भारत ने अरुणाचल प्रदेश के नक्शे को अपडेट कर दिया है. 7 अगस्त को अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों और ज्योग्राफिकल लोकेशंस को Survey of India के आधिकारिक नक्शों में ऑफिशियली दर्ज यानी चिह्नित किया गया. सुनने में आपको ये सामान्य सी खबर लग रही होगी. लेकिन भारत सरकार की ओर से ये कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब अरुणाचल प्रदेश के कुछ जगहों को लेकर चीन की ओर से बार-बार दावे किए जा रहे हैं.
अरुणाचल के नक्शे में 27 जगहें जोड़ीं, भारत के इस कदम का संदेश बहुत बड़ा है
भारत ने अरुणाचल प्रदेश के आधिकारिक नक्शे में 27 जगहों और जियोग्राफिकल लोकेशंस को दर्ज किया है. इनमें LAC के पास के इलाके, 1962 की जंग से जुड़े स्थान और अहम सैन्य-लॉजिस्टिक पॉइंट शामिल हैं. सवाल ये है कि क्या भारत ने अपनी सीमा बदली है? और चीन के लगातार दावों के बीच इस मैप अपडेट का क्या मतलब है?

एक बात और ध्यान देने वाली है कि 7 अगस्त को भारत सरकार ने नक्शे को अपडेट किया है. इसके लगभग एक महीने बाद 12-13 सितंबर को ब्रिक्स (BRICS) समिट होने वाला है. उम्मीद है कि चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग भी समिट अटेंड करेंगे. खास बात ये भी है कि 18वें ब्रिक्स समिट को इंडिया चेयर कर रहा है.
इंडिया ने किन 27 जगहों को अपडेट किया है? क्या भारत ने अपनी सीमा बदल दी है? भारत सरकार ने इसके पीछे क्या कारण बताया है? अरुणाचल प्रदेश भारत के लिए कैसे सिग्नीफिकेंट है? उसके अलावा ये ब्रिक्स क्या है? भारत और चीन ब्रिक्स के लिए कैसे इम्पोर्टेंट हैं? ओवरऑल भारत के इस डिसीजन को कैसे देखा जा सकता है? एक-एक कर के समझते हैं.
कुछ जगहें लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के पास हैं. कुछ 1962 के भारत-चीन युद्ध से जुड़ी हैं और कुछ आज भी मिलिट्री एंड लॉजिस्टिक पॉइंट ऑफ व्यू से इम्पॉर्टेन्ट हैं. जैसे एक जगह है लोंगजू. ये LAC के पास लोकेटेड है. साल 1959 में यहां भारत और चीन के बीच तनाव पैदा हुआ था. इसी के पास माजा गांव है, जिसे अब सरकारी नक्शे में शामिल किया गया है.
ज़ो ला, रिज़ा ला, पुकुर ला. इसके अलावा थाग ला जैसे ऊंचाई वाले पहाड़ी दर्रे भी शामिल हैं. इनमें से थाग ला वो जगह है जहां 1962 के भारत-चीन युद्ध की शुरूआती लड़ाई हुई थी. आगे जयरामपुर भी इस लिस्ट में शामिल है. ये अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले में स्थित है. ये सुरक्षा बलों के लिए एक अहम लॉजिस्टिक्स और आवाजाही केंद्र है. एक और जगह है जसवंत गढ़ जो तवांग जाने वाली सड़क पर स्थित है. यहां 1962 के युद्ध के वीर सैनिक जसवंत सिंह रावत की स्मृति में एक स्मारक है.
लिस्ट में शेर-ए-थापा स्मारक भी शामिल है. ये 1962 के युद्ध के वीर सैनिक त्रिलोक सिंह थापा की स्मृति में बनाया गया है. कुल मिलाकर देखा जाए तो इन 27 जगहों में कुछ LAC से जुड़े इम्पोर्टेन्ट प्लेसेज हैं. कुछ 1962 के युद्ध के इतिहास से जुड़े हैं. कुछ पहाड़ी दर्रे और झील जैसे ज्योग्राफिकल लोकेशंस हैं. और कुछ आज के समय में सुरक्षा और सैनिकों की आवाजाही के लिए इम्पोर्टेन्ट सेंटर हैं.

अब उस बात को जान लेते हैं कि भारत सरकार ने ऐसा करने के पीछे क्या कारण दिए है? मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स ने अपने स्टेटमेंट में कहा,
क्या भारत ने कोई बदलाव किया?इन जगहों को सर्वे ऑफ इंडिया के अरुणाचल प्रदेश के आधिकारिक नक्शे में दर्ज करने का उद्देश्य ये है कि इनकी सही पहचान हो सके, और आम लोगों को इन जगहों के बारे में ज्यादा जानकारी मिल सके.
यहां एक सवाल आता है कि क्या भारत ने अपनी सीमा बदल दी है? जवाब है नहीं. इस अपडेट को नई सीमा खींचने के रूप में नहीं समझना चाहिए. अरुणाचल प्रदेश पहले से ही भारत का हिस्सा है. नए मैप अपडेट का मुख्य उद्देश्य है, पहले से भारतीय माने जाने वाले क्षेत्रों को ऑफिशियल मैप में स्पष्ट और स्टैंडर्डाइज्ड तरीके से दर्ज करना. सीधे शब्दों में बॉउंड्री बदली नहीं है; मैप में लोकेशंस की ऑफिशियल रेप्रेसेंटेशन ज्यादा क्लियर हुई है.

लेकिन इस पूरे कदम को केवल मैप अपडेट के नज़रिए से नहीं देखा जा सकता. जैसा कि हमने शुरुआत में ही बताया कि अरुणाचल प्रदेश के कुछ जगहों पर चीन अपने दावे करता रहा है. जैसे चीन अरुणाचल प्रदेश को ज़ांगनान कहता है. ऐसे में इस कदम से भारत इनडाइरेक्ट तरीके से ये बताना चाह रहा है कि ये दिखाए गए हिस्से भारत के हैं और इन सबका ऑफिशियल रिकॉर्ड भी भारत के पास है.
क्यों अहम है अरुणाचल प्रदेश?यहां एक सवाल आता है कि अरुणाचल प्रदेश इंडिया के लिए किस तरीके से एक अहम राज्य है? रिसर्च पेपर ARUNACHAL PRADESH AND NATIONAL SECURITY: INDIA’S SECURITY MEASURES AMIDST BORDER DISPUTES WITH CHINA के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश भारत के लिए एक स्ट्रेटेजिक डिफेंस जोन है. अरुणाचल प्रदेश में इंडो-चाइना बॉर्डर 1126 किलोमीटर है, जो कि 12 जिलों को कवर करता है. लंबी सीमा क्षेत्र होने की वजह से किसी भी तनाव का सीधा असर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है.
उसके साथ ही भारत सरकार यहां पर लगातार इंफ्रास्ट्रचरल डेवलपमेंट कर रही है. जैसे Vibrant Villages Programme जिसके जरिए सीमा के गांवों में सड़क, बिजली और दूसरी सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं. इसका उद्देश्य ये भी है कि सीमा के गांव खाली न हों और वहां लोगों की मौजूदगी बनी रहे. जब आप लिस्ट देखेंगे तो उसमें एक जगह जयरामपुर का भी नाम है, जो कि एक लॉजिस्टिक हब है. मतलब यहां से सैनिकों, ईंधन, हथियार और दूसरी जरूरी चीजों को पहुंचाने में मदद मिलती है. इस तरीके से हम देख सकते है कि सुरक्षा की नज़र से अरुणाचल प्रदेश कितना इम्पोर्टेन्ट है.
(यह भी पढ़ें: भारत-चीन सैनिकों के बीच ‘फेसऑफ’ का दावा, आखिर इसका मतलब क्या होता है?)
BRICS क्या है?शुरुआत में हमने ब्रिक्स का ज़िक्र किया था. BRICS दुनिया की कुछ बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों का समूह है, जो आर्थिक और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर मिलकर काम करते हैं. BRICS नाम सदस्य देशों के नाम के पहले अक्षरों से बना था.
B = Brazil (ब्राज़ील)
R = Russia (रूस)
I = India (भारत)
C = China (चीन)
बाद में 2010 में South Africa भी इसमें शामिल हुआ. फिर BRICS का और विस्तार हुआ और Egypt, Ethiopia, Iran, United Arab Emirates और Indonesia जैसे देश भी इसके सदस्य बन गए.
भारत-चीन को ट्विन पिलर ऑफ़ ब्रिक्स कहा जाता है. जैसे भारत ग्लोबल साउथ देशों के डेवलपमेंट की बात करता है. वैसे ही चीन De-dollarization यानी कि इंटरनेशनल ट्रेड में अमेरिकी डॉलर पर डिपेंडेंसी कम करने की बात करता है. एक प्रकार से देख सकते हैं कि दोनों देश वेस्टर्न कॉन्ट्रीज पर डिपेंडेंसी कम करने पर जोर देते हैं. चीन ब्रिक्स ग्रुप का लार्जेस्ट इकोनॉमी वाला देश है. इसलिए चीन बहुत सारे मेंबर कॉन्ट्रीज का ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट पार्टनर है. वहीं भारत बहुत तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है. भारत की ग्रोथ से BRICS की आर्थिक ताकत बढ़ती है और दुनिया भारत की वजह से BRICS को एक इम्पोर्टेन्ट इकोनॉमिक ग्रुप मानती है.
अब अंत में ये सवाल कि नक़्शा क्यों इम्पोर्टेन्ट है? नक्शा किसी देश की ऑफिशियल पोजिशन दिखाता है. अगर किसी गवर्नमेंट मैप में किसी गांव, पहाड़, दर्रा को किसी नाम और सीमा के भीतर दिखाया जाता है, तो वह उस देश की एडमिनिस्ट्रेटिव और टेरिटोरियल पोजिशन बन जाता है. इसलिए किसी स्टेट पर कोई और देश दावा कर रहा है तो वहां मैप केवल जिओग्राफी का हिस्सा नहीं होता बल्कि उस देश का पॉलिटिकल पोजिशन भी दिखाता है.
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