समाजवादी पार्टी (SP) के चीफ अखिलेश यादव ने राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच के लिए बनी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) पर सवाल उठाए हैं. सपा मुखिया ने सरकार पर सनातन धर्म का अपमान करने का आरोप लगाया. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारियों का पुजारियों की जांच करना सनातन धर्म का अपमान है. यह बयान उत्तर प्रदेश सरकार के मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ियों के आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली SIT बनाने के बाद आया है.
'पुजारियों की जांच अफसरों से कराना सनातन का अपमान', राम मंदिर दान चोरी पर बोले अखिलेश यादव
Ram Mandir Donation: श्री राम जन्मभूमि न्यास समिति के महासचिव चंपत राय ने 7 जून को चंदा चोरी के आरोपों को खारिज कर दिया था. Akhilesh Yadav ने उसी दिन चंपत राय की सफाई पर सवाल खड़े किए. अब अखिलेश ने सरकार पर सनातन का अपमान करने का आरोप लगाया है.


14 जून को अखिलेश यादव आगरा में आयोजित विजन इंडिया कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए. प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक पत्रकार ने उनसे चंदा चोरी को लेकर सवाल पूछा. अखिलेश ने जवाब देते हुए कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे में चोरी की बात सामने आने के बाद अब मंदिर और साधुओं की जांच अफसर करेंगे, इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है.
अखिलेश बोले- 'सनातन का अपमान'आजतक से जुड़े नितिन उपाध्याय की रिपोर्ट के मुताबिक, अखिलेश यादव ने इसे सनातन धर्म का अपमान बताया. अखिलेश ने कहा,
"मर्यादा पुरुषोत्तम राम के चढ़ावे में अगर कोई बात हुई है, तो कैमरा बंद करके आपस में बातचीत कर लें. और कैमरा बंद करके, आंखें बंद करके जो चढ़ावा चोरी हुआ, वो वापस रख दो. भगवान प्रभु श्रीराम माफ कर देंगे."
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 13 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी बनाई गई. इस टीम की अगुवाई लखनऊ मंडल के कमिश्नर विजय विश्वास पंत कर रहे हैं. टीम में लखनऊ रेंज की आईजी किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरतन कुमार भी शामिल हैं. सरकार ने एसआईटी को 7 दिन में शुरुआती रिपोर्ट और 15 दिन में अंतिम रिपोर्ट देने को कहा है.
क्या है पूरा विवाद?विवाद तब शुरू हुआ जब 7 जून को एक पोस्ट में अखिलेश यादव ने राम मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों रुपये की चोरी का आरोप लगाया. अयोध्या से पूर्व सपा विधायक पवन पांडे ने भी राम मंदिर की दानपेटी से करीब 7 करोड़ रुपये के गबन का दावा किया. 7 जून के ही पोस्ट में अखिलेश ने राम मंदिर ट्रस्ट पर सवाल उठाए और कोर्ट से संज्ञान लेने को कहा.

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है. 7 जून को ही श्री राम जन्मभूमि न्यास समिति के महासचिव चंपत राय ने सफाई दी. उन्होंने कहा कि मंदिर के नियमित ऑडिट में किसी तरह की गड़बड़ी सामने नहीं आई है. अखिलेश ने उसी दिन चंपत राय की सफाई को खारिज कर दिया. उन्होंने चंपत राय के बयान की टाइमिंग पर भी सवाल उठाए.
नृपेंद्र मिश्रा कुछ भी बोलने से बचेफिर 13 जून को राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र अयोध्या पहुंचे. उन्होंने कहा कि उनकी भूमिका केवल मंदिर निर्माण तक सीमित है. उन्होंने राम मंदिर के दान में किसी भी कथित हेराफेरी पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
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आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, 10 जून को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कबूल किया कि योगी सरकार मामले की जांच करा रही है. फिर आई 13 जून की तारीख, इस दिन अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के चंदे और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली SIT बनाई है.
जांच के दौरान 13 जून को मंदिर में चढ़ावे के पैसे गिनने वाले कर्मचारी लवकुश मिश्रा के घर से करीब 10 लाख रुपये नकद मिले. रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ पैसे घर की आलमारी में रखे थे, जबकि कुछ रकम गोबर के ढेर में छिपाकर रखी गई थी. अधिकारी ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि ये पैसे कहां से आए.
मामले में एक और कर्मचारी को संदेह के आधार पर हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है. दोनों कर्मचारियों की जिम्मेदारी मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती और उससे जुड़े काम की थी. फिलहाल अब सबकी नजर SIT की जांच पर है.
वीडियो: राम मंदिर से चढ़ावा चोरी के मामले में SIT का गठन


















