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केंद्र की हिस्सेदारी वाली कंपनी का 40 लाख टन कोयला 'चोरी'

केंद्रीय कोयला मंत्री जी किशन रेड्डी ने तेलंगाना सरकार को चिट्ठी लिखी है. इसमें उन्होंने सिंगरेनी कोलियरीज से कथित तौर पर करीब 40 लाख टन कोयला गायब होने की खबरों की जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि इन खबरों से कंपनी की आर्थिक स्थिति को नुकसान पहुंचेगा.

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केंद्र सरकार ने तेलंगाना सरकार को पत्र लिखकर SCCL से कोयला चोरी का मुद्दा उठाया है. (इंडिया टुडे)

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  • केंद्रीय कोयला मंत्री जी किशन रेड्डी ने 10 जून 2026 को तेलंगाना के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) में कथित 40 लाख टन कोयले की चोरी की जांच कराने का आदेश दिया।
  • तेलंगाना सरकार और केंद्र सरकार के संयुक्त स्वामित्व वाली SCCL को लेकर मीडिया में 40 लाख टन कोयले के गायब होने की खबरें आईं, जिसके कारण कंपनी की आर्थिक स्थिति कमजोर होने का खतरा उत्पन्न हुआ।
  • मंत्री किशन रेड्डी ने राज्य सरकार से टेक्नोलॉजी बेस्ड मॉनिटरिंग टूल का उपयोग करके SCCL की आंतरिक नियंत्रण प्रणाली की समीक्षा और सुधार करने का सुझाव दिया है, जिससे कंपनी की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाई जा सके।

सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL). ये एक सरकारी कंपनी है. कोयला खनन का काम करती है. तेलंगाना सरकार और केंद्र सरकार दोनों संयुक्त तौर पर इसके मालिक हैं. पिछले दिनों तमाम मीडिया रपटों में ये कंपनी चर्चा में रही. वजह? कथित तौर पर करीब 40 लाख टन कोयले की चोरी. अब कोयला मंत्री जी किशन रेड्डी ने इन खबरों का संज्ञान लिया है. उन्होंने तेलंगाना सरकार को चिट्ठी लिखकर इन रपटों का जिक्र कर तुरंत मामले की जांच की मांग की है.

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‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने 10 जून, 2026 को तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को पत्र लिखा. इसमें उन्होंने कहा,

अलग-अलग न्यूजपेपर्स में 40 लाख टन कोयले के गायब होने की खबर छपी है, जिसकी कीमत 1600 करोड़ रुपये है. इससे कंपनी को भारी घाटा होने की बात चल रही है.

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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पहले से ही तेलंगाना सरकार के पास SCCL का 51,500 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है. ऐसे में अगर इन आरोपों की तुरंत जांच नहीं हुई और इस पर एक्शन नहीं लिया गया, तो इससे कंपनी की आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है. साथ ही भविष्य में इसके विकास और स्थिरता में भी रुकावट आ सकती है.

केंद्र और तेलंगाना सरकार मिलकर SCCL को चलाते हैं. तेलंगाना सरकार के पास कंपनी की 51 फीसदी हिस्सेदारी है. वहीं केंद्र सरकार के पास 49 फीसदी हिस्सेदारी है. जी किशन रेड्डी ने चिट्ठी में लिखा, 

मैं अनुरोध करता हूं कि इस मामले में तुरंत जांच की जाए ताकि यह पता चल सके कि कथित गड़बड़ियों के दावे में कितनी सच्चाई है. साथ ही ये भी देखा जा सके कि SCCL के काम करने के लिए जरूरी सिक्योरिटी सिस्टम और इंटरनल कंट्रोल है या नहीं.

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केंद्रीय मंत्री ने सुझाव दिया है कि राज्य सरकार को SCCL में चल रही गड़बड़ियों का पता लगाने और उनको दुरुस्त करने के लिए टेक्नोलॉजी बेस्ड मॉनिटरिंग टूल का इस्तेमाल करना चाहिए. और टाइम टू टाइम रिव्यू करने के बारे में भी सोचना चाहिए.

उन्होंने कहा कि ऐसे उपायों से सिस्टम की कमियां दूर होंगी और SCCL की काम करने की क्षमता, ट्रांसपैरेंसी और विश्वसनीयता बढ़ेगी. जी किशन रेड्डी ने कंपनी को सही ढंग से चलाने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत तौर पर हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है. ताकि कंपनी से जुड़े सभी कर्मचारियों का भविष्य दांव पर नहीं लगे. 

वीडियो: जमीन के नीचे कोयला खदानों के मजदूरों की जिंदगी कैसी है? कैमरे पर सब दिख गया

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