठ गए. इस घटना को लेकर कई दिनों से जमकर बवाल मचा है. ये सवाल बार-बार किया जा रहा है कि अविमुक्तेश्वरानंद अगर 10 कदम पालकी से उतरकर पैदल चले जाते तो क्या हो जाता? जितेंद्रानंद सरस्वती का बयान भी इसी घटना की तीखी प्रतिक्रिया थी. वसंत पंचमी यानी 23 जनवरी 2026 को ‘दी लल्लनटॉप’ से बातचीत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी.

उनका कहना है कि वह माघ मेले में अक्सर पालकी से स्नान के लिए जाते रहे हैं. उन्हें किसी ने महाकुंभ से ठीक पहले 2024 के माघ मेले का वीडियो दिखाया है, जिसमें भी वह पालकी पर बैठकर ही स्नान करने जा रहे हैं. यानी ये परंपरा पहले से है. तब माघ मेला क्षेत्र में किसी तरह की अव्यवस्था या समस्या नहीं हुई और न ही उन्हें ऐसा करने से रोका गया तो इस बार ऐसा क्या हो गया कि उन्हें पालकी से उतरकर जाने के लिए कहा गया. 

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हालांकि, अविमुक्तेश्वरानंद ने ये कहा कि वह प्रशासन के कहे मुताबितक, पालकी से उतरकर भी स्नान के लिए जाने को तैयार थे. वह बस 5 मीटर और आगे तक पालकी से जाना चाहते थे लेकिन वह बात नहीं मानी गई और इससे उनका सम्मान खंडित हुआ. प्रशासन को घेरते हुए उन्होंने कहा, 

वो बातें फैला रहे हैं कि क्या 10 कदम पैदल नहीं जा सकते थे. हम ये कह रहे थे कि पालकी से तुम्हारे आदेश से नहीं उतरेंगे. अपने मन से उतरेंगे. वो जगह 5 मीटर की दूरी पर थी, जहां के लिए हम कह रहे थे कि वहां तक जाने दो. हम वहां से उतरकर पैदल जाएंगे. लेकिन उन्होंने 5 मीटर भी नहीं जाने दिया. वो जगह ऐसी थी कि जहां कोई जनता नहीं थी. वहां से गाड़ियां आ रही थीं. प्रेस की चार-पांच गाड़ियां भी वहां पार्क थीं. 

उन्होंने आगे कहा कि वह सिर्फ 5 मीटर तक जाने को कह रहे थे लेकिन उन्हें नहीं जाने दिया गया. अविमुक्तेश्वरानंद ने सवाल उठाते हुए कहा, 

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हम कह रहे थे कि वहां (5 मीटर) तक हमारी पालकी को जाने दिया जाए. वहां हम उतरेंगे. उसके पहले नहीं उतरेंगे, तो जो हमारा सम्मान है, उसको क्यों खंडित किया गया?

अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि हम जनता के साथ एकाकार होकर जा रहे थे लेकिन हमको रोक दिया गया. यह कहा गया कि पालकी पर जाने की ऐसी कोई परंपरा नहीं है. हमको एक इंटरनेट के जानकार व्यक्ति ने 2024 के माघ मेला के हमारे स्नान का वीडियो निकालकर दिखाया है. 2024 के माघ मेला में हम पालकी में ही बैठकर स्नान करने के लिए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि बार-बार यहां का प्रशासन कह रहा है कि हम परंपरा तोड़ रहे हैं लेकिन परंपरा का प्रमाण वो वीडियो है. 

वीडियो: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यूपी पुलिस और सतुआ बाबा के बारे में क्या बताया?

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