अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी के खिलाफ अमेरिकी अदालत ने सारे चार्जेज ख़त्म कर दिए हैं. इस हाई प्रोफाइल ‘वायर धोखाधड़ी’ केस को हमेशा के लिए क्लोज़ कर दिया गया है. पिछले हफ्ते, अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने अडानी और उनके सहयोगियों के खिलाफ चल रहे एक अन्य सिविल फ्रॉड के मामले को भी सुलझाया था.
अमेरिका में अडानी के खिलाफ सारे केस बंद, ट्रंप के करीबी वकील ने बड़ी राहत दिला दी
Gautam Adani case closed: गौतम अडानी के खिलाफ हाई प्रोफाइल 'वायर धोखाधड़ी' केस को हमेशा के लिए क्लोज़ कर दिया गया है. पिछले हफ्ते, अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने अडानी और उनके सहयोगियों के खिलाफ एक सिविल फ्रॉड के मामले को भी सुलझाया था.


इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत में दायर दस्तावेजों से पता चला कि सिविल फ्रॉड मामले में गौतम अडानी ने 60 लाख अमेरिकी डॉलर और उनके भतीजे सागर अडानी ने 120 लाख अमेरिकी डॉलर का भुगतान करने पर सहमति जताई, बिना किसी भी तरह की गलती स्वीकार किए या इनकार किए. अडानी ग्रुप पर ये भी आरोप लगे थे कि उन्होंने LPG आयात में ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन किया है. लेकिन अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने इस मामले को भी सुलझा लिया है. अब, न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले के अमेरिकी अभियोक्ताओं ने गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अदानी के खिलाफ सभी आरोप हटा दिए हैं.
क्या आरोप लगे?ब्रुकलिन अटॉर्नी ऑफिस ने अडानी और उनके सहयोगियों पर भारत में सोलर एनर्जी कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए 265 मिलियन डॉलर रिश्वत लेने का आरोप लगाया था. साथ में ये भी आरोप थे कि अमेरिकी निवेशकों से पैसे जुटाते समय इस बात को छिपाया गया था. अडानी ग्रुप इन आरोपों को खारिज करता रहा है. हालांकि, गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी अब तक इस मामले में अमेरिकी अदालत में पेश नहीं हुए हैं. उनके वकीलों ने अदालत में ये दलील दी थी कि अमेरिकी रेगुलेटर्स के पास इस मामले में जरूरी अधिकार क्षेत्र नहीं हैं और लगाए गए आरोप कानूनी तौर पर टिकाऊ नहीं हैं.
एक आरोप ये भी लगा कि अडानी और उनके सह-आरोपियों ने कथित भ्रष्टाचार से संबंधित जानकारी को छिपाते हुए निवेशकों से 3 अरब डॉलर से अधिक की धनराशि जुटाई थी.
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अडानी को क्या फायदा होगा?रिपोर्ट के मुताबिक, गौतम अडानी को राहत दिलाने के पीछे उनके वकील रॉबर्ट गुफ्रा जूनियर हैं. वो राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के करीबी वकीलों में गिने जाते हैं. ट्रंप प्रशासन के इस फैसले के बाद अडानी समूह के रुके हुए ग्लोबल प्लांस को विस्तार मिलेगा. उनके वकील ने कोर्ट में बताया था कि भारतीय अरबपति ने अमेरिका में 10 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई थी, लेकिन कानूनी मामलों के अनसुलझे रहने के कारण वह आगे नहीं बढ़ सकते थे.
अडानी ग्रुप पहले दिन से इन आरोपों से इनकार करता रहा है. इन मामलों के खत्म होने से अडानी ग्रुप के लिए इंटरनेशनल कैपिटल मार्केट के दरवाजे फिर से खुल जाएंगे. इससे ग्रुप को अपनी विस्तार की योजनाओं को अग्रेसिव स्ट्रैटजी के साथ आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.
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