सिख कौम की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को ‘खालसा पंथ विरोधी’ और ‘गुरु विरोधी’ घोषित किया है. अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने अमृतसर स्थित गोल्डेन टेंपल के अकाल तख्त सचिवालय की फसील (प्राचीर) से ये फैसला सुनाया.
'मुंह नहीं लगाना', अकाल तख्त ने CM भगवंत मान को 'खालसा विरोधी' घोषित किया, वजह ये वीडियो है
सिख समुदाय की सबसे बड़ी धार्मिक गद्दी अकाल तख्त ने पंजाब के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता भगवंत मान को ‘खालसा पंथ विरोधी’ और ‘गुरु विरोधी’ घोषित क़रार दिया है. अकाल तख्त ने ये फैसला मुख्यमंत्री मान के एक कथित वीडियो के आधार पर लिया है, जिसमें वे सिख धर्म के गुरुओं की बेअदबी कर रहे थे.


इसके साथ ही अकाल तख्त ने पूरे खालसा पंथ और गुरु नामलेवा सिख संगत से भगवंत मान को ‘मुंह नहीं लगाने’ की बात कही है. यानी सिखों से मुख्यमंत्री मान के सामाजिक और धार्मिक बहिष्कार की अपील की गई है. 15 जून को अकाल तख्त के पांच सिंह साहिबानों (उच्च पुजारियों) की बैठक के बाद अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने ये फैसला सुनाया. उन्होंने कहा,
हमने मुख्यमंत्री से उस वीडियो के बारे में सवाल किया. उन्होंने दावा किया कि वह AI से बनाया गया था. हमने उनसे इसका सबूत मांगा. लेकिन छह महीने तक कोई जवाब नहीं मिला. फिर हमने भारत सरकार से मान्यता प्राप्त दो लैब से उस वीडियो की जांच कराई, इसमें पता चला कि वीडियो न तो नकली है और न ही AI से बनाया गया है. आज (15 जून) 'पंथ' ने इस मामले पर एक्शन लिया और फैसला सुनाया.
जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने आगे कहा,
भगवंत मान ने अकाल तख्त पर झूठ बोला. उन्हें गुरु के सामने दोषी या गुरु विरोधी घोषित किया गया है. पंथ और गुरु के अनुयायियों का उनसे कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए.
अकाल तख्त से क्यों मिली मान को सजा?
कारण नंबर 1 - अक्टूबर 2005 में एक वीडियो वायरल हुआ. कनाडा में रहने वाले NRI जगमनदीप सिंह ने ये वीडियो जारी किया था. वीडियो में एक शख्स दिखाई दे रहा था. उसकी शक्ल भगवंत मान से मिलती जुलती थी. उसके हाथ में शराब का गिलास था. वीडियो में वो शख्स सिख गुरुओं और सिख धर्म से जुड़ी दूसरी हस्तियों की फोटो (पोट्रेट्स) के सामने खड़ा था. और कथित तौर पर उन पर गिलास से शराब के छींटे मार रहा था.
वीडियो वायरल होने के बाद से दावे किए जाने लगे कि इसमें दिख रहे व्यक्ति सीएम भगवंत मान हैं. तभी सीएम ने सफाई दी कि वीडियो AI जेनरेटेड और डीपफेक है. लेकिन अकाल तख्त ने इस वीडियो को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा. दो अलग-अलग लैब्स में. दोनों की ही जांच रिपोर्ट में कहा गया कि वीडियो AI नहीं है, बल्कि असली है. रिपोर्ट आने के बाद श्री अकाल तख़्त साहिब ने सीएम भगवंत मान के दावे को खारिज कर दिया. और उनको सजा सुनाई.
कारण नंबर दो - अप्रैल 2026 में भगवंत मान सरकार ने बेअदबी से जुड़ा एक क़ानून पास किया था. इसे लेकर मान सरकार पर आरोप लगाए कि उन्होंने इस क़ानून के बाबत सिख समुदाय के गुरुओं-संतों से परामर्श नहीं किया था. अब आज 15 जून को सज़ा सुनाते समय अकाल तख्त ने ये भी कहा कि जिन भी सिख विधायकों ने बेअदबी से जुड़े कानून पर दस्तखत किए थे, वो 29 जून को गद्दी के सामने पेश हों.
आम आदमी पार्टी की क्या प्रतिक्रिया है?
पंजाब सरकार में मंत्री हरपाल चीमा ने अकाल तख्त के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जत्थेदार द्वारा मुख्यमंत्री भगवंत मान पर लगाए गए आरोप झूठे हैं. हरपाल चीमा ने आगे कहा,
उन्हें (जत्थेदार) ऐसा कहने का कोई अधिकार नहीं है. हम इस मामले की कानूनी तौर पर जांच कर रहे हैं.
इस बीच पंजाब में AAP के प्रवक्ता बलतेज पन्नू ने सवाल उठाया कि यदि ये मान भी लिया जाए कि वायरल वीडियो सही है, फिर भी ये साबित नहीं होता कि उस वीडियो में दिख रहा शख्स कौन है? उन्होंने कहा,
वीडियो में कौन है ये साफ नहीं है. वीडियो में दिख रहे शख्स और CM की लंबाई चर्चा का विषय है. ऐसा लगता है कि ये पूरा अभियान CM को बदनाम करने के लिए चलाया जा रहा है.
कांग्रेस और बीजेपी ने की इस्तीफे की मांग
पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग ने अकाल तख्त के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए सीएम भगवंत मान से तुरंत इस्तीफा देने की मांग की है. उन्होंने एक्स पर लिखा,
अकाल तख्त ने कथित वीडियो की फॉरेंसिक जांच के बाद भगवंत मान को 'तनखैया' घोषित कर दिया है. और सिख संगत को उनसे दूर रहने की अपील की गई है. इतने गंभीर फैसले के बाद भगवंत मान ने अपना नैतिक अधिकार खो दिया है. अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्च सत्ता, मर्यादा और सिख भावनाओं का सम्मान करते हुए उनको तुरंत मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.
पंजाब बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष केवल ढिल्लों ने अकाल तख्त के फैसले को सबसे ऊपर बताते हुए भगवंत मान को इस्तीफा देने की सलाह दी है. उन्होंने कहा,
अकाल तख्त साहिब सबसे ऊपर हैं. हम सभी इनके आदेशों को मानते हैं. अब तख्त साहिब ने जो भी निर्देश दिए हैं, उसको मानते हुए मुख्यमंत्री को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए. उन्होंने पहले पंजाब के साथ गद्दारी की और अब पंथ के साथ गद्दारी की है.
अब भगवंत मान के साथ क्या होगा?
सिख धर्म के जानकारों के मुताबिक, यदि किसी व्यक्ति को अकाल तख्त गुरु-दोषी या पंथ विरोधी घोषित करता है, तो सिख समुदाय उस व्यक्ति से सामाजिक और धार्मिक दूरी रख सकता है. धार्मिक मंचों पर ऐसे व्यक्ति का विरोध हो सकता है. ये फैसला सामाजिक और धार्मिक स्तर पर ही होता है. इसके कोई कानूनी मायने नहीं होते.
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