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'इतिहास के साथ छेड़छाड़...' मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिली नग्न मूर्ति को NCERT ने कपड़े पहना दिए

इतिहासकारों ने NCERT पर इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया है. कक्षा 9 की किताब में Mohenjodaro (मोहनजोदड़ो) की खुदाई से मिली 'नर्तकी' की मूर्ति के धड़ को शेडिंग से ढका गया है. NCERT का इस पर जवाब भी आया है.

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NCERT पर मूर्ति के मूल स्वरूप में बदलाव करने का आरोप है. (फोटो: ITG)

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  • NCERT की कक्षा 9 की इतिहास की किताब में मोहनजोदड़ो की नर्तकी मूर्ति की फोटो में उसके धड़ को ढक दिया गया है, जो पहले खुले स्वरूप में दिखती थी।
  • इस बदलाव के पीछे विवाद यह है कि मूर्ति की मूल नग्नता को छुपाकर छात्राओं को एक संशोधित और सेंसर की गई छवि प्रस्तुत की गई है।
  • इतिहासकारों ने इस बदलाव को लेकर NCERT की आलोचना की है और कहा है कि इससे छात्रों को वास्तविक इतिहास की झूठी छवि मिलती है, जो विवाद को बढ़ा सकता है।

‘करप्शन इन ज्यूडिशरी’ पर लिखे गए एक चैप्टर को लेकर अभी कुछ दिन पहले ही NCERT पर सवाल उठे थे. अब एक बार फिर यह सवालों के घेरे में है. NCERT पर इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगा है. 9वीं कक्षा की एक किताब में नर्तकी की मूर्ति की फोटो बदले हुए रूप में छापी गई है. कांसे की यह मूर्ति मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिली थी. 

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द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कक्षा 9 की किताब में 'मधुरिमा' के पहले चैप्टर 'हिस्ट्री ऑफ आर्ट्स' में नर्तकी की एक फोटो छपी है. इसमें मूर्ति के कंधे से नीचे का हिस्सा ढक दिया गया है. जबकि मूल मूर्ति में यह हिस्सा खुला दिखाई देता है. इस बदलाव का असर ये हुआ कि इससे मूर्ति की शारीरिक बनावट छिप गई है. ऐसा भ्रम पैदा हो रहा है कि मूर्ति ने कपड़े पहने हुए हैं. 

NCERT covers up Mohenjodaro’s Dancing Girl
नई किताब में मूर्ति को कपड़े पहनाए गए हैं.
पहली बार हुआ यह बदलाव

25 साल से छप रही इस कांस्य मूर्ति के मूल स्वरूप में पहले कभी बदलाव नहीं किया गया था. फिर चाहे यूपीए की सरकार रही हो या एनडीए की. इससे पहले एनडीए सरकार के दौरान भी, जब मुरली मनोहर जोशी शिक्षा मंत्री थे, तब भी किताबों में इस मूर्ति की मूल तस्वीर ही छपती थी. इतिहास में पहली बार इसके धड़ को ढकने की कोशिश की गई है.

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NCERT covers up Mohenjodaro’s Dancing Girl
कांसे की यह मूर्ति मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिली थी. (फोटो साभार: Wikiedia Commons)

लगभग चार इंच ऊंची यह मूर्ति नई दिल्ली के नेशनल म्यूजियम में भी रखी हुई है. जो हड़प्पा सभ्यता के उन्नत धातु विज्ञान का प्रतीक है. इस मूर्ति में एक लड़की को आत्मविश्वासपूर्ण मुद्रा में दिखाया गया है. जिसके बाल जूड़े में बंधे हैं और उसने हाथों में चूड़ियां-कंगन और गले में हार पहन रखा है. 

इतिहासकारों ने की आलोचना

मूर्ति के मूल स्वरूप के साथ छेड़छाड़ को लेकर इतिहासकार NCERT पर सवाल उठा रहे हैं. इस बदलाव को लेकर इतिहासकार मिशेल डैनिनो से इंडियन एक्सप्रेस ने बातचीत की है. उन्होंने बताया कि यह तस्वीर छात्रों के साथ सरासर नाइंसाफी और गलत है. पूरी मूर्ति के धड़ को शेड करना एक तरह की सेंसरशिप है. मिशेल ने सवाल उठाया,

"क्या हम विक्टोरियन नैतिकता के दौर में वापस लौटना चाहते हैं? अगर हम बच्चों को यह नहीं दिखाना चाहते, तो क्या हमें उन्हें नेशनल म्यूजियम जाने से भी रोक देना चाहिए, जहां ऐसी कई अर्ध-नग्न या नग्न मूर्तियां रखी हैं? सबसे बड़ी बात यह है कि इमेज के साथ ऐसी छेड़छाड़ एक नकली कलाकृति को जन्म देती है, जिसका असलियत में कोई वजूद ही नहीं है. इतिहास और कला में ऐसा कभी नहीं किया जाता."

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उन्होंने यह खुलासा किया कि इससे पहले कक्षा 6 की किताब में भी NCERT के कुछ सदस्यों ने इस मूर्ति के नग्न होने पर आपत्ति जताई थी और इसे विवादास्पद बताया था, लेकिन तब डैनिनो के विरोध के बाद इसे हटाने के बजाय केवल अंदरूनी पन्ने पर छोटे आकार में छापा गया था. मिशेल उस समय NCERT की छठी क्लास की नई सोशल साइंस किताब की ‘टेक्स्टबुक डेवलपमेंट कमेटी’ के प्रमुख थे.

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NCERT ने क्या बताया?

इस पूरे विवाद पर NCERT के अधिकारियों का पक्ष भी सामने आया है. तस्वीर में बदलाव को लेकर NCERT के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी से जब सवाल किया गया, तो उन्होंने इन आरोपों को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, 

"मुझे नहीं लगता कि इसके पीछे कोई खास वजह है. छठी क्लास की सोशल साइंस किताब में डांसिंग गर्ल की तस्वीर वैसी ही है, जैसी अन्य हड़प्पाकालीन खोजों की है."

क्लास 9 की जिस किताब को लेकर विवाद हो रहा है. अब उसके बारे में भी जान लेते है. यह किताब NCERT की नई आर्ट्स एजुकेशन सीरीज का हिस्सा है, जिसे नई शिक्षा नीति यानी NEP और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क यानी NCF के तहत तैयार किया गया है. इसके तहत अब तक क्लास 1 से 9 तक की किताबें जारी की जा चुकी हैं.

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