बिहार के समस्तीपुर ज़िले में केंद्र सरकार के पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि डिप्टी CM के करीबी की साढ़े 10 बीघा ज़मीन को बचाने के लिए एक्सप्रेसवे का रूट बदल दिया गया. और अब इसकी क़ीमत 150 घरों, दर्ज़नों दुकानों और 6 हज़ार छात्रों वाले कॉलेज को चुकानी पड़ रही है.
बिहार के डिप्टी सीएम के करीबी की जमीन बचाने को एक्सप्रेसवे का रूट बदला? 150 घर दांव पर लगे
बिहार के Greenfield Expressway को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. जहां स्थानीय लोगों का दावा है कि उपमुख्यमंत्री के करीबी को लाभ पहुंचाने के लिए इस प्रोजेक्ट में बदलाव किया गया है. अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इसपर अपनी प्रतिक्रिया दी है.


इंडियन एक्सप्रेस में छपी पत्रकार संतोष सिंह की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में ये मामला खुला. स्थानीय लोगों का दावा है कि एक्सप्रेसवे के करीब 5 किलोमीटर के हिस्से का तय रास्ता मनमाने ढंग से, राजनीतिक दबाव में बदल दिया गया है. लोगों ने आरोप लगाया कि ऐसा बिहार के डिप्टी सीएम और सरायरंजन से JDU विधायक ‘विजय कुमार चौधरी’ के एक करीबी, और दूर के रिश्तेदार को फ़ायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है.
डिप्टी CM ने आरोपों पर क्या कहा?रिपोर्ट के मुताबिक, विनीत ईश्वर उर्फ ‘बॉबी ईश्वर’ और उनके परिवार की करीब साढ़े 10 बीघा ज़मीन पहले वाले रूट में आ रही थी. लेकिन अगर नया रूट लागू होता है, तो 65 साल पुराने ‘केदार संत रामाश्रय कॉलेज’ का एक हिस्सा, 150 से ज़्यादा घर और कई दुकानें ध्वस्त की जा सकती हैं. इस कॉलेज में 6 हज़ार से ज़्यादा छात्र पढ़ाई करते हैं. लेकिन उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने इन आरोपों को सिरे से नकारा है.
अखबार से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैंने किसी तरह का राजनीतिक प्रभाव इस्तेमाल नहीं किया है. सरायरंजन के सभी लोग मेरे अपने हैं. एलाइनमेंट बदला है या नहीं, ये पूरी तरह NHAI (नेशनल हाईवेज़ बनाने वाली सरकारी अथॉरिटी) को बताना है. ये मेरा अधिकार क्षेत्र नहीं है.”
वहीं, जिनके लिए कथित तौर पर ये रूट बदले जाने का आरोप है यानी बॉबी ईश्वर ने भी आरोपों को खारिज किया. उनके मुताबिक, बदले गए रास्ते में भी उनकी 6 बीघा ज़मीन आ रही है. अगर उन्हें ज़मीन बचाना होता तो इसे भी बचा लेते.
इस मामले में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का भी बयान आया. उन्होंने कहा, “ रूट केंद्र सरकार नहीं बल्कि राज्य सरकार तय करती है. हम इस मामले को देखेंगे और लोगों की चिंताओं का समाधान करेंगे. हमने NHAI और बिहार के रोड कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट से कथित बदलाव की जांच करने को कहा है.”
NHAI का भी रुख इस मामले को लेकर पॉजिटिव नहीं है. NHAI के Bihar Regional Officer, एनएल येओटकर ने बताया कि नियमों के मुताबिक़, एक बार नोटिफिकेशन जारी होने के बाद एलाइनमेंट (तय रास्ता) नहीं बदला जा सकता. अगर ओरिजनल एलाइनमेंट में कोई बदलाव हुआ है, तो ये गंभीर मामला है.
ये पूरा मामला सरायरंजन इलाक़े का है, जो समस्तीपुर की उजियारपुर लोकसभा सीट में आता है. यहां के सांसद हैं – नित्यानंद राय. जो खुद, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हैं. मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि वो इस मामले से वाकिफ हैं. उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के सामने ये मामला रखा है.
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इससे पहले भी मामले सामने आएNHAI के नियम के मुताबिक, जब किसी एक्सप्रेसवे को घनी आबादी वाले इलाकों से बचाकर खेतों और खाली ज़मीन से निकालने की कोशिश हो तो उसे ग्रीनफिल्ड एक्सप्रेसवे कहते हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक़, मार्च 2025 की शुरुआती Gazette Notifications में रूट अलग थी. लेकिन मार्च 2026 की तीसरी Gazette Notification में 48 से 53 किलोमीटर के बीच रूट बदलकर, नए प्लॉट शामिल कर दिए गए. 237 प्लॉट्स में से 224 निजी ज़मीनें हैं. इनमें झखरा का डिग्री कॉलेज भी शामिल है.
ऐसा ही एक और मामला मध्यप्रदेश के भोपाल से भी आया था. 50 IAS और IPS अधिकारियों ने बहुत सस्ते दाम पर 2022 में एक सिंगल ट्रांसैक्शन के ज़रिए कृषि-भूमि खरीदी. इसके ठीक दो साल के बाद, वहां 3,200 करोड़ रुपए का एक बाईपास प्रोजेक्ट अप्रूव होता है. इस प्रोजेक्ट की बदौलत, अफ़सरों की कृषि भूमि के दाम आसमान छूने लगते हैं. और ये पूरा मामला खुलता है – मई 2026 में. फिलहाल दोनों ही मामलों में जांच चल रही है.
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