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CBSE के मैथ्स पेपर ने म्यूजिक सुना दिया, हजारों छात्र हुए 'Rickroll'!

सीबीएसई बोर्ड ने भी ये बात कबूल की है कि एग्जाम के कुछ पेपर्स में जो क्यूआर कोड लगा है, उससे यूट्यूब वीडियो लिंक है. लेकिन इसकी वजह से पेपर की प्रामाणिकता पर कोई असर नहीं पड़ता.

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CBSE बोर्ड के पेपर के क्यूआर कोड से खुल रहा यूट्यूब वीडियो (india today)

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन यानी CBSE की परीक्षा का प्रश्नपत्र चर्चा में है. उस पर एक क्यूआर कोड है, जिसे स्कैन करेंगे तो सीधे यूट्यूब पर पहुंच जाएंगे. वहां आपको एक अंग्रेजी गाना सुनने और देखने को मिलेगा. इस क्यूआर कोड को स्कैन करने से रिक एस्टली के गाने 'नेवर गोना गिव यू अप' का म्यूजिक वीडियो खुल जा रहा है. कई छात्रों ने यही दावा करते हुए क्वेश्चन पेपर का फोटो सोशल मीडिया पर डाला है. 

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CBSE बोर्ड ने भी ये बात कबूल की है कि एग्जाम के कुछ पेपर्स में जो क्यूआर कोड लगा है, उससे यूट्यूब वीडियो लिंक है लेकिन इसकी वजह के पेपर की प्रामाणिकता पर कोई असर नहीं पड़ता. क्वेश्चन पेपर एकदम असली है और इनकी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया गया.

क्या है मामला?

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ये पूरा मामला CBSE बोर्ड की 12वीं के मैथ्स पेपर को लेकर है. ये परीक्षा 9 मार्च को हुई थी. पेपर होने के बाद से ही प्रश्नपत्र के फोटो सोशल मीडिया पर फैल गए. छात्रों ने कहा कि इस पर लगे क्यूआर कोड को उन्होंने जैसे ही स्कैन किया, वो ‘रिकरोल्ड’ हो गए. यानी कोड स्कैन करते ही वो रिडायरेक्ट होकर यूट्यूब पर पहुंच गए, जहां रिक एस्टली का गाना 'नेवर गोना गिव यू अप' का म्यूजिक वीडियो खुल गया.

इसके बाद तो सोशल मीडिया पर CBSE ही छा गया. यूजर्स इससे हैरान तो हुए, लेकिन उन्होंने इसका खूब मजाक भी बनाया. किसी ने कहा कि यार CBSE वालों ने तो 12वीं के बच्चों को ही रिकरोल कर दिया. एक ने कहा कि इतने सारे लोगों को एक साथ रिकरोल होते आज तक नहीं देखा. ये अब तक का सबसे बड़ा रिकरोल है.     

ये ‘रिकरोल’ होना होता क्या है?

'रिकरोलिंग' एक तरह का सोशल मीडिया प्रैंक है. यानी ऐसा मजाक जिसमें आपको एक लिंक दिया जाएगा ये बताते हुए कि इसको खोलने से फलां चीज खुलेगी. लेकिन जैसे ही आप लिंक पर क्लिक करेंगे, Rick Astley के मशहूर गाने Never Gonna Give You Up का वीडियो खुल जाएगा. 

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जैसे किसी ने आपको एक लिंक भेजा और कहा कि इसमें भारत और न्यूजीलैंड के बीच हाल में खेले गए टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल मैच के हाइलाइट्स हैं. आपने लिंक क्लिक किया और बजने लगा गाना- Never gonna give you up. Never gonna let you down. Never gonna run around and desert you. Never gonna make you cry. बस यहीं आप ‘रिकरोल्ड’ हो गए.

सोशल मीडिया पर लोग यही कह रहे हैं कि CBSE ने तो 12वीं के हजारों बच्चों को एक साथ रिकरोल्ड कर दिया.  

बोर्ड क्या कह रहा है?

बोर्ड ये बात तो मान रहा है कि कुछ पेपर्स में क्यूआर कोड स्कैन करने पर गाने का वीडियो खुलता है, लेकिन उसका ये भी कहना है कि पेपर एकदम असली है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, CBSE ने कहा,

"कुछ क्वेश्चन पेपर्स के सेट में क्यूआर कोड यूट्यूब वीडियो से लिंक लगता है, लेकिन इससे प्रश्नपत्रों की प्रामाणिकता पर कोई असर नहीं पड़ता है. प्रश्नपत्र असली हैं और उनकी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया गया है."

ये बात सही है कि सारे ही पेपर्स के साथ ऐसा नहीं हुआ. इंडिया टुडे ने दिल्ली और एनसीआर के कई परीक्षा केंद्रों से गणित के प्रश्नपत्रों को देखा. यहां छात्रों ने बताया कि क्यूआर कोड उन्हें किसी बाहरी लिंक या वीडियो के बजाय ‘ए’ और ‘क्यू’ जैसे कोड तक ही ले जाता है. 

क्या करते हैं ये कोड?

अब ये भी सवाल होगा कि क्वेश्चन पेपर्स पर ये क्यूआर कोड क्यों होते हैं? CBSE के मुताबिक, बोर्ड की परीक्षा के प्रश्नपत्रों में कई तरह की सुरक्षा व्यवस्थाएं होती हैं. इनमें QR कोड भी शामिल होते हैं. इनका इस्तेमाल किसी तरह की गड़बड़ी या पेपर लीक का शक होने पर प्रश्नपत्र के असली होने की पुष्टि के लिए किया जाता है. यानी क्यूआर कोड स्कैन करके ये पता लगाया जा सकता है कि ये क्वेश्चन पेपर असली है या नकली. 

हर सेट के क्वेश्वन पेपर पर अलग-अलग क्यूआर कोड होता है. इसमें कई सारी जानकारियां एन्क्रिप्टेड होती हैं. जैसे परीक्षा की तारीख, पेपर का सेट कोड और उसकी लोकेशन. अगर ये पेपर लीक होता है तो क्यूआर स्कैन करके पता लगाया जा सकता है कि यह किस सेंटर से लीक हुआ. इसे किस बैच से छापा गया था और किस स्टूडेंट को दिया गया था. 

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